सत्रह दिन तक भूखे पेट बैठे छात्र, बंद पड़ा कैंपस विमर्श, और प्रशासन के सामने अडिग मांगें — जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का यह आंदोलन अब खत्म हो गया है। JNUSU ने 17 दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को वापस ले ली, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार 19 अक्टूबर को हुई बैठक के कार्यवृत्त पर SSS डीन विवेक कुमार और छात्र प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर के साथ ही यह समझौता तय हुआ।
17 दिनों की टाइमलाइन: क्या-क्या हुआ
रिपोर्टों के अनुसार भूख हड़ताल 3 अक्टूबर को शुरू हुई थी। छात्रों ने 13 सूत्री मांगपत्र रखा था — जिनमें छात्र अधिकार, सामाजिक न्याय, हॉस्टल सुविधाएं और विश्वविद्यालय के जर्जर बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा GSCASH की बहाली और JNUEE की वापसी जैसी मांगें भी चार्टर में थीं।
17 दिनों के गतिरोध के बाद 19 अक्टूबर को छात्र प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय की समिति के बीच निर्णायक बैठक हुई। बैठक के कार्यवृत्त में कई अहम फैसले दर्ज किए गए, और उसी दिन कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के निर्देश पर पांच छात्रों की रस्टिकेशन रद्द करने का नोटिस जारी हुआ। रिपोर्टों के अनुसार 20 अक्टूबर (मंगलवार) को JNUSU ने हड़ताल औपचारिक रूप से समाप्त कर दी।
CPO मैनुअल विवाद क्या था?
इस आंदोलन के केंद्र में था मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय (CPO) मैनुअल — वह दस्तावेज जो "छात्रों के अनुशासन और उचित आचरण के नियम" तय करता है। छात्र संघ का कहना था कि मैनुअल के प्रावधान प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाते हैं और उल्लंघन पर जुर्माना, निलंबन और रस्टिकेशन जैसे दंड की अनुमति देते हैं।
अब विश्वविद्यालय ने मैनुअल की विवादास्पद धाराओं की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने पर सहमति दी है, जिसमें JNUSU का एक पदाधिकारी और एक निर्वाचित छात्र सदस्य शामिल होंगे। यह समिति विवादित धाराओं को हटाने की सिफारिश करेगी। इसके अलावा JNUEE की जांच और हॉस्टल आरक्षण के मुद्दों के लिए भी JNUSU प्रतिनिधित्व वाली समितियां बनेंगी।
वे पांच छात्र जिनकी रस्टिकेशन रद्द हुई
19 अक्टूबर के नोटिस के अनुसार जिन पांच छात्रों की रस्टिकेशन तत्काल प्रभाव से रद्द की गई, वे हैं — अदिति मिश्रा, के. गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली और नितीश कुमार। रिपोर्टों के अनुसार पहले चार नाम JNUSU के वर्तमान पदाधिकारी हैं (अदिति मिश्रा अध्यक्ष, के. गोपिका बाबू उपाध्यक्ष, सुनील यादव महासचिव) और आखिरी नाम पूर्व JNUSU अध्यक्ष का है। इन छात्रों को अपना-अपना जुर्माना तुरंत जमा करने की सलाह दी गई है।
बैठक में यह भी तय हुआ कि छात्रों के खिलाफ सभी FIR वापस ली जाएंगी, और रस्टिकेशन विरोध, UGC नियमों के विरोध तथा हॉस्टल बुनियादी ढांचे के विरोध प्रदर्शनों के दौरान शुरू की गई प्रॉक्टोरियल जांचें भी वापस ली जाएंगी। हॉस्टल के मुद्दों पर भी ठोस आश्वासन मिले हैं — ताप्ती और माही-मांडवी हॉस्टल का संरचनात्मक ऑडिट, दो सप्ताह में सभी हॉस्टलों में गीजर चालू करना, CSLG में कैंटीन खोलना और स्कूल लाइब्रेरी रात 9 बजे तक खुली रखना।
आगे क्या?
छात्र आंदोलनों के इतिहास में यह एक उल्लेखनीय समझौता है — खासकर इसलिए कि जिन पदाधिकारियों को रस्टिकेट किया गया था, वे खुद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। प्रशासन ने बातचीत का रास्ता अपनाया और छात्र संघ को निर्णय-प्रक्रिया में जगह दी। हालांकि FIR वापसी और मैनुअल समीक्षा जैसे वादों का क्रियान्वयन अभी बाकी है — कागज पर सहमति और जमीन पर अमल में अंतर न हो, यह देखने की जिम्मेदारी अब दोनों पक्षों पर है।
छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और न्यायिक प्रक्रिया के बारे में कर्नाटक हाईकोर्ट के FIR रद्द करने के फैसले पर हमारी रिपोर्ट पढ़ें, और छात्र अधिकारों के व्यापक संदर्भ के लिए सुप्रीम कोर्ट के बच्चों के इंटरनेट अधिकार वाले विश्लेषण को भी देखें।
सूत्र: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस — रिपोर्टों के अनुसार।
Global Insight को फॉलो करें — कैंपस से लेकर देश तक, हर बड़ी खबर का साफ विश्लेषण।