कर्नाटक की राजनीति में मंगलवार को एक ऐसा आंकड़ा सामने आया जिसने सबका ध्यान खींच लिया — राज्य की अंतिम मतदाता सूची में करीब एक करोड़ नाम कम हो गए हैं। चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की, जिसमें अब 4,55,00,011 मतदाता दर्ज हैं, जबकि पुनरीक्षण से पहले यह संख्या 5,54,32,314 थी। यानी कुल 99.32 लाख नामों की शुद्ध कमी — लगभग 17.9 प्रतिशत की गिरावट।
ड्राफ्ट से अंतिम सूची तक: क्या-क्या बदला
इस आंकड़े को समझने के लिए पूरी प्रक्रिया जानना जरूरी है, वरना दो अलग-अलग संख्याएं भ्रम पैदा कर सकती हैं। पुनरीक्षण के दौरान घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। 24 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में 4.46 करोड़ मतदाता रह गए थे — यानी ड्राफ्ट के स्तर पर लगभग 1.08 करोड़ नाम हटाए गए थे। इसके बाद 24 अगस्त से 23 सितंबर तक दावे और आपत्तियां मांगी गईं, जिनमें 8.19 लाख नाम वापस जोड़े गए। इसी वजह से अंतिम सूची 4.55 करोड़ पर पहुंची, और शुद्ध कमी 99.32 लाख रही।
ड्राफ्ट से हटाए गए नामों का ब्योरा मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इस तरह दिया है: स्थायी रूप से स्थानांतरित या न खोजे जा सकने वाले मतदाता 80.62 लाख, मृतक 16.39 लाख, डुप्लिकेट (दोहरे) नाम 7 लाख से अधिक, और 'अन्य' श्रेणी में 3.83 लाख नाम। ये श्रेणियां मिलकर ड्राफ्ट स्तर की लगभग 1.08 करोड़ की कमी को समझाती हैं — इन्हें अंतिम 99.32 लाख की शुद्ध कमी से सीधे नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
नई सूची में कौन-कौन हैं
अंतिम सूची में 2,25,40,493 पुरुष, 2,29,12,355 महिला और 2,841 थर्ड-जेंडर मतदाता हैं। 18-19 वर्ष आयु वर्ग के 6.83 लाख नए मतदाता भी इसमें शामिल हैं, और 85 वर्ष से अधिक आयु के 3.92 लाख से अधिक मतदाता दर्ज हैं। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या 390 बढ़कर 41,888 हो गई है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुक्कुमार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अंतिम सूची में प्राप्त आवेदनों, जारी नोटिसों और पूरी हुई सुनवाइयों को दर्शाया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद
इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि उनकी सरकार मतदाताओं की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी। वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने पुनरीक्षण की प्रक्रिया और नाम हटाने को लेकर चिंताएं जताई हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये राजनीतिक आरोप हैं — चुनाव आयोग का पक्ष यह है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य "शुद्ध और स्वच्छ मतदाता सूची" तैयार करना था, जिसमें हर पात्र मतदाता शामिल हो और हर अपात्र नाम हटे।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि यह खबर सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर को लेकर चल रही कार्यवाही से अलग है। कर्नाटक की अंतिम सूची एक प्रशासनिक प्रक्रिया का नतीजा है, जबकि अदालत में इस प्रक्रिया की वैधता पर अलग से बहस चल रही है। दोनों को एक ही खबर समझना गलत होगा।
अगर आपका नाम कटा है तो क्या करें
जिन मतदाताओं का नाम सूची से हटा है, उनके पास कानूनी रास्ता भी है। रिपोर्टों के अनुसार, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के फैसले के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24(क) के तहत जिला मजिस्ट्रेट के पास और धारा 24(ख) के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील की जा सकती है। स्थानांतरित या न खोजे जा सकने वाले मतदाताओं को फॉर्म 6 के जरिए नाम वापस जुड़वाने के लिए आवेदन करना था। 23 सितंबर की समय-सीमा के बाद दाखिल आवेदनों के पूरक सूची (सप्लीमेंट्री रोल) में आने की उम्मीद है। इसलिए अपना नाम मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर जरूर जांचें। स्रोत: The Statesman, The South First।
Global Insight को फॉलो करें — चुनाव और मतदाता सूची से जुड़ी हर बड़ी खबर सबसे पहले यहीं।
