मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हजारों छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस परीक्षा पास करने के लिए एक अतिरिक्त "मर्सी अटेम्प्ट" देने का फैसला किया है। यानी तय 4 अटेम्प्ट के अलावा छात्रों को एक और मौका मिलेगा — कुल 5 अटेम्प्ट। यह फैसला 15 अक्टूबर 2026 को जारी एक सार्वजनिक नोटिस के जरिए सामने आया है।
क्या है NMC का नया फैसला?
NMC की अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB) की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2019-20 और उसके बाद दाखिला लेने वाले एमबीबीएस छात्र फर्स्ट प्रोफेशनल परीक्षा में एक अतिरिक्त प्रयास कर सकेंगे। यह फैसला NMC की 18वीं बैठक (23 सितंबर 2026) में लिया गया था, और नोटिस पर NMC सचिव डॉ. राघव लैंगर के हस्ताक्षर हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया और मेडिकल डायलॉग्स समेत मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह छूट छात्रों, विश्वविद्यालयों और अन्य हितधारकों के अभ्यावेदनों के बाद दी गई है। इनमें कोविड-19 महामारी से पढ़ाई में आई बाधा, स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और निजी परेशानियों जैसी असाधारण परिस्थितियों का हवाला दिया गया था। NMC ने इसे "वन-टाइम एक्सेप्शनल" यानी एकबारगी विशेष छूट बताया है — नियम में स्थायी ढील नहीं।
कौन पात्र है और कौन नहीं?
पात्र: 2019-20 या उसके बाद के शैक्षणिक वर्षों में एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्र, जिनका एडमिशन अभी भी वैध है — यानी विश्वविद्यालय या कॉलेज ने उसे रद्द न किया हो। खास बात यह है कि यह अतिरिक्त अटेम्प्ट उन छात्रों को भी मिलेगा, जिन्होंने फर्स्ट प्रोफेशनल कोर्स पूरा करने की तय 4 साल की अवधि पार कर ली है।
पात्र नहीं: वे छात्र जिन्होंने पहले ही किसी मर्सी अटेम्प्ट का लाभ लेकर कुल 5 अटेम्प्ट पूरे कर लिए हैं — उन्हें छठा मौका नहीं मिलेगा, चाहे वे पुराने NMC फैसले या किसी कोर्ट के आदेश का हवाला ही क्यों न दें।
10 साल की समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं
NMC ने साफ किया है कि एमबीबीएस कोर्स — अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) सहित — दाखिले की तारीख से 10 साल के भीतर पूरा करना होगा। अतिरिक्त अटेम्प्ट मिलने का मतलब यह नहीं है कि यह अधिकतम अवधि बढ़ गई है। यानी मौका एक ज्यादा मिला है, समय नहीं।
इस फैसले का मतलब क्या है?
यह पहली बार नहीं है जब NMC ने ऐसी राहत दी हो — दिसंबर 2023 में 2019-20 बैच के लिए और बाद में 2020-21 बैच के लिए भी एकबारगी छूट दी गई थी। उस दौर के छात्र कोविड के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे; कई की पढ़ाई महीनों तक ठप रही।
दिलचस्प यह है कि हाल के महीनों में अदालतों ने 4-अटेम्प्ट के नियम को ही सही ठहराया था — सितंबर 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट और अगस्त 2026 में केरल हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि फर्स्ट ईयर के लिए अधिकतम 4 अटेम्प्ट ही मिलेंगे। NMC का ताजा फैसला नियम को पलटता नहीं, बल्कि "ट्रांजिशनल" राहत के तौर पर लंबित मामलों को निपटाता है।
छात्रों के लिए संदेश साफ है: यह आखिरी सुरक्षा-जाल हो सकता है, आदत नहीं। जो छात्र इस दायरे में आते हैं, उन्हें NMC की वेबसाइट पर पूरा नोटिस पढ़कर पात्रता और शर्तें जरूर समझ लेनी चाहिए।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं।
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