Tax Devolution Explained: Why States Got ₹1.09 Lakh Crore Extra on October 31

केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 को राज्यों के लिए एक बड़ी वित्तीय घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने राज्यों को टैक्स डेवोल्यूशन की एक अतिरिक्त किस्त के रूप में ₹1,09,019 करोड़ जारी किए हैं। यह राशि नियमित मासिक किस्त से अलग है, यानी यह उसके ऊपर दी गई अतिरिक्त राशि है।

इस खबर को समझने के लिए सबसे पहले एक बात साफ कर लेनी चाहिए — यह राशि सीधे आम नागरिकों के खातों में नहीं जा रही है। यह केंद्र से राज्य सरकारों को किया गया हस्तांतरण है, ताकि राज्य अपने विकास और कल्याण से जुड़े खर्चों को आगे बढ़ा सकें।

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टैक्स डेवोल्यूशन क्या है?

टैक्स डेवोल्यूशन का सीधा अर्थ है — केंद्र सरकार द्वारा वसूले गए करों में से राज्यों को उनका हिस्सा देना। जब केंद्र आयकर और निगम कर जैसे करों से राजस्व जुटाता है, तो उसका एक तय हिस्सा राज्यों को हस्तांतरित किया जाता है। यही व्यवस्था भारतीय संघीय ढांचे की रीढ़ है, क्योंकि राज्यों को स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पुलिस और कृषि जैसे विषयों पर खर्च करना होता है, लेकिन कर संग्रह का एक बड़ा हिस्सा केंद्र के पास आता है।

रिपोर्टों के अनुसार, वित्त आयोग के फॉर्मूले के तहत केंद्र के करों के विभाज्य पूल का 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। सामान्य तौर पर केंद्र एक वित्तीय वर्ष में डेवोल्यूशन की 14 किस्तें जारी करता है। मासिक किस्त के अलावा समय-समय पर अतिरिक्त किस्त भी जारी की जाती है, ताकि राज्यों के पास खर्च के लिए पर्याप्त नकदी बनी रहे।

अतिरिक्त किस्त क्यों जारी हुई?

रिपोर्टों के अनुसार, इस अतिरिक्त किस्त का उद्देश्य राज्यों को पूंजीगत व्यय तेज करने और त्योहारी मौसम में विकास तथा कल्याण से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद करना है। यह समय भी अहम है। त्योहारी मौसम में आर्थिक गतिविधि बढ़ती है और राज्य सरकारें सड़कों, भवनों, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर खर्च बढ़ा सकती हैं।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी अतिरिक्त किस्त है। रिपोर्टों के अनुसार, पहली समान अतिरिक्त किस्त 1 अगस्त 2026 को जारी की गई थी, जो भी ₹1,09,019 करोड़ की थी। यानी केंद्र ने इस वित्तीय वर्ष में अब तक दो बार इतनी ही राशि अतिरिक्त रूप में राज्यों को दी है।

संदर्भ के लिए, रिपोर्टों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में टैक्स डेवोल्यूशन का अनुमान ₹15.26 लाख करोड़ है, जबकि 2025-26 का संशोधित अनुमान ₹13.93 लाख करोड़ था। महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 2026-27 की पहली छमाही में संचयी डेवोल्यूशन लगभग ₹7 लाख करोड़ तक पहुंच गया था।

किस राज्य को कितनी राशि मिली?

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अतिरिक्त किस्त में सबसे बड़ी राशि उत्तर प्रदेश को मिली है — ₹19,208 करोड़। इसके बाद बिहार को ₹10,845 करोड़, मध्य प्रदेश को ₹8,010 करोड़, पश्चिम बंगाल को ₹7,866 करोड़ और महाराष्ट्र को ₹7,022 करोड़ मिले हैं। राजस्थान को ₹6,460 करोड़, ओडिशा को ₹4,819 करोड़, आंध्र प्रदेश को ₹4,597 करोड़, कर्नाटक को ₹4,504 करोड़, तमिलनाडु को ₹4,466 करोड़ और गुजरात को ₹4,094 करोड़ दिए गए हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों में असम को ₹3,552 करोड़ मिले हैं। अरुणाचल प्रदेश को ₹1,476 करोड़, मणिपुर को ₹682 करोड़, मिजोरम को ₹615 करोड़, नगालैंड को ₹524 करोड़, त्रिपुरा को ₹699 करोड़, सिक्किम को ₹365 करोड़ और मेघालय को ₹688 करोड़ मिले हैं।

राज्यों के बीच राशि का यह अंतर वित्त आयोग के फॉर्मूले से तय होता है, जिसमें सामान्य रूप से जनसंख्या जैसे कारकों की भूमिका होती है। यही वजह है कि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को कुल राशि में बड़ा हिस्सा मिलता है।

राज्यों के लिए इसका क्या मतलब है?

अपने विश्लेषण में देखें तो यह अतिरिक्त किस्त राज्यों के लिए एक तरह की वित्तीय सांस है। कई राज्य सरकारें साल के उत्तरार्ध में पूंजीगत परियोजनाओं को गति देना चाहती हैं, लेकिन नकदी की कमी से काम धीमा पड़ सकता है। अतिरिक्त किस्त मिलने से वे ठेकेदारों का भुगतान, चल रही परियोजनाओं की रफ्तार और कल्याण योजनाओं के खर्च को बिना रुके आगे बढ़ा सकती हैं।

हालांकि, एक सावधानी भी जरूरी है। राशि जारी होना और राशि खर्च होना दो अलग बातें हैं। यह दावा नहीं किया जा सकता कि यह पैसा पहले ही खर्च हो चुका है। असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य इस राशि का इस्तेमाल कितनी तेजी और कितनी पारदर्शिता से पूंजीगत कार्यों में करते हैं।

कुल मिलाकर, यह अतिरिक्त किस्त संघीय वित्त व्यवस्था का एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा है — यह राज्यों को समय पर नकदी देता है, त्योहारी मौसम में खर्च को सहारा देता है और विकास कार्यों को रुकने नहीं देता। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि राज्य इस राशि का इस्तेमाल किस तरह करते हैं।

मूल स्रोत: Deccan Herald और Daijiworld।

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