मैसूरु, 20 अक्टूबर 2026 — 18 अक्टूबर की रात मैसूरु के आसमान में एक ऐसा नज़ारा दिखा, जिसे वहां मौजूद हज़ारों लोग शायद ही कभी भूल पाएंगे। टॉर्चलाइट परेड ग्राउंड के ऊपर 3,473 ड्रोन एक साथ उड़े और भारत के राष्ट्रीय पक्षी — नाचते हुए मोर — की विशाल रोशन आकृति आसमान में बना दी। यह प्रदर्शन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है: "मल्टीरोटर/ड्रोन से बनाई गई पक्षी की सबसे बड़ी हवाई आकृति" (largest aerial display of a bird formed by multirotors/drones)।
रिकॉर्ड मैसूरु दशहरा 2026 के दौरान बन्नीमंटप स्थित टॉर्चलाइट परेड ग्राउंड में स्थापित हुआ। आयोजन चामुंडेश्वरी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कॉरपोरेशन (CESC) ने किया, जबकि ड्रोन आईआईटी-दिल्ली से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप बॉटलैब डायनामिक्स ने उड़ाए।
रिकॉर्ड की रात: क्या-क्या हुआ
डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, लंदन से आई गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम ने विश्व रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र CESC के तकनीकी निदेशक एल. लोकेश को सौंपा। प्रमाणपत्र में दर्ज है कि यह रिकॉर्ड "चामुंडेश्वरी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड, मैसूरु और ऊर्जा विभाग, कर्नाटक सरकार" ने 18 अक्टूबर 2026 को मैसूरु में हासिल किया।
इस रिकॉर्ड ने लीबिया में 30 सितंबर 2026 को करीब 3,000 ड्रोन से बनाई गई पक्षी की आकृति का पिछला रिकॉर्ड तोड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, CESC का यह दूसरा गिनीज रिकॉर्ड है — 2025 में कंपनी ने 2,983 ड्रोन से उछलते हुए बाघ की आकृति बनाकर स्तनपायी (mammal) श्रेणी में रिकॉर्ड बनाया था।
संख्या पर एक स्पष्टीकरण: अधिकांश रिपोर्टों — ETV Bharat, NewsVoir की जारी विज्ञप्ति और बॉटलैब डायनामिक्स की 19 अक्टूबर की अपनी पोस्ट — में ड्रोन की संख्या 3,473 बताई गई है, इसलिए हमने इसी आंकड़े को मुख्य माना है। हालांकि डेक्कन क्रॉनिकल के लेख में एक जगह 3,476 का भी उल्लेख मिलता है। अंतिम सत्यापित आंकड़ा गिनीज के आधिकारिक प्रमाणपत्र पर दर्ज संख्या ही होगी।
ड्रोन शो की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि न्यूज़वॉयर के अनुसार 2025 की तुलना में दर्शकों की भीड़ में 154% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। पहले दो शामों में 40,000 से ज़्यादा लोग आए, जबकि मैदान की औपचारिक बैठने की क्षमता 33,500 है। मैदान के बाहर भी 20,000 से ज़्यादा लोग आसमान का नज़ारा देखने जुटे।
ड्रोन-शो का वर्ल्ड रिकॉर्ड तय कैसे होता है?
हज़ारों ड्रोन एक साथ उड़ाना सिर्फ तकनीक का कमाल नहीं है — रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए गिनीज की अपनी कड़ी प्रक्रिया होती है। ऐसे रिकॉर्डों में आमतौर पर स्वतंत्र निर्णायकों की मौजूदगी में पूर्व-घोषित प्रयास किया जाता है, एक साथ हवा में मौजूद ड्रोन की गिनती की जाती है, और यह देखा जाता है कि बनाई गई आकृति साफ पहचानी जा सके। वीडियो प्रमाण और तकनीकी लॉग भी जांचे जाते हैं। इस बार लंदन से गिनीज की टीम की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पूरी प्रक्रिया उनकी निगरानी में हुई।
तकनीकी चुनौती भी कम नहीं है — हज़ारों ड्रोन को एक-दूसरे से टकराए बिना, सेंटीमीटर की सटीकता से, मिनटों तक एक जटिल आकृति में बनाए रखना पड़ता है। एक भी ड्रोन का समय से बाहर होना या गलत जगह चले जाना पूरी आकृति बिगाड़ सकता है। यही वजह है कि 3,000 से ऊपर के ड्रोन-शो दुनिया में गिने-चुने ही हुए हैं।
आईआईटी-दिल्ली के स्टार्टअप से गिनीज तक
इस रिकॉर्ड की सबसे दिलचस्प परत इसका भारतीय तकनीकी चेहरा है। बॉटलैब डायनामिक्स आईआईटी-दिल्ली से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप है, और 2022 से लगातार पांचवें साल मैसूरु दशहरे में ड्रोन शो कर रहा है। यानी यह रिकॉर्ड किसी विदेशी कंपनी के भरोसे नहीं, घरेलू डीप-टेक पर बना है।
ड्रोन शो अब देशभर के त्योहारों में पटाखों का विकल्प बनते जा रहे हैं — कम प्रदूषण, कम शोर, और कहानी कहने की कहीं ज़्यादा गुंजाइश। भारत के टेक स्टार्टअप्स में निवेश का माहौल भी तेज़ी से बदल रहा है; भारत में एआई और टेक निवेश की बदलती तस्वीर पर हमने पहले विस्तार से लिखा था। बॉटलैब जैसी कंपनियां दिखाती हैं कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का मेल अब रिकॉर्ड-बुक तक पहुंच रहा है।
हमारा विश्लेषण
यह रिकॉर्ड सिर्फ एक संख्या नहीं है। यह इस बात का सबूत है कि भारत में मनोरंजन-तकनीक (इवेंट टेक) एक परिपक्व उद्योग बन रहा है, और त्योहार अब तकनीकी प्रदर्शन के मंच भी हैं। अगर ड्रोन शो की लागत घटती रही, तो अगले कुछ वर्षों में छोटे शहरों के मेलों तक यह तकनीक पहुंचेगी — और अगली बार रिकॉर्ड टूटेगा, तो शायद भारत से ही टूटेगा।
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