भारतीय क्रिकेट में एक और बड़ी कुर्सी को लेकर दौड़ तेज़ हो गई है। पूर्व सलामी बल्लेबाज़ वसीम जाफर ने BCCI की सीनियर पुरुष चयन समिति के खाली पद के लिए आवेदन कर दिया है — और अगर वह चुने जाते हैं, तो सबसे ज़्यादा टेस्ट कैप के नियम के तहत सीधे चीफ सेलेक्टर बन सकते हैं। जाफर ने खुद PTI को इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "Yes, I have applied for the job" (हां, मैंने इस नौकरी के लिए आवेदन किया है)।
पद खाली क्यों हुआ?
यह रिक्ति अजित आगरकर के जाने से पैदा हुई है, जिनका चीफ सेलेक्टर के रूप में कार्यकाल 4 अक्टूबर 2026 को खत्म हुआ और दोनों पक्षों ने नवीनीकरण का विकल्प नहीं चुना। रिपोर्टों के अनुसार BCCI ने इस पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, जिनकी आखिरी तारीख 14 अक्टूबर थी। फिलहाल साउथ ज़ोन के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा अंतरिम अध्यक्ष के रूप में काम देख रहे हैं।
जाफर बनाम ओझा — नंबर क्या कहते हैं?
BCCI के संविधान के अनुसार पांच सदस्यीय चयन समिति में जिसके सबसे ज़्यादा टेस्ट मैच होते हैं, वही अध्यक्ष बनता है। जाफर ने 2000 से 2008 के बीच भारत के लिए 31 टेस्ट खेले, जिनमें 1,944 रन और 5 शतक शामिल हैं — वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ दोहरे शतक भी। वहीं ओझा ने 24 टेस्ट खेले हैं। यानी अगर क्रिकेट सलाहकार समिति (CAC) जाफर का नाम चुनती है, तो 7 टेस्ट के अंतर से वह ओझा से आगे निकलकर अध्यक्ष बन जाएंगे। घरेलू क्रिकेट में जाफर का रिकॉर्ड और भी धांसू है — 260 प्रथम श्रेणी मैचों में 19,410 रन और 57 शतक, रणजी ट्रॉफी इतिहास के सर्वाधिक रन और शतक।
दौड़ में और कौन?
रिपोर्टों के अनुसार CAC — जिसमें पूर्व खिलाड़ी अशोक मल्होत्रा और जतिन परांजपे हैं — ने कई उम्मीदवारों के वर्चुअल इंटरव्यू लिए। इनमें पूर्व ऑफ-स्पिनर रमेश पवार, पूर्व तेज़ गेंदबाज़ सलिल अंकोला, बड़ौदा के जैकब मार्टिन (10 वनडे) और कॉनर विलियम्स शामिल हैं। दिलचस्प यह है कि पार्थिव पटेल, जिनके आवेदन की सबसे ज़्यादा चर्चा थी, उन्होंने आवेदन ही नहीं किया। वहीं PTI की रिपोर्ट है कि BCCI के भीतर ओझा को ही अध्यक्ष बनाए रखने का मज़बूत समर्थन है — ऐसे में जाफर का चुना जाना तय नहीं है।
इसका टीम इंडिया पर क्या असर?
2027 वर्ल्ड कप (अफ्रीका) से करीब एक साल पहले चयन समिति की यह कुर्सी बेहद अहम है — टीम के भविष्य की रूपरेखा इसी पैनल के हाथों में होगी। जाफर का घरेलू क्रिकेट का गहरा अनुभव और कोचिंग पृष्ठभूमि (IPL, इंडिया और बांग्लादेश U19) उनके पक्ष में है, जबकि ओझा को मौजूदा व्यवस्था की निरंतरता का फायदा है। फैसला CAC के हाथ में है — और क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि BCCI अनुभव को चुनती है या निरंतरता को। IPL में भी कोचिंग की कुर्सियां हिल रही हैं — माहेला जयवर्धने के मुंबई इंडियंस से अलगाव पर हमारी खबर पढ़ें।
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