कल्पना कीजिए — गंगा के किनारे खड़े हैं, और अचानक आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना गूँज उठती है। एक के बाद एक राफेल, सुखोई और तेजस ऐसे करतब दिखाते हैं कि नीचे खड़ी लाखों की भीड़ की साँसें थम जाती हैं। यह कोई फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि वाराणसी में हो रहा भारतीय वायुसेना का भव्य एयर शो है, जिसका नाम है — 'विंग्स ओवर गंगा'।
रिपोर्टों के अनुसार, यह एयर शो भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन मध्य वायु कमान (सेंट्रल एयर कमांड) कर रही है और यह नमो घाट, वाराणसी में 22, 24 और 25 अक्टूबर, 2026 को हो रहा है। इसमें लगभग 100 विमान भाग ले रहे हैं — एक ऐसा नज़ारा जो काशी के लोगों के लिए लंबे समय तक यादगार रहेगा।
100 विमान, 12 एयरबेस और दमदार लड़ाकू बेड़ा
रिपोर्टों के अनुसार, इस एयर शो में लगभग 100 विमान हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 52 लड़ाकू विमान और 15 परिवहन विमान शामिल हैं। ये विमान देश के 12 एयरबेस से उड़ान भर रहे हैं। बेड़े में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, मिराज 2000 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं, साथ ही स्वदेशी तेजस भी अपनी ताकत दिखा रहा है। इसके अलावा, चिनूक हेलीकॉप्टर का प्रदर्शन भी इस शो का एक खास आकर्षण है।
यह सूची अपने आप में भारत की वायु शक्ति की एक झलक है — पुराने भरोसेमंद लड़ाकू विमानों से लेकर आधुनिक राफेल तक, और स्वदेशी तकनीक का प्रतीक तेजस तक। रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता की कहानी को समझने के लिए सेना के लिए स्वदेशी रडार सौदे पर हमारी पिछली रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।
'काशी' लिखा आसमान में: पहले दिन का नज़ारा
इस एयर शो का सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब तीन किरण प्रशिक्षक विमानों ने आसमान में तिरंगे के रंगों के साथ 'काशी' शब्द उकेरा। रिपोर्टों के अनुसार, पहले दिन, 22 अक्टूबर को ही लगभग 5 लाख लोगों ने यह शो देखा। कुल मिलाकर 15 से 20 लाख दर्शकों के आने की उम्मीद जताई गई है — यानी यह सिर्फ एक सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक जन-उत्सव बन गया है।
गंगा के किनारे, घाटों की पृष्ठभूमि में लड़ाकू विमानों के करतब देखना अपने आप में अनोखा अनुभव है। यही वजह है कि वाराणसी को इस आयोजन के लिए चुना जाना भी प्रतीकात्मक लगता है — जहाँ परंपरा और आधुनिक भारत की ताकत एक ही फ्रेम में दिखती है।
25 अक्टूबर का समापन और सुरक्षा की अभेद्य तैयारी
रिपोर्टों के अनुसार, 25 अक्टूबर को होने वाले समापन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की उम्मीद है। यह जानकारी अभी अपेक्षित कार्यक्रम के रूप में सामने आई है, इसे अंतिम पुष्टि के तौर पर नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
इतनी बड़ी भीड़ और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के भी व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 79 अस्थायी पुलिस थाने बनाए गए हैं और लगभग 11,900 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही पीएसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बम निरोधक दस्ता और एटीएस भी तैनात हैं।
क्यों खास है यह एयर शो?
यह एयर शो सिर्फ करतबों का प्रदर्शन नहीं है। इसका पहला संदेश आम लोगों तक है — कि देश की हवाई सुरक्षा किन हाथों में है और वह कितनी सक्षम है। जब आम दर्शक राफेल और तेजस को अपनी आँखों के सामने उड़ते देखते हैं, तो रक्षा तकनीक उनके लिए किसी दूर की खबर नहीं रह जाती, बल्कि एक जीवंत अनुभव बन जाती है।
दूसरा संदेश रणनीतिक है। भारत इन दिनों रक्षा सहयोग को लगातार मज़बूत कर रहा है — हाल ही में भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर हुई बातचीत भी इसी दिशा का संकेत है। ऐसे में अपनी वायु शक्ति का सार्वजनिक प्रदर्शन भारत की आत्मविश्वासी छवि को और मज़बूत करता है।
तीसरा पहलू युवाओं से जुड़ा है। किरण जैसे प्रशिक्षक विमानों और तेजस जैसे स्वदेशी विमानों को देखकर युवाओं में वायुसेना और एयरोस्पेस के प्रति रुचि बढ़ना स्वाभाविक है। किसी भी देश की रक्षा शक्ति का भविष्य आखिरकार इन्हीं युवाओं के हाथों में होता है।
कुल मिलाकर, 'विंग्स ओवर गंगा' काशी के आसमान में सिर्फ विमानों की उड़ान नहीं है — यह परंपरा, तकनीक और राष्ट्रीय गौरव का एक साझा उत्सव है। इसकी विस्तृत जानकारी इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट और द स्टेट्समैन की रिपोर्ट में पढ़ी जा सकती है।
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