आंध्र प्रदेश में एक साथ 100 शहरी निकायों के चुनावों पर ब्रेक लग गया है। राज्य चुनाव आयोग ने 21 अक्टूबर की शाम आदेश जारी कर सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया को "तत्काल प्रभाव से रोक" दिया है। यह आदेश सीधे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आया है — यानी यह कोई राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि अदालत के आदेश का पालन है।
रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगे की पूरी चुनाव प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के हिसाब से ही बढ़ेगी। अब नजरें 22 अक्टूबर पर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया
21 अक्टूबर को न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की अवकाश पीठ ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि उम्मीदवारों की अंतिम सूची का प्रकाशन 25 अक्टूबर तक टाल दिया जाए। मूल कार्यक्रम के अनुसार यह सूची 21 अक्टूबर को ही जारी होनी थी।
डेक्कन हेराल्ड/पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने आयोग से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और अन्य उम्मीदवारों की उन शिकायतों पर गौर करने को कहा, जिनमें नामांकन से रोके जाने का दावा है — अदालत के अनुसार पार्टी ने प्रथम दृष्टया मामला बनाया है।
अदालत ने आयोग को 22 अक्टूबर तक नामांकन तिथि बढ़ाने पर फैसला करने का निर्देश दिया, और डीजीपी को कहा कि उम्मीदवारों और चुनाव कार्यालयों को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए — नामांकन निष्पक्ष चुनाव का अनिवार्य हिस्सा है।
चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया क्यों रोक दी
राज्य चुनाव आयुक्त अनिल चंद्र पुनेठा (आईएएस, सेवानिवृत्त) के आदेश में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए सभी 100 शहरी स्थानीय निकायों — 13 नगर निगम और 87 नगरपालिका/नगर पंचायत — की चुनाव प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 22 अक्टूबर को वह जिलाधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस आयुक्तों/पुलिस अधीक्षकों की रिपोर्टों के आधार पर अगला आदेश जारी करेगा। जहां-जहां नामांकन की तिथि बढ़ाने का फैसला होगा, वहां कम से कम 48 घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाएगा और चुनाव अधिसूचना में संशोधन किया जाएगा।
टाइमलाइन: कहां से कहां तक पहुंचा मामला
14 अक्टूबर को 100 शहरी निकायों के चुनाव की अधिसूचना जारी हुई। 16 से 18 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए गए और 19 अक्टूबर को नामांकनों की जांच (स्क्रूटनी) पूरी हुई। प्रगतिवादी और आईएएनएस की रिपोर्टों के अनुसार, 16 अक्टूबर को नामांकन के पहले ही दिन अन्नमय्या जिले में टीडीपी और वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें आईं थीं — दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए।
वाईएसआरसीपी का दावा है कि हिंसा और धमकियों के माहौल में उसके कई उम्मीदवार नामांकन ही नहीं दाखिल कर सके — यह पार्टी का आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं। पार्टी ने पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के 18 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें नामांकन अवधि एक दिन बढ़ाने से इनकार किया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को यह जांचने को कहा है कि क्या उम्मीदवारों को वाकई नामांकन से रोका गया।
आगे क्या होगा: 22, 25 और 27 अक्टूबर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग 22 अक्टूबर को क्या फैसला लेता है। अगर आयोग इस नतीजे पर पहुंचता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन नहीं दाखिल कर सके, तो उन इलाकों में नामांकन की तिथि कम से कम 48 घंटे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद ही मतदान और मतगणना की नई तारीखें तय होंगी — पहले मतदान 28 अक्टूबर और मतगणना 30 अक्टूबर को निर्धारित थी।
25 अक्टूबर अंतिम सूची के प्रकाशन की नई अंतिम तिथि है, और 27 अक्टूबर को आयोग को अनुपालन हलफनामा दाखिल करना है — उसी दिन अगली सुनवाई है। तब तक पूरा चुनावी कैलेंडर अधर में है।
विश्लेषण: 100 शहरी निकाय एक साथ — इसका मतलब है कि आंध्र प्रदेश के अधिकांश बड़े शहरी केंद्रों, जिनमें 13 नगर निगम शामिल हैं, का स्थानीय प्रशासन एक ही बार में तय होना था। सत्तारूढ़ टीडीपी के लिए यह पहला बड़ा शहरी परीक्षण था, जबकि विपक्षी वाईएसआरसीपी ने शुरू से ही प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह चुनाव शहरी आंध्र की सियासत की दिशा तय करेगा। अदालत ने राज्य पुलिस प्रमुख को सीधे सुरक्षा निर्देश दिए हैं — यह वही अदालत है जिसने हाल ही में बच्चों के इंटरनेट अधिकार को लेकर भी अहम आदेश दिया था। और चुनावी राजनीति की इसी गर्मी के बीच आंध्र में एंटी-एसआईआर मार्च जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जबकि कर्नाटक में जुलूस की अनुमति पर सियासत दिखा रही है कि अदालतों और राज्य सरकारों के बीच टकराव आम होता जा रहा है।
मूल स्रोत: एशियानेट न्यूज़ेबल — चुनाव आयोग के आदेश की पूरी खबर | डेक्कन हेराल्ड/पीटीआई — सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रिपोर्ट
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