कांग्रेस महासचिव और पंजाब प्रभारी सचिन पायलट 16 से 20 अक्टूबर तक पंजाब के पांच दिवसीय दौरे पर हैं — और यह कोई आम राजनीतिक दौरा नहीं है। पायलट राज्य के 11 जिलों में गैंग हिंसा के पीड़ितों के परिवारों से मिल रहे हैं, और इस दौरान उन्होंने भगवंत मान के नेतृत्व वाली AAP सरकार पर कानून-व्यवस्था ध्वस्त होने का तीखा आरोप लगाया है। पंजाब में गैंगस्टर हिंसा और ड्रग्स का मुद्दा अब राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई बनता जा रहा है।

यात्रा का खाका: 11 जिले, 5 दिन
रिपोर्टों के मुताबिक पायलट का दौरा मोगा, बठिंडा, मानसा, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, तरन तारन और अमृतसर — 11 जिलों में फैला है। हर जिले में वह पीड़ित परिवारों के घर जाकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और अपराधों व पुलिस-सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में उनके अनुभव सुन रहे हैं। कांग्रेस के मुताबिक कई हत्याएं संगठित गिरोहों से जुड़ी बताई गई हैं, और कई परिवार गिरफ्तारी, चार्जशीट या निष्पक्ष सुनवाई के लिए महीनों, कुछ मामलों में सालों से इंतज़ार कर रहे हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह भी दौरे में साथ हैं, और उन्होंने कहा है कि यह मुद्दा 22 अक्टूबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में उठाया जाएगा।
दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को पायलट मानसा में ड्रग्स-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मिले, जिनकी 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पायलट ने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और दिनदहाड़े हत्याएं आम होती जा रही हैं। शनिवार को मोगा में वह जौहरी परमिंदर सिंह के परिवार से मिले, जिनकी हत्या जून 2023 में हुई थी।
पायलट के तीखे आरोप
PTI की रिपोर्ट के अनुसार पायलट ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था "ध्वस्त" हो चुकी है और लोगों का मान सरकार पर से "भरोसा उठ गया" है। उनके शब्दों में, "बरनाला, बटाला या मोगा में रोज़ाना खुलेआम गोलियां चलती हैं, फिरौती मांगी जाती है, और डर के मारे कई लोग पुलिस को सूचना भी नहीं देते।" पायलट का आरोप है कि साढ़े चार साल पहले सत्ता में आई AAP ने सिर्फ दिल्ली के अपने नेताओं को "संरक्षण, बढ़ावा और सरपरस्ती" दी और करदाताओं के पैसे से अपनी छवि चमकाई। उनका यह भी कहना है कि लोग ड्रग्स से तंग आ चुके हैं — ड्रग्स और फिरौती के पैसे से हथियार खरीदे जाते हैं।
शुक्रवार शाम X पर हिंदी में किए गए पोस्ट में पायलट ने लिखा कि पंजाब में ड्रग्स का बढ़ता खतरा "बेहद चिंताजनक" है — "'चित्ता' की समस्या ने हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य और अनगिनत परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि पंजाब की पूरी एक पीढ़ी को बचाने की लड़ाई है।" उन्होंने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिया कि न्याय के लिए "कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी" और लड़ाई सड़कों से अदालतों तक लड़ी जाएगी।
केंद्र सरकार पर भी निशाना
दिलचस्प यह है कि पायलट ने सिर्फ राज्य सरकार को नहीं, केंद्र की BJP सरकार को भी घेरा। सीमा पार से होने वाली ड्रग्स तस्करी पर उन्होंने सवाल उठाया — "पिछले 12 सालों में भारत सरकार ने सीमा पार से ड्रग्स और हथियारों की आपूर्ति रोकने के लिए क्या किया? गृह मंत्रालय क्या कर रहा है?" उनका कहना है कि ड्रग्स-हथियारों के गठजोड़ को तोड़ने के लिए न AAP सरकार ने कुछ किया, न BJP सरकार ने।
हमारा विश्लेषण
यह दौरा कांग्रेस की रणनीति को साफ दिखाता है — प्रेस कॉन्फ्रेंसों से आगे बढ़कर पीड़ित परिवारों के दरवाज़े पर जाना, और कानून-व्यवस्था को AAP सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बनाना। पायलट ने राज्य सरकार और केंद्र — दोनों को एक साथ घेरकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पंजाब का ड्रग्स-संकट सिर्फ राज्य की नाकामी नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल भी है।
लेकिन यहां संतुलन ज़रूरी है: ये सभी आरोप कांग्रेस के हैं, और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पंजाब में गैंगस्टर हिंसा की घटनाएं वाकई सुर्खियों में हैं, पर कानून-व्यवस्था की पूरी तस्वीर अपराध के आंकड़ों और सरकारी दावों — दोनों से बनती है। आने वाले विधानसभा सत्र में जब परगट सिंह यह मुद्दा उठाएंगे, तब सरकार का जवाब भी सामने आएगा। तब तक यह दौरा पंजाब की राजनीति में दबाव बढ़ाने वाला कदम तो है ही — और ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में ABVP की जीत के बाद विपक्षी राजनीति के एक और मोर्चे की खबर दिल्ली में CJP संस्थापक की प्रिवेंटिव गिरफ्तारी पर हमारा विश्लेषण भी पढ़ें।
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