दिल्ली में सर्दियों के मौसम से पहले प्रदूषण रोकने के लिए तय किए गए सख्त नियम 1 नवंबर 2026 से लागू हो गए हैं। ये नियम दिल्ली सरकार की 23 जून 2026 की गज़ट अधिसूचना के तहत तय किए गए थे और इनकी अवधि पहले से तय है। रिपोर्टों के अनुसार, इनका मकसद सर्दियों में हर साल बढ़ने वाले प्रदूषण को पहले से ही रोकना है, न कि प्रदूषण बढ़ने के बाद कदम उठाना। दिल्ली में रहने वाले लोगों, वाहन चालकों और दफ़्तरों के लिए इन नियमों को समझना अब ज़रूरी हो गया है, क्योंकि इनका असर रोज़मर्रा की आवाजाही और कामकाज पर पड़ेगा।
वाहनों पर क्या पाबंदी लगी है
रिपोर्टों के अनुसार, 1 नवंबर से दिल्ली में दिल्ली के बाहर पंजीकृत ऐसे वाहनों के चलने पर पाबंदी है, जो बीएस-6 मानक से नीचे के हैं। यानी बीएस-4 या उससे पुराने मानक वाले बाहरी वाहन दिल्ली में नहीं चल सकेंगे। हालांकि कुछ श्रेणियों को छूट दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहन, सीएनजी वाहन, आपातकालीन वाहन और संप्रभु कार्यों से जुड़े वाहनों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी।
इसके साथ ही एक और सख्त नियम लागू है — बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा। यानी वाहन चालकों को अपना प्रदूषण प्रमाणपत्र पहले से वैध रखना होगा।
रिपोर्टों के अनुसार, दीपावली तक इन नियमों के पालन में कुछ नरमी संभव है, लेकिन यह अभी केवल एक संभावना है, पुष्टि नहीं। इसलिए छूट की उम्मीद पर नियम तोड़ने से बचना चाहिए।
निर्माण और दफ़्तरों पर क्या असर पड़ेगा
रिपोर्टों के अनुसार, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाले विध्वंस और बाहरी निर्माण कार्यों पर पाबंदी रहेगी। सर्दियों में निर्माण से उड़ने वाली धूल प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत मानी जाती है, इसलिए इस अवधि के लिए यह रोक लगाई गई है। सर्दियों में हवा की गति कम होने से धूल लंबे समय तक हवा में बनी रहती है।
इसी अवधि में, यानी 1 नवंबर से 31 जनवरी तक, सरकारी और निजी दफ़्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू रहेगा। ज़रूरी और आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है। इसका मकसद सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करना और दफ़्तर आने-जाने से होने वाले प्रदूषण को घटाना है।
पार्किंग शुल्क भी बढ़ाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क दोगुना रहेगा। दिल्ली मेट्रो की पार्किंग को इस बढ़ोतरी से छूट दी गई है। मकसद निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना और सार्वजनिक परिवहन की ओर लोगों को मोड़ना है।
ये नियम ग्रैप से कैसे अलग हैं
यह समझना ज़रूरी है कि ये सर्दियों के तय नियम ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप से अलग हैं। ग्रैप हवा की गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के स्तर के अनुसार लागू होता है — जब प्रदूषण बढ़ता है, तब उसके चरण लागू होते हैं और जब स्थिति सुधरती है, तब उन्हें हटाया जा सकता है। इसके विपरीत, 1 नवंबर से लागू हुए ये नियम तय अवधि के लिए हैं, चाहे किसी दिन एक्यूआई कुछ भी हो।
दोनों व्यवस्थाएँ एक साथ भी चल सकती हैं। यानी तय सर्दियों के नियम लागू होने के बावजूद, अगर एक्यूआई किसी सीमा को पार करता है, तो ग्रैप के चरण भी लागू हो सकते हैं। इस विषय की पृष्ठभूमि के लिए ग्रैप-1 लागू होने की खबर और दिल्ली में अक्टूबर की रिकॉर्ड बारिश की खबर देखें।
विश्लेषण के तौर पर कहा जा सकता है कि दिल्ली की सर्दियों की समस्या का कोई एक कारण नहीं है — वाहन, धूल और मौसम सभी मिलकर स्थिति बिगाड़ते हैं। इन नियमों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इनका पालन कितनी सख्ती और निरंतरता से होता है।
एक नवंबर से जुड़े दो अन्य बदलाव
प्रदूषण नियमों से अलग, 1 नवंबर से दो अन्य बदलाव भी सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यूआईडीएआई ने एक साल के लिए 5 से 7 वर्ष और 15 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट पर लगने वाला 125 रुपये का शुल्क माफ कर दिया है। यह छूट एक वर्ष के लिए है और इसका मकसद माता-पिता पर आर्थिक बोझ कम करना बताया जा रहा है।
इसके साथ ही, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम के तहत बैंक खातों और लॉकरों के नामांकन से जुड़ी व्यवस्था में सुधार की बात भी सामने आई है। ये बदलाव प्रदूषण नियमों से सीधे जुड़े नहीं हैं। अधिक जानकारी के लिए द हिंदू की रिपोर्ट और बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट देखें।
कुल मिलाकर, दिल्ली के लोगों के लिए 1 नवंबर एक बदलाव का दिन है — वाहन, निर्माण, दफ़्तर और पार्किंग, सभी मोर्चों पर नए नियम लागू हैं। नियमों की जानकारी रखना और उनका पालन करना ही सर्दियों में साफ़ हवा की दिशा में पहला कदम होगा। ऐसी ही भारत से जुड़ी ज़रूरी खबरों और विश्लेषण के लिए ग्लोबल इनसाइट को फॉलो करते रहें।
