BRESE 2026 Opens Today in Delhi as India Chases 500 GW Clean Energy Goal

आज, 2 नवंबर से नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो (ब्रेसे) 2026 शुरू हो रहा है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से आयोजित यह चार दिवसीय सम्मेलन 5 नवंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम करीब 4:30 बजे इसका उद्घाटन करेंगे और सभा को संबोधित करेंगे, ऐसा प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से रविवार को जारी बयान में बताया गया था। इस सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें 40 से अधिक मंत्री भी शामिल हैं।

भारत मंडपम में स्वच्छ ऊर्जा सम्मेलन के दौरान सौर पैनल और पवन टरबाइन की प्रदर्शनी को दर्शाती तस्वीर।


सम्मेलन का विषय और उद्देश्य

इस वर्ष सम्मेलन का विषय 'निवेश करें, नवाचार करें, प्रेरित करें' रखा गया है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत अब केवल स्वच्छ ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने की बात नहीं कर रहा, बल्कि इसके लिए वैश्विक पूंजी, तकनीक और उद्योग को एक मंच पर लाना चाहता है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए करीब 220 अरब डॉलर का निवेश जुटाना है। मंत्रालय के सचिव संतोष सारंगी ने कहा है कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा अब एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। यह सम्मेलन उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

भारत कहां खड़ा है: 308 गीगावाट से 500 गीगावाट तक

रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने अब तक 308 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता स्थापित कर ली है और 2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य रखा गया है। इस अंतर को पाटने के लिए 2027 से 2030 के बीच करीब 220 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत बताई गई है। इसके साथ ही ऊर्जा भंडारण की क्षमता बढ़ाना, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और घरेलू विनिर्माण को विस्तार देना भी जरूरी होगा। रिपोर्टों के अनुसार, भारत नवीकरणीय ऊर्जा और सौर क्षमता में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जबकि पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है।

किन विषयों पर होगी चर्चा

सम्मेलन में नवीकरणीय ऊर्जा वित्तपोषण, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, घरेलू विनिर्माण और तकनीकी विकास जैसे विषयों पर चर्चा होगी। उच्च स्तरीय पूर्ण सत्र, मंत्रिस्तरीय चर्चाएं, सीईओ गोलमेज बैठकें और देश व राज्य सत्र आयोजित किए जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन इसमें साझेदार देशों के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित तेरह राज्य अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और निवेश अवसरों का प्रदर्शन करेंगे।

सौर गठबंधन और हरित हाइड्रोजन भी साथ

ब्रेसे 2026 के साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। सौर गठबंधन की सभा में विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों में सौर ऊर्जा के विस्तार, वित्तपोषण और क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनी में 400 से अधिक निर्माता, विकासकर्ता, तकनीक प्रदाता, कंपनियां, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थान अपने समाधान दिखाएंगे। इसका अर्थ यह है कि यह सम्मेलन केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक और उत्पादों का सीधा प्रदर्शन भी होगा।

आम लोगों के लिए इसका क्या अर्थ है

स्वच्छ ऊर्जा सम्मेलन की खबरें अक्सर बड़ी संख्याओं और लक्ष्यों तक सीमित लगती हैं, लेकिन इसका असर आम जीवन पर भी पड़ता है। सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता बढ़ने से बिजली की आपूर्ति स्थिर होती है और लंबे समय में बिजली की लागत पर दबाव कम हो सकता है। घरेलू विनिर्माण बढ़ने से सौर पैनल, बैटरी और ऊर्जा उपकरणों के क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं। राज्यों की भागीदारी का अर्थ यह है कि निवेश केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अलग-अलग राज्यों में परियोजनाएं और कारखाने लग सकते हैं। यही वजह है कि इस सम्मेलन में होने वाली घोषणाओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि, लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। ऊर्जा भंडारण की कमी, जमीन की उपलब्धता, ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार और निवेश की गति — ये सभी बड़ी चुनौतियां हैं। 220 अरब डॉलर का निवेश जुटाना तभी संभव होगा, जब नीतियां स्थिर रहें और परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिले। सम्मेलन की सफलता का असली मापदंड यह होगा कि चार दिनों की चर्चा के बाद कितने समझौते जमीन पर उतरते हैं और कितनी परियोजनाएं वास्तव में शुरू होती हैं। ग्लोबल इनसाइट सम्मेलन के दौरान होने वाली प्रमुख घोषणाओं पर नजर बनाए रखेगा।

स्रोत: न्यू इंडियन एक्सप्रेस और द स्टेट्समैन की रिपोर्टों के अनुसार (प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के हवाले से)।

स्वच्छ ऊर्जा और भारत की ऊर्जा यात्रा से जुड़ी खबरों के लिए ग्लोबल इनसाइट को फॉलो करते रहें।

 

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