India Signs ₹53,866 Crore Deal for 8 Next-Gen Navy Corvettes: GRSE to Build 5, GSL 3

भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को आठ अगली पीढ़ी के कॉर्वेट (Next Generation Corvettes) के निर्माण के लिए ₹53,866.50 करोड़ के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। ये युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन पर बनेंगे और इन्हें देश के दो सरकारी शिपयार्ड तैयार करेंगे।

समुद्र में गश्त करता आधुनिक भारतीय नौसेना युद्धपोत — मूल चित्रण

रिपोर्टों के अनुसार, अनुबंध नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुए। इस सौदे को सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) ने पिछले हफ्ते ही मंजूरी दी थी, जिसके बाद महज कुछ दिनों में अनुबंध संपन्न हो गए।

कौन बनाएगा कितने जहाज

समझौते के तहत कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) पांच कॉर्वेट बनाएगा, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) तीन जहाजों का निर्माण करेगी। GRSE मई 2025 में वाणिज्यिक बोलियां खुलने पर सबसे कम बोली लगाने वाला (L1) रहा था। रिपोर्टों के अनुसार, पहला जहाज 2030 तक नौसेना को मिलने की उम्मीद है।

पहली बार नौसेना का अपना डिजाइन, प्रतिस्पर्धा से चुने गए यार्ड

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पहली परियोजना है जिसमें जहाजों का डिजाइन खुद भारतीय नौसेना ने तैयार किया है और निर्माण के लिए रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से चुना गया है — नामांकन या विदेशी डिजाइन की लाइसेंस-निर्माण व्यवस्था से नहीं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यही बात इस सौदे को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मील का पत्थर बनाती है।

क्या कर सकेंगे ये युद्धपोत

ये बहु-भूमिका (multi-role) स्टील्थ युद्धपोत होंगे, जो हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे — तीनों मोर्चों पर कार्रवाई कर सकेंगे। इनमें उन्नत मिसाइलें, हथियार और सेंसर प्रणाली लगाई जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, ये जहाज नौसेना के पुराने खुकरी और कोरा श्रेणी के जहाजों की जगह लेंगे, जो अब तक एकल भूमिका वाले मिसाइल कॉर्वेट के रूप में सेवा दे रहे थे।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

निर्माण कार्यक्रम से अगले 10 वर्षों में शिपयार्डों में लगभग 72 लाख मानव-दिवस और सहायक उद्योगों व सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) में लगभग 460 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होने का अनुमान है — कुल मिलाकर 5.3 करोड़ से अधिक मानव-दिवस। यानी यह सौदा सिर्फ समुद्री सुरक्षा ही नहीं, बल्कि देश के जहाज निर्माण उद्योग और उससे जुड़े हजारों छोटे उद्यमों के लिए भी बड़ा अवसर है।

विश्लेषण: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए स्वदेशी, बहु-भूमिका वाले युद्धपोतों का बेड़ा तैयार करना रणनीतिक जरूरत बन गया है। इस सौदे से नौसेना की पहुंच और मारक क्षमता दोनों बढ़ेंगी, साथ ही घरेलू रक्षा उद्योग को लंबी अवधि का काम मिलेगा। अगली नजर इस बात पर रहेगी कि निर्माण समय पर शुरू होता है और पहला जहाज तय समय पर बेड़े में शामिल होता है या नहीं।

स्रोत: द हिंदू, सीएनबीसी-टीवी18। ऐसी ही खबरों के लिए Global Insight को फॉलो करें।

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