Delhi SIR: Supreme Court Asks ECI to Extend Deadlines, Simplify Enrolment for Omitted Voters

दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग से अहम कदम उठाने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने आयोग से कहा कि वह दिल्ली एसआईआर की समयसीमा बढ़ाए और नामांकन की प्रक्रिया को सरल करे।

अदालत ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हट गए हैं, उनके दोबारा जुड़ने के लिए कोई कट-ऑफ तारीख तय न की जाए। आयोग को जरूरी बदलाव करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया है, और मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

दिल्ली में मतदान केंद्र के बाहर मतदाता सूची की जांच करते लोगों का प्रतीकात्मक चित्रण


47 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर क्यों

रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख के नाम एसआईआर की ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं। इनमें से कई मतदाता ऐसे हैं जो गणना फॉर्म नहीं भर पाए या जिनसे सत्यापन के दौरान संपर्क नहीं हो पाया। चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि ड्राफ्ट सूची के चरण में किसी का नाम हटाया नहीं जाता, और वह देर से आए गणना फॉर्म स्वीकार करने तथा 30 अक्टूबर की समयसीमा बढ़ाने पर विचार करेगा।

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि वोट का अधिकार बेहद अहम है और सिर्फ इसलिए किसी मतदाता का अधिकार हमेशा के लिए खत्म नहीं हो सकता कि वह एक बार अनुपस्थित रहा या उससे संपर्क नहीं हो पाया। पीठ ने आयोग से कहा कि वह पूरी तत्परता से काम करे और मतदाताओं तक पहुंचने का तरीका निकाले।

फॉर्म 6 पर अदालत का सवाल

सुनवाई का सबसे तीखा मुद्दा फॉर्म 6 रहा। पहले से दर्ज मतदाताओं से, जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से गायब हैं, नए मतदाताओं वाला फॉर्म 6 भरने को कहा जा रहा है। अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था में एक संरचनात्मक विसंगति है — जो मतदाता पहले से सूची में था, वह सिर्फ फॉर्म न भर पाने से नया मतदाता कैसे हो गया?

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे में जाना और अस्थायी रूप से बाहर होना दो अलग बातें हैं, इसलिए दोनों के लिए एक ही प्रक्रिया ठीक नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि आयोग उन मतदाताओं की सूची प्रकाशित करे जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है, उनके पहले के मतदान केंद्र का ब्योरा दे, और उन्हें नजदीकी बूथ स्तरीय अधिकारी से संपर्क कर फॉर्म 8 भरने को कहे।

अब आगे क्या होगा

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि वह सुझावों पर विचार करेगा और प्रभावित मतदाताओं के लिए वैकल्पिक फॉर्म देने के बारे में सोचेगा। रिपोर्टों के अनुसार दावों और आपत्तियों की 30 अक्टूबर की समयसीमा बढ़ाई जा सकती है, जबकि उन पर अंतिम निर्णय की समयसीमा 30 नवंबर है। अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में अभी कोई चुनाव नहीं है, इसलिए प्रक्रिया को सुधारने का समय है।

यह मामला कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची से अलग है, जहां पुनरीक्षण पूरा हो चुका है। दिल्ली में अभी ड्राफ्ट चरण चल रहा है, इसलिए अदालत का हस्तक्षेप अंतिम सूची बनने से पहले ही सुधार का मौका देता है। मतदाताओं के लिए सबसे अहम बात यह है कि अगर उनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो उन्हें घबराने के बजाय बूथ स्तरीय अधिकारी से संपर्क करना चाहिए और दावा दायर करना चाहिए।

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स्रोत: द हिंदू और द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों के अनुसार।

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