Sensex Falls 460 Points, Nifty Below 22,700: Why Markets Slipped for the 3rd Straight Day

22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे दिन लाल निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत लुढ़ककर 73,249.39 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.65 पर बंद हुआ — 22,700 के अहम स्तर से नीचे।

सुबह से ही बाजार पर दबाव था। कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुका था, एशिया के बाजारों में भारी बिकवाली हो रही थी और विदेशी निवेशक बिकवाली के मूड में थे। दिन के निचले स्तरों से कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन बंद भाव लाल निशान में ही रहा। हर गिरावट के दिन की तरह आज भी वही सवाल है — आखिर बाजार क्यों गिरा? यहां हैं इसके तीन बड़े कारण।

22 अक्टूबर को गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार के प्रतीकात्मक चित्रण

पहला कारण: कच्चा तेल 110 डॉलर के पार, सऊदी ठिकानों पर हमले

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा और दिन के दौरान 111-112 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा — पांच महीने के उच्चतम स्तर के करीब। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब के शायबा तेल क्षेत्र और दम्मम हवाई अड्डे पर हुए हमलों के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने सऊदी अरब से अपने गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिजनों को निकलने का आदेश भी दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

तेल बाजार पर यह दबाव नया नहीं है। मार्च 2026 में ईरान से शुरू हुए संघर्ष के बाद से कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही में ब्रेंट का औसत भाव 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है — यानी महंगे तेल का दौर अभी थमने वाला नहीं दिख रहा।

दूसरा कारण: एशिया भर में बिकवाली, AI खर्च को लेकर बढ़ता डर

दलाल स्ट्रीट ने वॉल स्ट्रीट की बढ़त को नजरअंदाज कर एशिया का रुख अपनाया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 3.1 प्रतिशत टूटा, हांगकांग का हैंग सेंग लगभग 3 प्रतिशत गिरा और जापान का निक्केई भी 2 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़का। चीन और ऑस्ट्रेलिया के बाजार भी लाल निशान में बंद हुए।

रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी टेक कंपनियों के मिले-जुले नतीजों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है — एक तरफ टेस्ला के मुनाफे में गिरावट आई, दूसरी तरफ मेटा ने AI पर खर्च का अनुमान बढ़ा दिया। निवेशक अब सवाल पूछ रहे हैं कि AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी खर्च का रिटर्न कब और कितना मिलेगा। इसी डर से चिप और टेक शेयरों में बिकवाली तेज हुई, जिसका असर पूरे एशिया के बाजारों पर पड़ा।

तीसरा कारण: विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर बाजार चौड़ाई

एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 3,458.70 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 2,891.32 करोड़ रुपये की खरीदारी कर गिरावट को थामने की कोशिश की। घरेलू खरीदारी ने झटके को कुछ नरम जरूर किया, लेकिन विदेशी बिकवाली का पलड़ा भारी रहा।

बिकवाली सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही — यह पूरे बाजार में फैली थी। एनडीटीवी प्रॉफिट के अनुसार BSE 500 के शेयरों में सिर्फ 46 बढ़त में रहे, जबकि 451 में गिरावट आई। मीडिया, FMCG, IT और एनर्जी सेक्टर सबसे ज्यादा टूटे। बजाज फाइनेंस, सिप्ला और ICICI बैंक जैसे कुछ शेयर हरे निशान में बंद हुए, लेकिन नेस्ले, इटर्नल, HDFC बैंक और रिलायंस जैसे दिग्गजों में बिकवाली ने इंडेक्स को नीचे खींचा।

भारत के लिए महंगे कच्चे तेल का मतलब क्या है?

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की हर बढ़त सीधे आयात बिल बढ़ाती है और महंगाई को जिद्दी बना सकती है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार महंगे कच्चे तेल से आयातित महंगाई और कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव की चिंता बढ़ गई है — यही वजह है कि तेल के दाम बढ़ते ही बाजार घबरा जाता है।

महंगाई की इन्हीं चिंताओं के बीच इस महीने सोने और चांदी की कीमतों में भी बड़ी हलचल देखी गई थी। बीच में 20 अक्टूबर को दशहरे की छुट्टी रही, जिसके बाद के कारोबारी सत्रों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा।

आगे बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी?

अब निवेशकों की नजर कुछ अहम संकेतों पर रहेगी — पश्चिम एशिया के हालात और कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों का रुख, भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति और विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव। जब तक कच्चा तेल ऊंचा बना रहेगा, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं।

स्रोत: एनडीटीवी प्रॉफिट और इकोनॉमिक टाइम्स की बाजार रिपोर्टिंग। ऐसी ही बाजार और बिज़नेस खबरों के लिए Global Insight को फॉलो करें।

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