बंगाल की खाड़ी में मौसम का एक नया सिस्टम तेज़ी से ताक़तवर हो रहा है, और पूर्वी तट के राज्यों में अगले कुछ दिनों के लिए सतर्कता बढ़ गई है। पूर्वी-मध्य और उससे सटी दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र 24 अक्टूबर 2026 को एक दबाव (डिप्रेशन) में बदल गया है। इसका मतलब यह है कि सिस्टम अब अपने शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुका है, लेकिन यह अभी चक्रवात नहीं बना है — और यही बात समझना सबसे ज़रूरी है।
सिस्टम इस समय कहाँ है?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के 24 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे के बुलेटिन के अनुसार, यह दबाव श्री विजयपुरम (अंडमान) से लगभग 510 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपश्चिम में, विशाखापत्तनम से लगभग 820 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व में, काकीनाडा से लगभग 910 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व में, मछलीपत्तनम से लगभग 1020 किलोमीटर पूर्व में और बापटला से लगभग 1100 किलोमीटर पूर्व में स्थित था। ये दूरियाँ बताती हैं कि सिस्टम अभी तट से काफ़ी दूर समुद्र में है, लेकिन उसकी दिशा और रफ़्तार पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
आगे का पूर्वानुमान: 28 अक्टूबर तक क्या हो सकता है?
ताज़ा IMD बुलेटिन के अनुसार, सिस्टम के लगभग दक्षिण की ओर बढ़ने, 25 अक्टूबर को गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) में बदलने, फिर पश्चिम-उत्तरपश्चिम की ओर मुड़ने और 26 अक्टूबर की सुबह तक चक्रवाती तूफ़ान बनने का पूर्वानुमान है। इसके बाद 27 अक्टूबर की सुबह के आसपास इसके भीषण चक्रवाती तूफ़ान और 28 अक्टूबर की सुबह के आसपास आंध्र तट के निकट अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफ़ान बनने का अनुमान है।
बुलेटिन के अनुसार, इसके 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश और यनम के तटों को अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफ़ान के रूप में पार करने की बहुत संभावना है। उस समय लगातार हवाओं की रफ़्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों में 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँचने का अनुमान है। अगर यह सिस्टम चक्रवात की ताक़त तक पहुँचता है, तो इसे ‘अर्नब’ नाम दिया जाएगा — यह नाम बांग्लादेश की ओर से प्रस्तावित किया गया है।
यहाँ यह साफ़ करना ज़रूरी है कि नाम, तट से टकराने का समय और हवा की रफ़्तार — ये सब पूर्वानुमान हैं, पक्की बातें नहीं। सिस्टम का रास्ता और उसकी तीव्रता अभी भी बदल सकती है, इसलिए IMD के ताज़ा बुलेटिनों पर नज़र रखना ही सबसे सुरक्षित तरीक़ा है। बंगाल की खाड़ी के इस सिस्टम से पहले के मौसम अलर्ट के बारे में बंगाल की खाड़ी सिस्टम और तमिलनाडु-केरल बारिश अलर्ट यहाँ पढ़ें, और तमिलनाडु में भारी बारिश की स्थिति पर चेन्नई ऑरेंज अलर्ट की ख़बर भी देखें।
IMD सिस्टम को चरणों में कैसे बाँटता है?
मौसम विभाग किसी समुद्री सिस्टम को धीरे-धीरे मज़बूत होते चरणों में बाँटता है। पहले कम दबाव का क्षेत्र बनता है, जिसमें हवाएँ अभी बिखरी हुई होती हैं। जब यह संगठित होकर घूमने लगता है, तो इसे दबाव कहा जाता है। इसके और मज़बूत होने पर यह गहरा दबाव बनता है, और फिर चक्रवाती तूफ़ान — जिस चरण में इसे नाम दिया जाता है। इसके बाद हवाओं के और तेज़ होने पर यह भीषण और फिर अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफ़ान की श्रेणी में पहुँच सकता है। हर चरण का मतलब है — सिस्टम ज़्यादा संगठित, ज़्यादा तेज़ और ज़्यादा ख़तरनाक होता जा रहा है।
ओडिशा, आंध्र प्रदेश और केरल में क्या तैयारी है?
ओडिशा में 24 अक्टूबर को सभी ज़िला कलेक्टरों, ज़िला मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गईं और उन्हें अपने मुख्यालय लौटने को कहा गया। प्रभावित ज़िलों में स्कूल और आँगनवाड़ी केंद्र 28-29 अक्टूबर को बंद रहेंगे, और कलेक्टर ज़रूरत पड़ने पर इस अवधि को बढ़ा सकते हैं। प्रभावित ज़िलों में गंजम, गजपति, रायगडा, कोरापुट और मलकानगिरि शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश में 27 अक्टूबर से भारी से अत्यंत भारी बारिश की संभावना है, और विशाखापत्तनम तथा अनकापल्ली में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। केरल में 24 अक्टूबर को भारी बारिश के लिए 10 ज़िलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। इन तैयारियों का मक़सद साफ़ है — सिस्टम के तट के क़रीब आने से पहले ही प्रशासन और लोग सतर्क रहें, ताकि जान-माल का नुक़सान कम से कम हो।
आम लोगों के लिए सबसे अहम सलाह यही है कि अफ़वाहों और पुराने बुलेटिनों पर भरोसा न करें। तट से टकराने की जगह और समय के बारे में ताज़ा जानकारी ही मानें, ज़रूरत न हो तो तटीय इलाक़ों की यात्रा टालें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। मौसम का यह सिस्टम अभी समुद्र में है — लेकिन अगले चार दिन इसकी हर चाल पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
मूल स्रोत: Sambad English की रिपोर्ट और Mathrubhumi English की रिपोर्ट।
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