Mahadev Betting Kingpin Sourabh Chandrakar Extradited From Oman, Taken to Raipur Court

महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के कथित किंगपिन सौरभ चंद्राकर भारत लौट आए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 1 नवंबर को उन्हें ओमान से प्रत्यर्पित कराया, और सोमवार 2 नवंबर को उन्हें दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय से रायपुर ले जाया गया, ताकि रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जा सके। यह मामला देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्कों में गिना जाता है — और चंद्राकर की वापसी के साथ इसकी जांच एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।

न्यायालय भवन और स्मार्टफोन का प्रतीकात्मक चित्रण — महादेव बेटिंग मामला

ओमान से वापसी: कैसे लौटा 'किंगपिन'

रिपोर्टों के अनुसार, चंद्राकर को जून 2026 में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजे, जिन्हें ओमानी अधिकारियों ने मंज़ूर किया। CBI की एक विशेष टीम मस्कट गई और चंद्राकर को लेकर 1 नवंबर को भारत लौटी।

भारत पहुंचने के बाद मेडिकल जांच और ट्रांज़िट रिमांड की औपचारिकताएं पूरी की गईं, जिसके बाद उन्हें रायपुर ले जाया गया। CBI ने कहा है कि चंद्राकर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत की पेशी का नतीजा — यानी उन्हें कितने दिन की हिरासत में भेजा जाता है — इस खबर के लिखे जाने तक सामने नहीं आया था, इसलिए इस लेख में उसका दावा नहीं किया जा रहा है।

क्या है महादेव ऑनलाइन बुक मामला

ED के अनुसार, भिलाई (छत्तीसगढ़) के रहने वाले सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने महादेव ऑनलाइन बुक नाम का प्लेटफॉर्म बनाया था। यह एक कथित अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म था, जिस पर क्रिकेट, फुटबॉल और ताश के खेलों सहित कई इवेंट्स पर दांव लगाया जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन दुबई से किया जाता था।

मामले का पैमाना ही इसे सुर्खियों में रखता है। जांच में सबसे अधिक उद्धृत आंकड़ा करीब 6,000 करोड़ रुपये का है। इससे अलग, ED ने सितंबर 2026 में रायपुर की अदालत को बताया था कि महादेव ऑनलाइन बुक और इससे जुड़े प्लेटफॉर्मों से कथित तौर पर करीब 94,400 करोड़ रुपये की अपराध-जन्य आय (proceeds of crime) का अनुमान है — यह एजेंसी का अनुमान है, वसूली गई रकम नहीं। दोनों आंकड़ों के बीच का फर्क समझना ज़रूरी है: एक कथित घोटाले का आकार बताता है, दूसरा एजेंसी के अनुमानित अवैध मुनाफे का।

कौन-कौन से केस, कौन-कौन से आरोप

चंद्राकर दो CBI मामलों में वांछित हैं, जिनमें चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। इनमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी और जालसाज़ी, तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा ED का एक अलग मनी-लॉन्ड्रिंग मामला है, जिसमें अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। CBI ने महादेव ऑनलाइन बुक मामलों की जांच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर अपने हाथ में ली थी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चंद्राकर की वापसी का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे जांच में आगे मदद मिलेगी, जिसमें कथित 'प्रोटेक्शन मनी' पाने वालों के बारे में भी जानकारी सामने आ सकती है। यह मुख्यमंत्री का बयान है, जांच का निष्कर्ष नहीं — और अदालत में साबित होने तक सभी आरोप, आरोप ही हैं।

आगे क्या: रायपुर कोर्ट और रवि उप्पल की तलाश

अब सबकी नज़र रायपुर की विशेष अदालत पर है, जो चंद्राकर की हिरासत पर फैसला करेगी। इसके बाद CBI और ED उनसे कथित वित्तीय लेनदेन — खातों और हवाला चैनलों — के बारे में पूछताछ कर सकेंगे। वहीं, सह-संस्थापक रवि उप्पल की तलाश जारी है। ED के एक अधिकारी के अनुसार, उप्पल के दुबई वापस लौटने की जानकारी है और उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है।

महादेव मामला सिर्फ एक बेटिंग ऐप की कहानी नहीं है — यह दिखाता है कि कैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, विदेशी ठिकाने और कथित राजनीतिक संरक्षण मिलकर एक ऐसा नेटवर्क बना सकते हैं, जिसकी जांच में सालों लग जाते हैं। चंद्राकर की वापसी इस जांच का अंत नहीं, बल्कि एक नया अध्याय है।

Global Insight पर इस मामले की अगली कड़ी — रायपुर कोर्ट के फैसले और आगे की पूछताछ — के लिए जुड़े रहें।

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स और सियासत।

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