राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शांति भंग की आशंका में प्रिवेंटिव गिरफ्तारी में ले लिया — यह कार्रवाई पार्टी के प्रस्तावित 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च से ठीक पहले कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के बाहर हुई। शनिवार को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाना है।
गिरफ्तारी का आधार क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की — ये धाराएं शांति बनाए रखने की सुरक्षा और संज्ञेय अपराधों को रोकने हेतु प्रिवेंटिव अरेस्ट से जुड़ी हैं। पुलिस का कहना है कि दीपके को सेंट्रल पार्क न जाने के दो नोटिस दिए गए थे, जिनका पालन नहीं हुआ। साथ ही पुलिस का आरोप है कि दीपके ने पहले की एक प्रिवेंटिव गिरफ्तारी के दौरान दिए गए ₹50,000 के पीस बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया, जिसमें उन्हें एक साल तक सार्वजनिक शांति भंग न करने का निर्देश था।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह आंदोलन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर है — CJP का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में हेरफेर हुई। इसी कड़ी में पार्टी के दो सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था — यह घटना जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के एक दिन बाद हुई थी। शुक्रवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया गया, लेकिन दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
दोनों पक्षों के दावे
CJP ने आरोप लगाया है कि दीपके को हिरासत के बाद अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और उनके वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। वहीं केरलम से आए पार्टी के चार प्रतिनिधियों ने हिरासत के दौरान पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है — ये सभी आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कनॉट प्लेस निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है और NDMC ने प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं दी थी, इसलिए कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़रूरी थी। बेंगलुरु में भी पुलिस ने टाउन हॉल के पास CJP के तिरंगा मार्च की अनुमति से इनकार कर दिया, कर्नाटक हाई कोर्ट के उन निर्देशों का हवाला देते हुए जिनके तहत प्रदर्शन सिर्फ फ्रीडम पार्क में हो सकते हैं।
आगे क्या?
शनिवार को SEM कोर्ट में पेशी के बाद इस मामले की कानूनी दिशा तय होगी। यह मामला दो अहम सवाल उठाता है — एक ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार, दूसरी ओर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की ज़िम्मेदारी। अदालत की कार्यवाही और आने वाले दिनों के घटनाक्रम पर नज़र रहेगी। राजनीति से जुड़ी एक और बड़ी खबर — ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में ABVP की जीत पर हमारा विश्लेषण पढ़ें।
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