बंगाल की खाड़ी में उठे सिस्टम को आज दोपहर से पहले ही एक नाम मिल गया — मुरासु। लेकिन इस ख़बर को पढ़ते समय एक बात साफ़ रखिए: यह लेख सुबह की लैंडफ़ॉल ख़बर का दोहराव नहीं है। लैंडफ़ॉल का पूर्वानुमान पहले जैसा ही है — दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच, सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह के बीच, गंभीर चक्रवाती तूफ़ान के रूप में। आज जो बदला है, वह तीन बातें हैं: सिस्टम को नाम मिला, चेतावनी का स्तर बढ़ा, और पहली बार स्टॉर्म सर्ज की चेतावनी जुड़ी। यही इस अपडेट की असली ख़बर है।
आज सुबह 11:30 बजे मुरासु बना
रिपोर्टों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव (डीप डिप्रेशन) 1 नवंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे चक्रवाती तूफ़ान में बदल गया और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसे 'मुरासु' नाम दिया। यह नाम भारत की ओर से दिया गया है; तमिल में 'मुरासु' का अर्थ ढोल (ड्रम) है। यह इस मौसम का बंगाल की खाड़ी का दूसरा चक्रवात है — पहला अक्टूबर के आख़िर में आया अर्नब था।
रिपोर्टों के अनुसार, 11:30 बजे मुरासु अक्षांश 12.1° उत्तर और देशांतर 85.3° पूर्व के पास था — चेन्नई से लगभग 560 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व, विशाखापत्तनम से लगभग 660 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व और नेल्लोर से लगभग 630 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व। उस समय हवाओं की गति 65–75 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जो झोंकों में 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच रही थी, और सिस्टम पश्चिम-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ रहा था।
लैंडफ़ॉल का पूर्वानुमान नहीं बदला — लेकिन खिड़की साफ़ हुई
यह बात दोहराना ज़रूरी है: लैंडफ़ॉल का पूर्वानुमान पहले जैसा ही है। रिपोर्टों के अनुसार, मुरासु 2 नवंबर की सुबह तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवाती तूफ़ान बन जाएगा और फिर दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को नेल्लोर और नरसापुर के बीच पार करेगा। IMD के 1 नवंबर को दोपहर 2:30 बजे जारी राष्ट्रीय बुलेटिन नंबर 6 के अनुसार, तट पार करने की खिड़की सोमवार रात 11:30 बजे से मंगलवार सुबह 4 बजे तक है, और उस समय हवाएँ 100–110 किलोमीटर प्रति घंटे की रहेंगी, जो झोंकों में 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती हैं। पहले के बुलेटिनों में केवल '3 नवंबर की सुबह' कहा गया था — इसलिए इसे एक पक्का समय न समझें, बल्कि एक खिड़की समझें, जो अगले बुलेटिनों में और साफ़ हो सकती है।
आज की तीन नई बातें: नाम, अलर्ट और सर्ज चेतावनी
पहली नई बात तो नाम ही है — सुबह तक यह एक अनाम डीप डिप्रेशन था, अब यह आधिकारिक रूप से चक्रवात मुरासु है। नाम मिलने का मतलब सिर्फ़ पहचान नहीं है; इसका मतलब है कि सिस्टम अब चक्रवात की श्रेणी में आ गया है और उस पर नज़र और चेतावनियाँ उसी स्तर की होंगी।
दूसरी नई बात चेतावनी का स्तर है। रिपोर्टों के अनुसार, IMD ने 1 नवंबर को दोपहर 1 बजे के बुलेटिन में आंध्र प्रदेश और उससे सटे उत्तर तमिलनाडु तट के लिए चेतावनी बढ़ाकर 'साइक्लोन अलर्ट' कर दी — चार चरणों वाली व्यवस्था का दूसरा चरण। यानी अब यह सिर्फ़ निगरानी का मामला नहीं रहा, बल्कि तटवर्ती प्रशासन और लोगों को तैयार रहने का औपचारिक संकेत मिल गया है। आंध्र प्रदेश तट के लिए 'येलो मैसेज' के तहत प्री-साइक्लोन वॉच भी जारी है।
तीसरी और सबसे अहम नई बात पहली स्टॉर्म सर्ज चेतावनी है। रिपोर्टों के अनुसार, IMD के बुलेटिन नंबर 6 में पहली बार कहा गया है कि लैंडफ़ॉल के समय ज्वार से लगभग 1 मीटर ऊपर तक समुद्री पानी तटवर्ती निचले इलाकों में घुस सकता है, जिससे दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका है। सबसे ज़्यादा जोखिम बापटला, कृष्णा और प्रकाशम ज़िलों में बताया गया है। मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 2 नवंबर की सुबह से 4 नवंबर की दोपहर तक आंध्र प्रदेश तट पर समुद्र में न जाएँ, और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में 1–2 नवंबर को भी न जाएँ।
तटवासियों के लिए असल में क्या बदला है
सुबह के पूर्वानुमान की तुलना में तूफ़ान की दिशा या ताक़त नहीं बदली है, लेकिन जोखिम की तस्वीर अब ज़्यादा ठोस हो गई है। पहले चेतावनी सिर्फ़ हवा और बारिश तक सीमित थी; अब समुद्र के पानी के ज़मीन पर चढ़ आने का ख़तरा भी आधिकारिक रूप से जुड़ गया है। यानी तट के बिल्कुल करीब, निचले इलाकों में रहने वालों के लिए ख़तरा सिर्फ़ तेज़ हवा तक सीमित नहीं है — बाढ़ का पानी भी उतना ही बड़ा मसला हो सकता है। बापटला, कृष्णा और प्रकाशम के निचले इलाकों के लोगों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर ख़ास ध्यान देना चाहिए।
ओडिशा की ओर भी तैयारी तेज़ हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, ओडिशा सरकार ने राज्य के दक्षिणी हिस्से में हाई अलर्ट घोषित किया है, क्योंकि मुरासु के असर से 2 से 4 नवंबर के बीच दक्षिणी ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। निकासी (इवैक्यूएशन) के किसी आँकड़े का दावा इस लेख में नहीं किया जा रहा है, क्योंकि लेखन के समय इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
एक सावधानी और: यह सब अभी पूर्वानुमान है, हुई घटना नहीं। चक्रवातों का रास्ता और ताक़त बदल सकती है। इसलिए ताज़ा जानकारी के लिए IMD के अगले बुलेटिनों पर नज़र रखें। लेखन के समय IMD का अगला (शाम 5:30 बजे का) बुलेटिन प्रतीक्षित था और उसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी, इसलिए यह लेख दोपहर 2:30 बजे के बुलेटिन नंबर 6 के तथ्यों पर आधारित है।
सुबह की लैंडफ़ॉल ख़बर यहाँ पढ़ें: Cyclone Murasu Andhra Landfall November 2026
स्रोत: The New Indian Express | ETV Bharat (दोनों में IMD बुलेटिनों के हवाले से; स्टॉर्म सर्ज और अलर्ट-स्तर की जानकारी IMD बुलेटिन नंबर 6, 1 नवंबर, दोपहर 2:30 बजे के अनुसार)
ताज़ा अपडेट के लिए Global Insight को फ़ॉलो करते रहें — अगला IMD बुलेटिन आते ही हम इस ख़बर को अपडेट करेंगे।
