Air Chief Marshal Ashutosh Dixit Takes Charge as 29th IAF Chief, Succeeds AP Singh

भारतीय वायुसेना को शनिवार, 31 अक्टूबर को अपना 29वां प्रमुख मिल गया। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने नई दिल्ली में वायुसेना की कमान संभाली। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया, जो चार दशक से अधिक की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

रिपोर्टों के अनुसार, विदाई समारोह में रेस कोर्स वायुसेना स्टेशन पर निवर्तमान प्रमुख को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने दीक्षित को कमान सौंपी। दीक्षित इससे पहले वायुसेना के उप प्रमुख के पद पर थे।

वायुसेना समारोह में उड़ते लड़ाकू विमानों का चित्रण

कौन हैं आशुतोष दीक्षित?

दीक्षित का जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था और वे 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे। वे 20 से अधिक प्रकार के विमानों पर 3,500 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव रखते हैं और एक अनुभवी टेस्ट पायलट भी रहे हैं।

अपने करियर में वे एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख (सीआईएससी) और मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी रणनीतिक योजना में अहम भूमिका रही। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, वायु सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

कमांडर के सामने चुनौतियां

दीक्षित ऐसे समय में कमान संभाल रहे हैं, जब वायुसेना अपनी लड़ाकू क्षमता बढ़ाने, आधुनिकीकरण तेज करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाकू विमानों के बेड़े को मजबूत करना और नए विमानों के शामिल होने में देरी से निपटना उनकी प्राथमिकताओं में होगा।

स्वदेशी मंचों, जैसे हल्के लड़ाकू विमान तेजस, को बढ़ावा देने के उनके पुराने जुड़ाव को भी इस संदर्भ में देखा जा रहा है। वायुसेना की तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता (जॉइंटनेस) और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी उनके अनुभव को अहम माना जा रहा है।

एक युग का अंत, नए अध्याय की शुरुआत

निवर्तमान प्रमुख एपी सिंह ने 30 सितंबर 2024 को वायुसेना प्रमुख का पद संभाला था और 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। उनके कार्यकाल को वायुसेना के आधुनिकीकरण और परिचालन तैयारियों के दौर के रूप में याद किया जाएगा।

दीक्षित के नेतृत्व में वायुसेना की नजर अब अगले दशक की चुनौतियों पर होगी — नई तकनीक, स्वदेशी उत्पादन और क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल। उनकी नियुक्ति से यह भी साफ है कि वायुसेना ने एक अनुभवी फाइटर पायलट और रणनीतिकार को शीर्ष पर चुना है।

वायुसेना प्रमुख का पद केवल औपचारिक नहीं होता — प्रमुख ही वायुसेना के संचालन, प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण की दिशा तय करते हैं और सरकार को वायु शक्ति के इस्तेमाल पर सलाह देते हैं। इसलिए नए प्रमुख की पहली प्राथमिकताएं — बेड़े की तैयारी, स्वदेशी विमानों का समावेश और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल — आने वाले वर्षों में वायुसेना की तस्वीर तय करेंगी। दीक्षित के टेस्ट पायलट और कमांड के अनुभव को इसी कसौटी पर देखा जाएगा।

मूल स्रोत: द हिंदू और बिजनेस टुडे। संबंधित: बीईएल का 770 करोड़ का रडार सौदा और भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी।

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