परिसीमन बिल: DMK और शरद पवार की NCP से नए ड्राफ्ट पर बात करेगी सरकार, लोकसभा सीटें 50% बढ़ाने का प्रस्ताव

देश की राजनीति में एक बार फिर परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर हलचल तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की संभावना पर काम कर रही है और इसके लिए अब द्रमुक (DMK) तथा शरद पवार की एनसीपी के साथ परिसीमन व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के नए ड्राफ्ट पर बातचीत करेगी। विशेष सत्र पर अगले सप्ताह फैसला होने की उम्मीद है, और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अक्टूबर के आखिरी दिनों में सत्र बुलाया जा सकता है — हालांकि तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।

संसद भवन के पीछे भारत के नक्शे और मतपेटी दर्शाता एआई-निर्मित चित्र — परिसीमन और लोकसभा सीटों के प्रस्ताव का प्रतीक

सरकार की नई पहल: लिखित ड्राफ्ट के साथ बातचीत

रिपोर्टों के अनुसार, सरकार के सूत्रों का कहना है कि विशेष सत्र के लिए नए सिरे से बातचीत हुई है। दोनों दलों (DMK और NCP-शरद पवार) की मुख्य मांग है कि विधेयक में सभी राज्यों की लोकसभा और विधानसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी को लिखित रूप में शामिल किया जाए। अब अगले सप्ताह सरकार बिल के नए ड्राफ्ट के साथ बातचीत करेगी, जिसमें यह प्रावधान लिखित रूप में दर्ज होगा। विशेष सत्र और इस बिल पर प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन के लिए सरकार समाजवादी पार्टी (SP) के भी संपर्क में है।

गौरतलब है कि फरवरी में जब इस बिल के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था, तो DMK ने सभी राज्यों में समान 50 प्रतिशत सीट बढ़ोतरी के महज मौखिक आश्वासन पर सवाल उठाया था। जुलाई में NCP (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा था कि अगर लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव सरकार लिखित रूप में लाती है, तभी उनकी पार्टी समर्थन पर विचार करेगी — और सिर्फ मौखिक बयान के आधार पर पार्टी अपना रुख तय नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि बिल संसद में पेश होते ही 24 घंटे के भीतर पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया जाएगा।

स्टालिन की बैठक: "पहले ड्राफ्ट देखेंगे, फिर फैसला"

शनिवार को DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने चेन्नई में सांसदों की अहम बैठक बुलाई, जिसमें इस मसले पर चर्चा हुई। बैठक में फैसला किया गया कि इस मामले में अंतिम निर्णय पहले ड्राफ्ट बिल देखने के बाद ही लिया जाएगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि SIR (वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण) पर छिड़े सियासी संग्राम और विपक्ष के तीखे तेवर के बावजूद सरकार को परिसीमन बिल पर DMK और NCP (शरद) के साथ सहमति बनने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, SIR पर इन दलों का अलग रुख राजनीतिक कारणों से है — ये दल नहीं चाहते कि कांग्रेस उन पर इस मामले में समझौता करने का आरोप लगाए।

लोकसभा सीटें 543 से 816? और महिला आरक्षण का जुड़ाव

इस पूरे विवाद के केंद्र में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। रिपोर्टों के अनुसार, पहले पेश किए गए विधायी पैकेज में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को लगभग 50 प्रतिशत बढ़ाकर 816 तक करने की योजना शामिल थी। सरकार का तर्क रहा है कि सीटों की संख्या बढ़ने से सभी राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। लेकिन खासकर दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से संसद में उनका सापेक्ष राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है — यही वजह है कि "सभी राज्यों में समान बढ़ोतरी" की लिखित गारंटी उनकी शर्त बनी हुई है।

महिला आरक्षण से इसका सीधा जुड़ाव है। जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, तो उसमें स्पष्ट प्रावधान था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें तब तक लागू नहीं की जा सकतीं, जब तक देश में नया परिसीमन पूरा नहीं हो जाता। यानी परिसीमन अटका, तो महिला आरक्षण भी अटका रहेगा।

हमारा विश्लेषण: लिखित बनाम मौखिक — भरोसे का सवाल

संविधान संशोधन के लिए संसद में विशेष बहुमत चाहिए — इसलिए सरकार को विपक्षी दलों की सहमति हर हाल में चाहिए। यही इस पूरी कवायद की असली वजह है। DMK और NCP (शरद) की शर्त — "लिखित में दो, तभी बात बनेगी" — दिखाती है कि मौखिक आश्वासनों का दौर अब विपक्ष को मंजूर नहीं। सरकार अगर वाकई नए ड्राफ्ट में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी लिखित रूप में दर्ज करती है, तो यह दक्षिणी राज्यों की सबसे बड़ी आशंका को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

लेकिन चुनौती सिर्फ आंकड़ों की नहीं, राजनीति की भी है। SIR पर चल रहे संग्राम के बीच विपक्ष के साथ "सहमति" बनाना आसान नहीं होगा, और हर दल अपनी-अपनी शर्तों के साथ मेज पर आएगा। अगले सप्ताह विशेष सत्र पर फैसला और नए ड्राफ्ट की शक्ल — इन्हीं दो बातों से तय होगा कि यह कवायद सहमति में बदलती है या एक और राजनीतिक गतिरोध में। विपक्षी राजनीति के एक और मोर्चे पर सचिन पायलट की पंजाब यात्रा पर हमारी रिपोर्ट और ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में ABVP की जीत की खबर भी पढ़ें।

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