तमिलनाडु के नीलगिरि ज़िले में 23-24 अक्टूबर 2026 की रात भारी बारिश ने कहर बरपा दिया। कूनूर-मेट्टुपलायम मार्ग पर बुरलियार के पास कीचड़ और उखड़े हुए पेड़ों के साथ आया मलबा एक सरकारी बस पर गिर गया। उस समय बस में सिर्फ़ चालक और परिचालक ही थे — तीन यात्री कुछ ही देर पहले कुरुम्पाडी में उतर गए थे। यह छोटा सा संयोग कई जानों को बचा गया, लेकिन बस के चालक की जान नहीं बच सकी।
बुरलियार में क्या हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, कूनूर से मेट्टुपलायम जा रही तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (TNSTC) की बस बुरलियार के पास मलबे की चपेट में आ गई। बस के चालक जनगराज की मौत हो गई — वे ऊटी के पास कूरट्टी गाँव के रहने वाले थे। परिचालक केशवन गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें मेट्टुपलायम सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बस में चालक और परिचालक के अलावा कोई नहीं था, क्योंकि तीन यात्री कुरुम्पाडी में उतर चुके थे। अगर वे यात्री बस में होते, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था।
बुरलियार में 24 घंटों में 250 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस हादसे की पृष्ठभूमि को समझने के लिए काफ़ी है — इतनी तेज़ बारिश में पहाड़ी ढलानों की मिट्टी कमज़ोर हो जाती है और पेड़ों सहित मलबा नीचे आ जाता है। नीलगिरि और कोयंबटूर ज़िलों में कई जगह भूस्खलन और पेड़ गिरने की घटनाएँ हुईं, जिससे सड़कों पर आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। तमिलनाडु में भारी बारिश के अलर्ट की पृष्ठभूमि पर चेन्नई ऑरेंज अलर्ट और भारी बारिश की ख़बर यहाँ पढ़ें।
150 से अधिक केरल छात्र कैसे बचाए गए?
इसी दौरान मेट्टुपलायम-ऊटी क्षेत्र में भूस्खलन के बाद 150 से अधिक केरल छात्र फँस गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस, अग्निशमन कर्मियों और ज़िला अधिकारियों ने रस्सियों की मदद से उन्हें सुरक्षित निकाला। यह बचाव अभियान भारी बारिश और फिसलन भरे रास्तों के बीच चलाया गया, जिससे इसकी मुश्किल का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
यहाँ आँकड़ों को लेकर दो अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं, और दोनों को अलग-अलग रखना ज़रूरी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 150 से अधिक केरल छात्र बचाए गए, जबकि द हिंदू के अनुसार, 300 से अधिक लोगों — जिनमें स्कूली बच्चे भी शामिल हैं — को बचाकर मेट्टुपलायम लाया गया। ये दोनों आँकड़े अलग-अलग स्रोतों से हैं, इसलिए इन्हें एक ही संख्या में नहीं मिलाया जा सकता। लेकिन दोनों ही इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बचाव अभियान बड़े पैमाने पर चला।
रेड अलर्ट और प्रशासन की सलाह
चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने 24 अक्टूबर को नीलगिरि के लिए अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया था। ज़िला कलेक्टर लक्ष्मी भाव्या ने पर्यटकों और आम लोगों को सलाह दी है कि वे मेट्टुपलायम से कूनूर और कोटागिरि के रास्ते ऊटी की पहाड़ी सड़कों से बचें। रेड अलर्ट का मतलब है कि बारिश का ख़तरा अभी टला नहीं है, और पहाड़ी मार्गों पर और भूस्खलन हो सकते हैं।
इस घटना से एक सबक़ साफ़ है — पहाड़ी इलाक़ों में भारी बारिश के दौरान यात्रा करना जानलेवा हो सकता है, ख़ासकर रात के समय जब मलबा और पेड़ गिरने का ख़तरा ज़्यादा होता है। प्रशासन की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करके पहाड़ी मार्गों पर निकलना न सिर्फ़ अपनी जान को ख़तरे में डालना है, बल्कि बचाव कर्मियों पर भी बोझ बढ़ाना है। इस समय सबसे समझदारी भरा क़दम यही है कि ज़रूरी न हो तो ऊटी की पहाड़ी सड़कों की यात्रा टाल दी जाए, मौसम विभाग के अलर्ट पर नज़र रखी जाए और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जाए। जिन परिवारों ने इस हादसे में अपनों को खोया है, उनके लिए यह एक बेहद दुखद रात रही — और यही वजह है कि चेतावनियों को गंभीरता से लेना ज़रूरी है।
मूल स्रोत: DT Next की रिपोर्ट और Deccan Chronicle की रिपोर्ट।
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