बेंगलुरु की इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी एथर एनर्जी ने वह कर दिखाया है जिसका उसके निवेशकों और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को लंबे समय से इंतज़ार था। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में पहली बार तिमाही मुनाफा दर्ज किया है। जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में कंपनी को 1.26 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में उसे भारी घाटा हुआ था। यह नतीजा सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाज़ार के बदलते समीकरणों का संकेत भी है।
तिमाही नतीजे: घाटे से मुनाफे तक
रिपोर्टों के अनुसार, एथर एनर्जी को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 1.26 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। एक साल पहले, यानी वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कंपनी को 154.07 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। इससे पिछली तिमाही, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी कंपनी 51.09 करोड़ रुपये के घाटे में थी।
कंपनी का परिचालन राजस्व इस तिमाही में 1,464.24 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले के 898.88 करोड़ रुपये से लगभग 63 प्रतिशत अधिक है। यानी कंपनी की कमाई तेज़ी से बढ़ी है। इसी दौरान वाहन बिक्री भी बढ़ी — कंपनी ने इस तिमाही में 93,211 वाहन बेचे, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 42 प्रतिशत अधिक है। बिक्री और राजस्व दोनों में यह बढ़ोतरी बताती है कि मांग बढ़ रही है और कंपनी का कारोबार फैल रहा है।
शेयर बाज़ार में दो दिन की तेज़ रैली
नतीजों का असर शेयर बाज़ार में तुरंत दिखा। 26 अक्टूबर को एथर एनर्जी के शेयर 14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,575 रुपये पर बंद हुए। अगले दिन, 27 अक्टूबर की सुबह शेयर और ऊपर चढ़कर लगभग 1,660 रुपये तक पहुंच गए। इस तरह दो दिनों में शेयरों में लगभग 20 प्रतिशत की तेज़ी दर्ज की गई। निवेशकों की यह प्रतिक्रिया बताती है कि बाज़ार ने पहली बार के मुनाफे को कंपनी के लिए एक अहम मोड़ के रूप में देखा है।
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विस्तार योजना: उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर 122 करोड़ रुपये
मुनाफे के साथ-साथ कंपनी के निदेशक मंडल ने विस्तार की योजना को भी मंज़ूरी दी है। कंपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर लगभग 122 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करेगी। इसके तहत होसुर संयंत्र की क्षमता दिसंबर 2026 तक 75,000 इकाई प्रति वर्ष बढ़ाई जाएगी — यानी 4.2 लाख से बढ़कर 4.95 लाख इकाई प्रति वर्ष हो जाएगी। इस काम पर 58 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
दूसरी ओर, छत्रपति संभाजीनगर (औरिक) संयंत्र की क्षमता वित्त वर्ष 2027-28 की दूसरी तिमाही तक 1.5 लाख इकाई प्रति वर्ष बढ़ाई जाएगी — 5 लाख से बढ़कर 6.5 लाख इकाई प्रति वर्ष। इस पर 64 करोड़ रुपये खर्च होंगे। औरिक चरण 1 का वाणिज्यिक उत्पादन दिसंबर 2026 से शुरू होगा। दोनों विस्तार पूरे होने के बाद वित्त वर्ष 2027-28 की दूसरी तिमाही तक कंपनी की संयुक्त क्षमता लगभग 11.4 लाख इकाई प्रति वर्ष हो जाएगी।
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पतला मुनाफा, बड़ा सवाल
हालांकि, इस कहानी का दूसरा पहलू भी देखना ज़रूरी है। 1,464 करोड़ रुपये के राजस्व पर 1.26 करोड़ रुपये का मुनाफा बहुत पतला है। इसका मतलब है कि कंपनी अभी मुनाफे की दहलीज़ पर ही खड़ी है, और एक तिमाही का मुनाफा अभी स्थायी सफलता की गारंटी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या कंपनी आने वाली तिमाहियों में भी मुनाफा बरकरार रख पाएगी।
कंपनी के सीईओ तरुण मेहता ने कहा, "हम अभी मुश्किल से बाहर नहीं निकले हैं।"
कुल मिलाकर, एथर एनर्जी की यह तिमाही भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए एक उत्साहजनक संकेत है — मांग बढ़ रही है, राजस्व बढ़ रहा है और कंपनी विस्तार की तैयारी कर रही है। लेकिन मुनाफे की पतली मार्जिन यह भी याद दिलाती है कि असली परीक्षा आने वाली तिमाहियों में होगी।
स्रोत: मनीकंट्रोल की रिपोर्ट और बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट।
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