2018 में एक छोटे से शहर की कहानी के रूप में शुरू हुआ 'मिर्जापुर' अब भारतीय स्ट्रीमिंग के इतिहास का सबसे भरोसेमंद नाम बन गया है। आईएमडीबी ने 27 अक्टूबर 2026 को अपनी रिपोर्ट '10 इयर्स ऑफ स्ट्रीमिंग इन इंडिया' जारी की है, और इसमें मिर्जापुर ने वह कर दिखाया है जो कोई और भारतीय सीरीज़ नहीं कर पाई — 2016 से 2026 के बीच हर साल की टॉप-10 सूची में कुल 9 बार जगह बनाई। यानी अपने पहले सीज़न के बाद से यह शो हर साल दर्शकों की पसंद में बना रहा।
यह रिपोर्ट आईएमडीबी के आंकड़ों पर आधारित है, जो हर महीने 25 करोड़ से ज्यादा विज़िटर्स को आकर्षित करता है। इसमें हर साल की 10 सबसे लोकप्रिय भारतीय सीरीज़ को जगह दी गई है — कुल 110 स्थान, जिन पर 64 अलग-अलग शो आए। रैंकिंग आईएमडीबी पर उन सीरीज़ के पेज व्यूज़ से तय हुई है।

दशक का सफर: 2016 से 2026 तक कौन रहा नंबर वन
रिपोर्ट साल-दर-साल भारतीय दर्शकों के बदलते स्वाद की तस्वीर भी दिखाती है। 2016 में टीवीएफ की 'पिचर्स' सबसे आगे थी, 2017 में प्राइम वीडियो की 'इनसाइड एज' ने जगह बनाई, और 2018-19 में नेटफ्लिक्स की 'सेक्रेड गेम्स' ने राज किया। 2020 में 'स्कैम 1992' ने बाज़ी मारी, 2021 में 'एस्पिरेंट्स', 2022 में 'क्रिमिनल जस्टिस', 2023 में 'फ़र्ज़ी', 2024 में 'मिर्जापुर', 2025 में 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' और 2026 में (15 अक्टूबर तक) 'प्रीतम एंड पेड्रो' सबसे लोकप्रिय रहे।
इस सूची में एक और चौंकाने वाला नाम है — 'स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी'। सिर्फ एक सीज़न के बावजूद यह शो पांच बार सालाना टॉप-10 में आया, जो किसी भी एकल-सीज़न शो के लिए अकेली उपलब्धि है। इसके अलावा 'द फैमिली मैन', 'पंचायत', 'क्रिमिनल जस्टिस', 'पाताल लोक' और 'ताज़ा ख़बर' भी बार-बार सूची में दिखे।
क्राइम-थ्रिलर का दबदबा, फिर भी स्वाद बदल रहा है
110 स्थानों में से 48 पर क्राइम और थ्रिलर शैली की सीरीज़ रहीं — यानी दशक का लगभग आधा चार्ट इसी जॉनर के नाम रहा। लेकिन रिपोर्ट यह भी बताती है कि बाद के वर्षों में हॉरर, रोमांस, कॉमेडी और ड्रामा ने भी जगह बनाई है, जिससे भारतीय स्ट्रीमिंग का स्वाद धीरे-धीरे विविध हो रहा है।
प्लेटफॉर्म के लिहाज़ से प्राइम वीडियो सबसे आगे रहा — उसकी 31 प्रविष्टियां 14 अलग-अलग शोज़ से आईं। नेटफ्लिक्स 21 प्रविष्टियों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, लेकिन उसके शोज़ की विविधता सबसे ज्यादा थी — 18 अलग-अलग टाइटल। रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारतीय शोज़ में दर्शकों की दिलचस्पी दशक भर में करीब 17 गुना बढ़ी है, जबकि नए शो और सीज़न का ऑर्डर लगातार दो साल से घट रहा है — यानी इंडस्ट्री अब चुनिंदा, बड़े दांव लगा रही है।
मिर्जापुर क्यों टिका रहा: प्रामाणिकता की कोई सीमा नहीं
मिर्जापुर की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रामाणिकता मानी जाती है। अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने कहा है कि इस कहानी की प्रामाणिकता की कोई सीमा नहीं है — यही वजह है कि यह शो दुनिया भर के दर्शकों से जुड़ता है। कालीन भैया के किरदार से लेकर पूर्वांचल की बोली और रफ़्तार तक, शो ने एक ऐसी दुनिया रची जो दर्शकों को अपनी सी लगी।
रिपोर्ट ने पंकज त्रिपाठी, अली फ़ज़ल, विक्रांत मैसी, जितेंद्र कुमार, कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर को स्ट्रीमिंग के 'एमवीपी' भी बताया है — वे कलाकार जो बार-बार सफल फ्रेंचाइज़ी से जुड़े रहे। मिर्जापुर के लिए यह रिपोर्ट एक तरह से दशक भर की लोकप्रियता का आधिकारिक मुहर है: यह शो सिर्फ एक हिट नहीं था, बल्कि भारतीय स्ट्रीमिंग की पहचान बन गया।
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स्रोत: द टेलीग्राफ और द प्रिंट की रिपोर्टों के अनुसार।