बिहार के सीवान जिले में शुक्रवार (23 अक्टूबर 2026) की शाम एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 5 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, धमाका जामो (जामो बाजार) थाना क्षेत्र के अलम्पुर गांव में शाम करीब 5:20 बजे हुआ। घटना इतनी तेज़ थी कि इमारत का एक हिस्सा ढह गया और मलबा सड़क तक बिखर गया। यह एक विकसित होती खबर है; मृतकों का आंकड़ा अभी बदल सकता है।
कैसे हुआ हादसा
रिपोर्टों के अनुसार, यह विस्फोट पटाखा व्यापारी मोहम्मद अमीरुद्दीन मियां (65) के घर में हुआ, जहां पटाखे बनाए या स्टोर किए जाते थे। धमाके के बाद भी रुक-रुक कर विस्फोट होते रहे, जिससे बचाव कार्य में करीब 2 घंटे तक बाधा आई। इमारत का एक हिस्सा ढह जाने से कई लोग मलबे में दब गए, जिन्हें निकालने में राहत दलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
घटनास्थल पर करीब 8 एंबुलेंसें तैनात की गईं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम, डॉग स्क्वॉड और दमकल विभाग को भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस के अनुसार, मामले की गहन जांच के लिए महाराजगंज के एसडीपीओ अमन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम भी गठित की गई है।
किनकी मौत हुई — पुलिस और रिपोर्टों के अनुसार
सीवान के एसपी भरत सोनी ने 5 लोगों की मौत की पुष्टि की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में 65 वर्षीय मोहम्मद अमीरुद्दीन मियां, उनकी दो पोतियां (14 और 8 वर्ष की), 10 वर्ष का एक पड़ोसी लड़का और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।
एसपी ने यह भी बताया कि हादसे के बाद तीन और लोग खुद से निजी अस्पतालों में चले गए थे — उनकी स्थिति के बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसलिए मृतकों और घायलों का अंतिम आंकड़ा अभी स्थिर नहीं है; जैसे-जैसे आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, तस्वीर और साफ होगी।
थानेदार और चौकीदार निलंबित
घटना के बाद प्रशासन ने तेज कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, जामो बाजार के थानेदार धीरज कुमार और चौकीदार चन्द्रिका मांझी को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विस्फोट के कारणों की वैज्ञानिक जांच के लिए एफएसएल टीम बुलाई गई है।
डीएम विजय प्रकाश मीणा और एसपी भरत सोनी खुद घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्य की निगरानी की। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में प्रारंभिक मामला दर्ज कर लिया गया है। एबीपी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह इकाई अवैध रूप से सालों से चल रही थी — हालांकि यह एक मीडिया आउटलेट की रिपोर्टिंग है, इसकी आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
हर त्योहार से पहले दोहराता सवाल
इस हादसे के साथ एक पुराना सवाल फिर सामने आ गया है — त्योहारी सीजन में पटाखों की मांग चरम पर पहुंचते ही अवैध या बिना लाइसेंस वाली इकाइयां क्यों सक्रिय हो जाती हैं? दिवाली से ठीक पहले इस तरह की घटनाएं हर साल कहीं न कहीं सामने आती हैं। रिहायशी इलाकों में बारूद और पटाखों का भंडारण सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, फिर भी ऐसी इकाइयों पर समय रहते अंकुश नहीं लग पाता।
थानेदार और चौकीदार का निलंबन इस बात की स्वीकृति है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था में खामी रही है। अब एफएसएल की जांच बताएगी कि धमाके की असल वजह क्या थी — क्या यह बारूद का अनधिकृत भंडार था, सुरक्षा नियमों की अवहेलना थी, या कोई और कारण। प्रशासन के लिए असली चुनौती यही है कि त्योहार से पहले अवैध इकाइयों पर सख्त कार्रवाई हो और निगरानी केवल कागजों तक सीमित न रहे।
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मूल रिपोर्टें: द स्टेट्समैन, एबीपी लाइव, ET Now — पीड़ितों का ब्योरा टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार
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