भूटान की एक हिमनद झील फट गई है और उसका पानी भारत की ओर बढ़ रहा है। उत्तर बंगाल और असम में संकोश नदी पर रेड अलर्ट जारी है और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जानिए क्या हुआ, कहां खतरा है और GLOF आखिर होता क्या है।
क्या हुआ: भूटान की झील फटी, 74 लाख घन मीटर पानी बहा
रिपोर्टों के अनुसार, भूटान के गासा जिले में लुंगो के लाया गेवोग इलाके में स्थित शिंताफू झील में गुरुवार (29 अक्टूबर) की शाम ग्लेशियर झील विस्फोट (GLOF) हुआ। भूटान की उन 17 हिमनद झीलों में से एक मानी जाने वाली इस झील से अनुमानित 74 लाख घन मीटर पानी बह निकला।
पानी मो छू (मोफू) नदी के रास्ते नीचे की ओर बढ़ा। रात करीब 8:15 बजे बाढ़ का पानी टाक्तसेमाखांग पहुंचा, जहां लाया जाने वाली सड़क को नुकसान पहुंचा, गासा छाछू गर्म पानी के झरने का परिसर बह गया और पुनाखा-गासा राजमार्ग का एक हिस्सा कट गया। भूटान के सरकारी प्रसारक बीबीएस के हवाले से खबर है कि दो बेली पुल भी बह गए होंगे।
भूटान का राष्ट्रीय जलविज्ञान एवं मौसम विज्ञान केंद्र ताशिथांग और येबेसा में नदी के जलस्तर पर नजर रख रहा है और चेतावनी सायरन बजाए गए हैं।
भारत में अलर्ट: संकोश नदी पर रेड अलर्ट, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर
पानी मो छू से पुनात्सांगछू नदी में मिलकर भारत में संकोश नदी के रूप में प्रवेश करता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने गुरुवार को विशेष परामर्श जारी कर पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी जिलों को अचानक जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दी थी। मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ का पानी सीमा तक पहुंचने में छह से आठ घंटे लग सकते हैं।
उत्तर बंगाल में अलीपुरद्वार जिला रेड अलर्ट पर है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 4,000 से 5,000 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है और 6,000 से अधिक लोगों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। कूचबिहार के तूफानगंज इलाके में भी लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है। नदी किनारे बस्तियों में लाउडस्पीकर से घोषणाएं की गईं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें तैनात और तैयार रखी गई हैं।
असम में धुबरी और कोकराझार जिलों पर करीबी नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और NDRF व अन्य एजेंसियों के संपर्क में है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, शुक्रवार सुबह 6:30 बजे तक संकोश नदी का जलस्तर स्थिर था, लेकिन प्रशासन और राहत टीमें अलर्ट पर बनी हुई हैं।
दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने भी लोगों से अपील की है कि संकोश और उसकी सहायक नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में रहने वाले लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाएं और दार्जिलिंग पहाड़ियों, तराई व डूअर्स क्षेत्र के लोग सतर्क रहें। पश्चिम बंगाल के मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने चाय बागानों और नदी तटों के पास रहने वालों से तुरंत खाली करने की अपील की है।
GLOF क्या होता है: झील का बांध टूटते ही नीचे तबाही
GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड तब होता है जब हिमनद से बनी झील को रोके रखने वाला प्राकृतिक बांध — बर्फ, मलबा या चट्टान — टूट जाता है। भारी बारिश, भूस्खलन या बर्फ के टुकड़े गिरने से झील में अचानक दबाव बढ़ता है और एक साथ लाखों घन मीटर पानी नीचे की घाटियों में बह निकलता है। यही वजह है कि GLOF की चेतावनी में समय बहुत कम होता है: पानी पहाड़ से मैदान तक कुछ ही घंटों में पहुंच सकता है।
इस मामले में भी यही क्रम दिखा — झील फटी, पानी मो छू नदी में उतरा और कुछ ही घंटों में भारत की सीमा की ओर बढ़ चला। यही कारण है कि प्रशासन ने रात में ही निकासी शुरू कर दी, बजाय सुबह का इंतजार करने के।
आगे क्या: बारिश का भी खतरा, नदी किनारों से दूर रहें
चिंता बढ़ाने वाली एक और बात यह है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को अलीपुरद्वार में भारी बारिश का अनुमान जताया है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। हालांकि शुक्रवार सुबह तक संकोश का जलस्तर स्थिर बताया गया है और पानी के बहाव की तीव्रता में कुछ कमी की भी खबर है, फिर भी संकोश नदी प्रणाली पर रेड अलर्ट जारी है और भारत व भूटान के अधिकारियों के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है।
नदी किनारे, निचले इलाकों और चाय बागानों के पास रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक घोषणाओं का पालन करें, नदी किनारों से दूर रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें। स्थिति पर नजर बनी हुई है; नया अपडेट आते ही Global Insight आपको बताएगा।
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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, द डेली पायनियर। संबंधित खबर: बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम: तमिलनाडु-केरल में भारी बारिश का अलर्ट।
