BvS10 Sindhu: L&T and BAE Systems Begin Building Indian Army's All-Terrain Vehicle in India

भारतीय सेना की ऊंचाई वाले इलाकों में आवाजाही अब और मज़बूत होने जा रही है। बीएई सिस्टम्स और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने हजीरा में सेना के लिए बीवीएस10 'सिंधु' ऑल-टेरेन वाहन का उत्पादन शुरू कर दिया है। यह वाहन बर्फ, रेगिस्तान, दलदल और पानी — हर तरह की ज़मीन पर चल सकता है, और इसे खास तौर पर भारतीय सेना की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है।

बर्फीले हिमालयी इलाके में चलता दो हिस्सों वाला ट्रैक्ड सैन्य वाहन और सैनिकों का चित्रण

रिपोर्टों के अनुसार, उत्पादन की शुरुआत 28 अक्टूबर को हुई और 29 अक्टूबर को इसकी घोषणा की गई, जब बीएई सिस्टम्स के शीर्ष अधिकारी हजीरा स्थित एलएंडटी के आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स पहुंचे। भारत में बनने वाले ये वाहन 'मेक इन इंडिया' पहल का एक और बड़ा कदम हैं।

सिंधु क्या है और यह खास क्यों है

बीवीएस10 सिंधु एक आर्टिकुलेटेड (जुड़े हुए दो हिस्सों वाला) उभयचर ट्रैक्ड वाहन है। इसका अगला और पिछला हिस्सा अलग-अलग मुड़ सकता है, जिससे यह कठिन रास्तों पर भी आसानी से चलता है। रिपोर्टों के अनुसार, यह वाहन एक बार में 10 यात्रियों को ले जा सकता है और कच्छ के रण से लेकर लेह की ऊंचाइयों तक, अत्यधिक गर्मी और सर्दी दोनों में काम कर सकता है।

भारतीय सेना के लिए इसमें खास बदलाव किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सिंधु को ऊंचाई वाले इलाकों के लिए ज़्यादा ताकत दी गई है और इसमें विंटराइज़ेशन किट लगाई गई है, ताकि बर्फीले मौसम में भी यह भरोसेमंद बना रहे। एलएंडटी के इंजीनियरों को बीएई सिस्टम्स के स्वीडन स्थित हग्गलंड्स संयंत्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा, और वाहन के रखरखाव व मरम्मत की ज़िम्मेदारी भी एलएंडटी की ही होगी।

पहले चरण में कितने वाहन, कब तक डिलीवरी

रिपोर्टों के अनुसार, पहले चरण में 18 वाहन बनाए जाएंगे, जो सभी ट्रूप-कैरियर संस्करण होंगे। इनका उत्पादन एलएंडटी के हजीरा संयंत्र में बीएई सिस्टम्स से मिली तकनीक हस्तांतरण के आधार पर हो रहा है। पहली खेप की डिलीवरी 2027 की दूसरी तिमाही से शुरू होने की उम्मीद है और पूरा ऑर्डर दिसंबर 2027 तक पूरा हो जाएगा।

यह सौदा नवंबर 2025 में हुए अनुबंध का अगला चरण है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सेना की यह ज़रूरत 2022 में रक्षा मंत्रालय की मांग से शुरू हुई थी, और बीएई सिस्टम्स व एलएंडटी ने सितंबर 2023 में संयुक्त रूप से बीवीएस10 का प्रस्ताव दिया था। वाहन में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी, जो मेक इन इंडिया के लक्ष्य के अनुरूप है।

सेना के लिए इसका क्या मतलब है

लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में और कच्छ के दलदली रण में सैनिकों व साज़ो-सामान को पहुंचाना सेना की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। पहले की रिपोर्टों के अनुसार, इन वाहनों की तैनाती की योजना लद्दाख और भुज जैसे इलाकों के लिए बनाई गई थी, जहां सामान्य वाहन नहीं पहुंच पाते। सिंधु के आने से इन इलाकों में सेना की गतिशीलता और रसद क्षमता दोनों बढ़ेंगी।

बीवीएस10 प्लेटफॉर्म पहले से ही कई देशों की सेनाओं में इस्तेमाल हो रहा है। भारत के लिए तैयार किया गया सिंधु संस्करण इस सिद्ध प्लेटफॉर्म पर भारतीय ज़मीन और मौसम के हिसाब से किए गए बदलावों का नतीजा है। अगर उत्पादन और डिलीवरी तय समय पर होती है, तो यह रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगा।

स्रोत: द हिंदू बिज़नेसलाइन, टाइम्स ऑफ इंडिया। Global Insight पर रक्षा से जुड़ी ऐसी ही खबरों के लिए हमें फॉलो करें।

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