नई दिल्ली (19 अक्टूबर 2026): जंतर-मंतर प्रकरण में न्यायिक हिरासत में बंद CJP नेताओं अशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत सुनवाई रविवार को टल गई — और वजह बेहद गंभीर है। सुनवाई कर रहे स्पेशल एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने जान से मारने की धमकी का हवाला देकर खुद को मामले से अलग कर लिया। दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। फिलहाल दोनों नेता जेल में ही रहेंगे।
रविवार को सुनवाई में क्या हुआ?
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के अनुसार, जमानत याचिका पर सुनवाई रविवार दोपहर 12 बजे मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में निर्धारित थी और वह सुबह 11 बजे से ही वहां मौजूद थीं। लेकिन SEM के तौर पर काम कर रहे असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) शाम करीब 5:30 बजे ही कोर्टरूम में पहुंचे।
रिपोर्टों के अनुसार, SEM ने कहा कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है, और ऐसे हालात में वे मामले की सुनवाई नहीं कर सकते। इसके साथ ही उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। CJP का आरोप है कि मजिस्ट्रेट ने मामले को गुण-दोष के आधार पर सुने बिना मनमाने टिप्पणी कर दी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि SEM पर रांका और दास को बिना देरी रिहा करने का दबाव डाला गया था।
चार जमानतदार खारिज, FIR दर्ज
CJP ने यह भी आरोप लगाया है कि जमानत के समर्थन में पेश किए गए चार जमानतदारों (sureties) को 'अस्पष्ट' कारणों से खारिज कर दिया गया। रत्ना सिंह का कहना है कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण जिन लोगों पर FIR दर्ज है, उन्हें आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताकर खारिज किया जा रहा है।
उधर दिल्ली पुलिस ने धमकी के मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं — लोक सेवक को आपराधिक धमकी और डराने के आरोप — के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। CJP ने पुलिस से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) जांचने की मांग की है ताकि यह पता चल सके कि SEM का नंबर किसी CJP सदस्य के डिवाइस से साझा हुआ था या नहीं, लेकिन मजिस्ट्रेट ने इस सुझाव को ठुकरा दिया।
पृष्ठभूमि: 14 अक्टूबर का जंतर-मंतर प्रकरण
दास और रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर के बंद गेट फांदकर वहां प्रवेश किया था — वह स्थान जिसे विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया गया है। दोनों नेताओं का दावा है कि वे वहां तिरंगा फहराने और नारे लगाने गए थे। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की प्रिवेंटिव गिरफ्तारी और CJP के जवाब में बने नए समूह 'लाल हिट जनता पार्टी' के बाद यह इस संगठन से जुड़ा ताज़ा विवाद है।
आगे क्या होगा?
पांच दिनों की न्यायिक हिरासत की अवधि सोमवार को समाप्त हो रही है, ऐसे में अगली सुनवाई की तारीख और नए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति पर सबकी नजर है। रत्ना सिंह ने SEM अदालतों के कामकाज पर सवाल उठाते हुए इसे 'शक्ति का दुरुपयोग' करार दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के हाल के ऐतिहासिक फैसलों के बाद न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है। यह देखना होगा कि क्या अगली सुनवाई में जमानत पर गुण-दोष के आधार पर फैसला होता है या मामला और लंबा खिंचता है।
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