मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपना IPO ला रही है — और यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू होगा। कंपनी करीब ₹30,213 करोड़ जुटाने की तैयारी में है, जो 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,859 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा। प्राइस बैंड से लेकर GMP तक, हर जरूरी डिटेल सामने आ चुकी है।
साइज और प्राइस बैंड
कंपनी ने प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया है (फेस वैल्यू ₹10)। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है — 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे, कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं है, यानी कोई पुराना शेयरधारक अपना हिस्सा नहीं बेच रहा। ऊपरी बैंड पर कंपनी का पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप करीब ₹10.30 लाख करोड़ आंका जा रहा है, जबकि रिलायंस की हिस्सेदारी 64.5% बनी रहेगी।
जरूरी तारीखें और लॉट साइज
एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को खुलेगी। आम निवेशकों के लिए IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। न्यूनतम बोली 12 शेयरों की होगी — ऊपरी प्राइस पर एक लॉट के लिए करीब ₹13,428 लगाने होंगे, और उसके बाद 12 के गुणक में ही आवेदन होगा।
GMP क्या कह रहा है?
ग्रे मार्केट में आज (16 अक्टूबर) Jio IPO का प्रीमियम ₹221-230 के आसपास चल रहा है — ऊपरी प्राइस बैंड से करीब 20% ज्यादा। इसका मतलब है कि अनौपचारिक बाजार लिस्टिंग प्राइस करीब ₹1,340 के आसपास होने का अनुमान लगा रहा है। पिछले कुछ सत्रों में GMP ₹148 से बढ़कर ₹221 तक पहुंचा है, जो मजबूत मांग का संकेत है। (याद रखें: GMP सिर्फ अनौपचारिक संकेत है, गारंटी नहीं।)
किन दिग्गजों की नजर?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एंकर बुक में ब्लैकरॉक, एलियांज, सिंगापुर के GIC, फिडेलिटी और नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड जैसे ग्लोबल दिग्गजों ने रुचि दिखाई है। घरेलू मोर्चे पर SBI म्यूचुअल फंड, LIC, ICICI प्रूडेंशियल, HDFC म्यूचुअल फंड और कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड जैसे नाम संभावित बोलीदाताओं में हैं।
शेयरहोल्डर कोटा और कर्मचारी छूट
RIL के शेयरधारकों के लिए ₹2,500 करोड़ तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं — लेकिन इसके लिए रिकॉर्ड डेट 14 अक्टूबर 2026 थी, जो बीत चुकी है। यानी अब RIL शेयर खरीदने से इस कोटे की पात्रता नहीं मिलेगी; पात्र वही हैं जिनके डीमैट में उस तारीख को RIL शेयर थे। वहीं, कर्मचारी रिजर्वेशन में आवेदन करने वाले योग्य कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹54 की छूट मिलेगी।
पैसा कहां जाएगा?
इस IPO की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू है — जुटाई गई रकम में से करीब ₹27,500 करोड़ रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज चुकाने में जाएगा। यानी पैसा कंपनी के ही बैलेंस शीट को मजबूत करेगा, किसी प्रमोटर की जेब में नहीं। कर्ज घटने से ब्याज लागत कम होगी, जो लंबी अवधि में मुनाफे के लिए अच्छा संकेत है। यही वजह है कि प्राइस बैंड के ऐलान के बाद 15 अक्टूबर को रिलायंस का शेयर 3.44% चढ़ा — बाजार इसे वैल्यू अनलॉकिंग के तौर पर देख रहा है।
यह लेख केवल जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। IPO में आवेदन से पहले आधिकारिक RHP और अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
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