Census 2027 Dates Announced: Door-to-Door Count From January 25, Self-Enumeration From January 10

देश की अगली जनगणना की तारीखें अब तय हो गई हैं। गृह मंत्रालय और महापंजीयक कार्यालय की ओर से शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना का काम देश के अधिकांश हिस्सों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक संशोधन दौर (रिविजनल राउंड) होगा, जिसमें छूटी हुई जानकारियों को दुरुस्त किया जाएगा।

यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह 2011 के बाद पहली जनगणना है। मूल रूप से यह 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण टल गई। अब, करीब डेढ़ दशक के अंतराल के बाद, देश एक बार फिर अपनी पूरी आबादी की गिनती करने जा रहा है — और इस बार डिजिटल औजारों के साथ।

जनगणना 2027 के दौरान टैबलेट लेकर घर के दरवाजे पर पहुंचा गणनाकर्मी और उसका स्वागत करता भारतीय परिवार

कब होगी गिनती और कैसे

जनगणना दो चरणों में होती है। पहला चरण — मकान सूचीकरण और आवास जनगणना — पहले ही पूरा हो चुका है। अब दूसरा चरण, यानी जनसंख्या गणना, घर-घर जाकर की जाएगी। गणनाकर्मी हर घर तक पहुंचेंगे और परिवार के सदस्यों की जानकारी दर्ज करेंगे।

इस बार गिनती का तरीका भी बदला हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, यह पहली जनगणना होगी जिसमें डिजिटल साधनों का इस्तेमाल होगा — गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे, साथ ही पारंपरिक घर-घर भ्रमण भी जारी रहेगा। यानी तकनीक और मानवीय पहुंच, दोनों का मेल इस बार देखने को मिलेगा।

गणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि 00:00 बजे तय की गई है। इसका मतलब है कि आंकड़े उसी क्षण की स्थिति के आधार पर दर्ज किए जाएंगे।

हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों के लिए कार्यक्रम अलग है। जिन राज्यों में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं — उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब और (गैर-हिमाच्छादित) उत्तराखंड — वहां स्वयं गणना 16 से 30 नवंबर 2026 तक और घर-घर गणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक होगी। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों तथा लद्दाख में गणना पहले ही पूरी हो चुकी है (30 सितंबर तक)। मणिपुर के लिए तारीखें अभी घोषित नहीं हुई हैं — वहां गणना स्थगित कर दी गई है।

स्वयं गणना: ऑनलाइन विकल्प

इस बार नागरिकों को एक नया विकल्प भी दिया गया है — स्वयं गणना। रिपोर्टों के अनुसार, 10 से 24 जनवरी 2027 तक लोग ऑनलाइन पोर्टल se.census.gov.in के जरिए खुद अपने परिवार की जानकारी भर सकेंगे।

लेकिन एक बात साफ है: ऑनलाइन फॉर्म भर देने से गणनाकर्मी का दौरा टल नहीं जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, गणनाकर्मी फिर भी हर घर जाएंगे और स्वयं भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे। यानी स्वयं गणना प्रक्रिया को तेज करने का साधन है, उसका विकल्प नहीं।

40 सवाल, पहली बार जाति का सवाल

इस बार प्रश्नावली भी पहले से बड़ी है। 2011 की जनगणना में 29 सवाल थे, जबकि इस बार 40 सवाल पूछे जाएंगे। नए सवालों में कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, बैंक खातों की संख्या, डिजिटल साक्षरता की स्थिति, घोषित राष्ट्रीयता, पति या पत्नी का नाम, माता-पिता का विवरण, मोबाइल नंबर, और यदि उपलब्ध हों तो आधार नंबर, मतदाता पहचान पत्र संख्या, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता शामिल हैं।

सबसे चर्चित बदलाव जाति का सवाल है। रिपोर्टों के अनुसार, स्वतंत्र भारत में पहली बार जनगणना में जाति की गणना की जाएगी। जाति वही दर्ज की जाएगी जो उत्तरदाता स्वयं बताएगा — यह एक खुला सवाल होगा, किसी पूर्व-निर्धारित सूची से मिलान नहीं किया जाएगा। इस फैसले पर लंबे समय से बहस चल रही थी, और अब यह औपचारिक रूप से जनगणना का हिस्सा बन गया है।

यह जनगणना क्यों अहम है

जनगणना सिर्फ सिर गिनने का काम नहीं है। यही आंकड़े तय करते हैं कि संसाधन, कल्याणकारी योजनाएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व किस आधार पर बंटेंगे। परिसीमन — यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण — भी जनगणना के आंकड़ों पर ही टिका है। इसलिए यह गिनती आने वाले वर्षों की राजनीति और नीति, दोनों की दिशा तय करेगी।

इसीलिए इस जनगणना पर सबकी नजर है। डेढ़ दशक पुराने आंकड़ों पर चल रही योजनाओं को अब नई तस्वीर मिलेगी — कि देश में कितने लोग हैं, कहां रहते हैं, क्या काम करते हैं और उनकी जरूरतें क्या हैं। डिजिटल गणना और जाति के आंकड़े इस तस्वीर को और भी बारीक बनाएंगे, लेकिन इन आंकड़ों की व्याख्या और इस्तेमाल पर बहस भी उतनी ही तेज होगी।

रिपोर्टों के अनुसार, आंकड़ों के संकलन और प्रकाशन में दो से तीन साल का समय लगेगा। यानी पूरी तस्वीर सामने आने में धैर्य रखना होगा, लेकिन पहला कदम — घर-घर की गिनती — अब बस कुछ ही महीनों की दूरी पर है।

जनगणना की विस्तृत जानकारी के लिए Deccan Herald की रिपोर्ट और Hindustan Times की रिपोर्ट देखें।

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