अमीरात के उप प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बिन ज़ायद का मुंबई दौरा: जयशंकर से ऊर्जा-व्यापार पर वार्ता


संयुक्त अरब अमीरात के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नहयान 19-20 अक्टूबर को मुंबई की आधिकारिक यात्रा पर हैं। सोमवार (19 अक्टूबर) को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, जिसमें ऊर्जा, व्यापार, निवेश, फिनटेक, रक्षा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा हुई। यह दौरा भारत-अमीरात व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मुंबई में भारत-अमीरात राजनयिक मुलाकात का प्रतीकात्मक चित्रण

दौरे का एजेंडा: व्यापार से पश्चिम एशिया तक

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 अक्टूबर को नई दिल्ली में साप्ताहिक ब्रीफिंग में इस दौरे की घोषणा की थी। उनके अनुसार, दोनों प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा, व्यापार, निवेश, फिनटेक, रक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में पहलों का आकलन करेंगे और उन्हें आगे बढ़ाएंगे। साथ ही पश्चिम एशिया की स्थिति तथा वैश्विक व बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा होगी। शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद के मुंबई आगमन पर महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने स्वागत किया। द ट्रिब्यून की इस रिपोर्ट में दौरे के कार्यक्रम का ब्योरा दिया गया है।

अमीरात की आधिकारिक समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों और व्यापक रणनीतिक साझेदारी व व्यापक आर्थिक साझेदारी के ढांचे के भीतर उन्हें और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। शेख अब्दुल्ला बिन ज़ायद ने कहा कि अमीरात और भारत के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध आपसी विश्वास, साझा दृष्टिकोण और साझा हितों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का उन्नत मॉडल हैं। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक साझेदारी बढ़ती गति से आगे बढ़ रही है, जिससे सतत विकास को बढ़ावा देने वाले अहम क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग के व्यापक अवसर खुल रहे हैं। डब्ल्यूएएम की इस आधिकारिक रिपोर्ट में बैठक का पूरा ब्योरा पढ़ा जा सकता है।

101 अरब डॉलर का व्यापार संबंध

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत-अमीरात आर्थिक संबंध रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। भारतीय दूतावास के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, जबकि भारत अमीरात का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

इस रिश्ते की नींव फरवरी 2022 में हस्ताक्षरित और मई 2022 से लागू व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) ने रखी थी, जिससे दोनों देशों के बीच शुल्कों में बड़ी कटौती हुई। रिपोर्टों के अनुसार, अमीरात में लगभग 40 लाख भारतीय रहते हैं, जो दोनों देशों के बीच गहरे लोगों-से-लोगों के संबंधों की बुनियाद हैं।

उसी महीने की दूसरी मुलाकात

गौरतलब है कि यह दोनों नेताओं की अक्टूबर में दूसरी मुलाकात है — इससे पहले जयशंकर 14 से 16 अक्टूबर तक अमीरात की आधिकारिक यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने देश के नेतृत्व से बातचीत की थी। इतने कम अंतराल में दो उच्चस्तरीय मुलाकातें बताती हैं कि दोनों देश इस साझेदारी को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 20 अक्टूबर को जयशंकर मुंबई में ही अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी बातचीत करेंगे।

विश्लेषण: भारत के लिए इस साझेदारी का मतलब

अमीरात भारत के लिए सिर्फ एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और पश्चिम एशिया में रणनीतिक संतुलन का अहम स्तंभ है। सीईपीए के बाद व्यापार में आई तेज़ी दिखाती है कि मुक्त व्यापार समझौते ज़मीन पर कैसे काम करते हैं। अमीरात से आने वाला निवेश — चाहे वह बुनियादी ढांचे में हो या वित्तीय क्षेत्र में — भारत की विकास गाथा को गति दे रहा है, और करीब 40 लाख भारतीयों का वहां रहना इस रिश्ते को मानवीय आयाम देता है। पश्चिम एशिया की अस्थिरता के बीच दोनों देशों का नियमित संवाद क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी सकारात्मक संकेत है। अगर 2032 का 200 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल होता है, तो यह साझेदारी भारत के वैश्विक आर्थिक कद को नई ऊंचाई देगी।

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