रामशरण नौटियाल कांग्रेस में: भाजपा से इस्तीफे के बाद 12 साल बाद घर वापसी

उत्तराखंड की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम हुआ। बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता और वरिष्ठ नेता रामशरण नौटियाल ने नई दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ले ली। यह कदम भाजपा से उनके इस्तीफे के कुछ ही दिन बाद उठाया गया है — और 12 साल पहले छोड़ी हुई पार्टी में उनकी 'घर वापसी' के तौर पर देखा जा रहा है। 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम का चित्र — मंच पर नेता और तिरंगे झंडे लिए भीड़

कैसे हुई कांग्रेस में वापसी?

रिपोर्टों के अनुसार, रामशरण नौटियाल सोमवार, 19 अक्टूबर को नई दिल्ली में कांग्रेस में शामिल हुए। इस मौके पर उत्तराखंड के प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य मौजूद थे। शैलजा ने कहा कि नौटियाल पार्टी के पुराने साथी हैं, वे भाजपा में घुटन महसूस कर रहे थे, और उनकी वापसी से कांग्रेस मजबूत होगी।

भाजपा से इस्तीफे की वजह: 'सम्मान की कमी'

नौटियाल ने भाजपा छोड़ने की वजह के तौर पर 'सम्मान की कमी' और वरिष्ठ नेताओं द्वारा 'अपमान' का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि 10-12 साल से जुड़े संगठन को कोई बिना वजह नहीं छोड़ता — लेकिन जहां अनुशासनहीनता हो और सम्मान न मिले, वहां रहना ठीक नहीं। दिलचस्प बात यह है कि उनके इस्तीफे को लेकर विवाद भी हुआ था: भाजपा नेतृत्व ने कहा था कि इस्तीफा मिला ही नहीं, जबकि नौटियाल का कहना था कि उन्होंने अपना स्टेनोग्राफर भेजकर पत्र सौंपा था और बाद में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को ईमेल से भी इस्तीफा भेजा।

कौन हैं रामशरण नौटियाल?

रामशरण नौटियाल ने 2000 में कांग्रेस से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था और देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे। 2014 में वे भाजपा में शामिल हुए और 12 साल तक पार्टी से जुड़े रहे। 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने चकराता सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन कांग्रेस के प्रीतम सिंह से 9,000 से अधिक वोटों से हार गए थे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में धामी सरकार पर निशाना

नौटियाल के स्वागत के मौके पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने पुष्कर सिंह धामी सरकार पर भी तीखा हमला बोला। रिपोर्टों के अनुसार, शैलजा ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि कई अहम पहलुओं की ठीक से जांच नहीं हुई। यानी नौटियाल की वापसी का मंच कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए भी इस्तेमाल किया।

जुबिन नौटियाल की चुप्पी

दिलचस्प बात यह है कि गायक जुबिन नौटियाल ने अब तक अपने पिता के इस राजनीतिक कदम पर सोशल मीडिया पर कुछ नहीं कहा है (रिपोर्टों के अनुसार)। यह समझा जा सकता है — एक कलाकार के तौर पर वे अपनी कला को राजनीति से अलग रखना चाहते हैं। हालांकि, पिता के भाजपा से कांग्रेस तक के सफर पर मीडिया की नज़र बनी रहेगी, खासकर तब जब उत्तराखंड में चुनावी सरगर्मी बढ़ेगी।

2027 चुनाव से पहले का संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नौटियाल की वापसी कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह भाजपा से नाराज़ पुराने नेताओं को वापस लाकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। हालांकि, यह भी सच है कि कांग्रेस में वापसी करने वाले हर नेता का असर चुनावी गणित पर एक जैसा नहीं पड़ता — चकराता जैसे पहाड़ी इलाकों में नौटियाल का स्थानीय जनाधार ही उनकी असली पूंजी होगी।

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया | हिंदुस्तान टाइम्स

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