Karnataka MLC Results: BJP-JD(S) Sweep All 4 Seats, Congress Draws a Blank

कर्नाटक की सियासत में बुधवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। विधान परिषद की चारों सीटों पर हुए चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) ने चारों सीटें अपने नाम कर लीं। भाजपा ने तीन सीटें जीतीं और जद(एस) ने एक सीट पर कब्जा जमाया। यह नतीजा ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस राज्य में सरकार चला रही है और 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठजोड़ की परीक्षा के तौर पर इन चुनावों को देखा जा रहा था।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों का प्रतीकात्मक चित्रण


रिपोर्टों के अनुसार, चारों सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था और मतगणना 27-28 अक्टूबर को पूरी हुई। इन सीटों पर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं ने वोट डाले, यानी यह चुनाव आम जनता के बजाय शिक्षकों और स्नातकों के एक सीमित मतदाता वर्ग के बीच हुआ। फिर भी इसके सियासी संकेत बड़े माने जा रहे हैं, क्योंकि शिक्षक और स्नातक वर्ग को समाज में राय बनाने वाला वर्ग माना जाता है।

चारों सीटों पर कौन जीता, कौन हारा

बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जद(एस) उम्मीदवार ए. पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के निवर्तमान सदस्य पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट मिले। यह इकलौती सीट थी, जिस पर सत्ता परिवर्तन हुआ — पुट्टन्ना पहले जद(एस) में थे और 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में आ गए थे।

उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर भाजपा के शशिल जी. नमोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को 3,297 वोटों से हराया। नमोशी को 15,596 वोट और मत्तूर को 12,299 वोट मिले। यह नमोशी की इस सीट से पांचवीं जीत है। इस सीट का सियासी महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इसमें कालाबुरागी जिला आता है, जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह जिला है।

दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर भाजपा के के. एम. सुरेश ने कांग्रेस के शशि हुलिकुंटे मट्ट को 23,098 वोटों से हराया, जबकि पश्चिम स्नातक सीट पर भाजपा के एस. वी. संकनूर ने कांग्रेस के मोहन लिंबिकाई को 9,323 वोटों से हराया — संकनूर को 33,711 और लिंबिकाई को 24,388 वोट मिले। इस तरह भाजपा ने अपने दोनों स्नातक सीटें बरकरार रखीं और जद(एस) ने शिक्षक वर्ग की एक सीट कांग्रेस से छीन ली।

मतदान और उम्मीदवारों की तस्वीर

रिपोर्टों के अनुसार, चारों सीटों पर कुल 43 उम्मीदवार मैदान में थे और मतदान बैलेट पेपर से हुआ, जैसा कि विधान परिषद के इन चुनावों में परंपरा रही है। मतदान प्रतिशत भी ऊंचा रहा — बेंगलुरु शिक्षक सीट पर 81.98 प्रतिशत, उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर 86.97 प्रतिशत, दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर 73.58 प्रतिशत और पश्चिम स्नातक सीट पर 75.62 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ऊंचा मतदान इस बात का संकेत है कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं ने इस चुनाव को गंभीरता से लिया।

नतीजों के सियासी मायने

रिपोर्टों के अनुसार, इन नतीजों से कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि विधान परिषद की चार सीटें विधानसभा के बहुमत को नहीं बदलतीं। लेकिन विपक्ष के लिए यह एक नैतिक जीत है। भाजपा और जद(एस) के लिए यह पहला बड़ा समन्वय परीक्षण था — दोनों दलों ने चारों सीटों पर एक-दूसरे का साथ दिया और नतीजा शत-प्रतिशत रहा। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष इसे अपनी एकजुटता के प्रमाण के तौर पर पेश करेगा।

कांग्रेस के लिए चिंता की बात यह है कि सत्ता में रहते हुए भी वह शिक्षकों और स्नातकों के बीच एक भी सीट नहीं जीत पाई। केंद्रीय मंत्री और जद(एस) नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने नतीजों पर प्रधानमंत्री और एनडीए उम्मीदवारों को बधाई दी और कहा कि मतदाताओं ने विकास के काम के पक्ष में फैसला दिया है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने इस जीत को कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधने का मौका बनाया — भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी कांग्रेस हारी है, इसलिए ईवीएम पर सवाल उठाना बेमानी है। यह भाजपा का दावा है; कांग्रेस की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

आगे क्या

इस बीच, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी विधान परिषद चुनावों की मतगणना चल रही थी, इसलिए पूरे देश के परिषद नतीजों की तस्वीर अभी पूरी नहीं हुई है। लेकिन कर्नाटक का संदेश साफ है — विपक्षी गठजोड़ ने तालमेल की परीक्षा पास कर ली है और कांग्रेस के सामने अब यह सवाल है कि वह अपने पारंपरिक समर्थक वर्गों — शिक्षकों और स्नातकों — का भरोसा कैसे वापस जीतेगी। 2028 की लड़ाई अभी दूर है, लेकिन उसकी तैयारी इन्हीं छोटे चुनावों से शुरू हो चुकी है।

स्रोत: द ट्रिब्यून, डेक्कन हेराल्ड (पीटीआई)। कर्नाटक की मतदाता सूची से जुड़ी खबर के लिए पढ़ें: कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची: एसआईआर के बाद करीब एक करोड़ नाम हटे।

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