मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य में कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश कोचिंग सेंटर (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) नियम, 2026 की अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। लंबे समय से कोचिंग की पढ़ाई के दबाव और छात्रों की सुरक्षा को लेकर देश भर में बहस चल रही है, और इसी पृष्ठभूमि में मध्य प्रदेश ने अब एक विस्तृत ढांचा लागू किया है।
रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य, हर शाखा अलग केंद्र
बीस से अधिक छात्रों को पढ़ाने वाले हर कोचिंग सेंटर के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। पहले से चल रहे केंद्रों को आधिकारिक गजट में प्रकाशन के 90 दिन के भीतर आवेदन करना होगा। रजिस्ट्रेशन तीन साल के लिए वैध होगा, इसे किसी और को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा, और अवधि समाप्त होने पर इसका नवीनीकरण कराना होगा।
हर शाखा को अलग केंद्र माना जाएगा, इसलिए प्रत्येक शाखा के लिए अलग रजिस्ट्रेशन लेना होगा। रजिस्ट्रेशन का काम नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगर पालिका अधिकारियों और जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को सौंपा गया है।
कक्षाओं पर 5 घंटे की सीमा, छोटी उम्र के छात्रों पर रोक
किसी भी केंद्र में एक दिन में 5 घंटे से अधिक कक्षाएं नहीं लगेंगी। नियमित स्कूल समय के दौरान कोचिंग कक्षाएं नहीं चलेंगी। 16 वर्ष से कम आयु के छात्रों का दाखिला नहीं लिया जा सकेगा, और माध्यमिक विद्यालय परीक्षा में शामिल हुए बिना भी किसी छात्र को प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा।
इसका सीधा अर्थ है कि बहुत छोटी उम्र में कोचिंग की दौड़ में धकेले जाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा, और छात्र को पहले अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिलेगा।
फीस और शिक्षकों को लेकर पारदर्शिता
हर केंद्र को अपनी वेबसाइट बनाए रखनी होगी, जिस पर पूरी फीस संरचना, पाठ्यक्रम छोड़ने और फीस वापसी की नीति, शिक्षण और सहायक कर्मचारियों के नाम व योग्यता, पेश की जाने वाली परीक्षाएं, शैक्षणिक सहायता, सुरक्षा व्यवस्था, सुविधाएं और संचालन का समय सार्वजनिक रूप से दिखाना होगा। साथ ही, पिछले 5 वर्षों के प्रत्येक कार्यक्रम के लिए कुल दाखिल छात्रों की तुलना में सफल छात्रों का वर्षवार आंकड़ा भी देना होगा। कम अवधि वाले कार्यक्रमों के लिए शुरुआत से अब तक का आंकड़ा देना होगा।
पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक (बैचलर डिग्री) तय की गई है। छात्र सुरक्षा से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्ति शिक्षक या सहायक कर्मचारी नहीं बन सकेंगे, और कर्मचारियों की सूची निकटतम पुलिस थाने को भी देनी होगी।
सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और कार्रवाई का ढांचा
सुरक्षा के लिए केंद्रों में उचित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे, लेकिन शौचालय, कपड़े बदलने के कमरे और परामर्श कक्षों में कैमरे नहीं लगाए जा सकेंगे। प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी तैनात करने होंगे, मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता नियुक्त करना या उनकी सेवा लेना अनिवार्य होगा, और शिकायत निवारण प्रणाली भी बनानी होगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर रजिस्ट्रेशन निलंबित या रद्द किया जा सकता है, लेकिन इससे पहले कारण बताओ नोटिस के माध्यम से 15 दिन का अवसर दिया जाएगा और आदेश कारण सहित पारित किया जाएगा। इसके खिलाफ 30 दिन के भीतर संभागीय आयुक्त के पास अपील की जा सकेगी, जिसका निपटारा सुनवाई के 45 दिन के भीतर करना होगा।
छात्रों के लिहाज़ से सबसे बड़ा बदलाव यह है कि उनकी दिनचर्या अब एक सीमा में बंधेगी और मानसिक दबाव की स्थिति में मदद के लिए केंद्र के भीतर ही परामर्शदाता उपलब्ध होगा। अभिभावकों के लिहाज़ से फायदा यह है कि फीस, वापसी की नीति और पिछले परिणामों का आंकड़ा पहले से सार्वजनिक होगा, इसलिए दाखिले का फैसला जानकारी के आधार पर लिया जा सकेगा। शिक्षा में जवाबदेही की यह बहस सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है — तमिलनाडु में स्कूल शिक्षा से जुड़े घोटाले की कार्रवाई भी यही दिखाती है। संस्थानों के लिए यह नियम अनुपालन का बोझ बढ़ाएगा, लेकिन पारदर्शी संस्थानों के लिए यह भरोसा बनाने का अवसर भी है। साथ ही, छात्रों को भारतएआई फेलोशिप जैसे शैक्षणिक अवसरों की जानकारी रखना भी मददगार होगा, ताकि वे सिर्फ कोचिंग पर निर्भर न रहें।
स्रोत: रिपोर्टों के अनुसार, इस अधिसूचना की जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया और फ्री प्रेस जर्नल ने दी है।
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