October GST Collections Hit ₹2.31 Lakh Crore, Up 23% on Festive Demand

अक्टूबर 2026 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत महीना साबित हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, इस महीने सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 2.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के समान महीने की तुलना में 22.9 प्रतिशत अधिक है। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक संग्रह है। त्योहारी सीजन की खरीदारी और आयात से जुड़े राजस्व में तेज उछाल ने इस वृद्धि को सहारा दिया है। सरकार की ओर से 1 नवंबर को जारी अनंतिम आंकड़ों के आधार पर यह तस्वीर सामने आई है।

त्योहारी खरीदारी के दौरान बाजार में सामान खरीदते लोग और जीएसटी संग्रह में वृद्धि को दर्शाती तस्वीर।


त्योहारी मांग ने घरेलू संग्रह को बढ़ाया

घरेलू बिक्री से प्राप्त जीएसटी राजस्व अक्टूबर में 15.8 प्रतिशत बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले यह 1.37 लाख करोड़ रुपये था। रिपोर्टों के अनुसार, त्योहारों के दौरान उपभोक्ता खर्च में आई तेजी इसका मुख्य कारण रही। त्योहारी खपत मजबूत रहने से यह संकेत मिलता है कि घरेलू मांग में जान बनी हुई है।

आयात से राजस्व में 42 प्रतिशत से अधिक की छलांग

इस बार वृद्धि की सबसे बड़ी वजह आयात से जुड़ा राजस्व रहा। रिपोर्टों के अनुसार, आयात पर जीएसटी संग्रह 42.2 प्रतिशत बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल अक्टूबर में यह 50,796 करोड़ रुपये था। इसका अर्थ यह है कि कुल वृद्धि में आयात का योगदान घरेलू बिक्री से कहीं अधिक रहा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आयात में तेजी घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत भी हो सकती है, लेकिन यह भी सच है कि आयात पर निर्भर वृद्धि में उतार-चढ़ाव का जोखिम अधिक होता है।

शुद्ध संग्रह 2 लाख करोड़ के पार

रिफंड घटाने के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व अक्टूबर में 25.6 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कुल रिफंड 6.5 प्रतिशत बढ़कर 27,934 करोड़ रुपये रहा, जो सकल संग्रह की वृद्धि की तुलना में काफी धीमा है। यही वजह है कि शुद्ध राजस्व की वृद्धि दर सकल राजस्व से भी अधिक रही। घटकवार देखें तो केंद्रीय जीएसटी 42,935 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 51,340 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

राज्यों की तस्वीर: महाराष्ट्र सबसे आगे

राज्यवार संग्रह में महाराष्ट्र 35,150 करोड़ रुपये के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद कर्नाटक 15,922 करोड़ रुपये और गुजरात 13,516 करोड़ रुपये के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। यह क्रम बताता है कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों वाले बड़े राज्य जीएसटी संग्रह में अब भी अग्रणी बने हुए हैं। राज्यों के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जीएसटी राजस्व ही केंद्र से राज्यों को होने वाले हस्तांतरण की बुनियाद बनता है। हाल ही में राज्यों को कर हस्तांतरण की बड़ी किस्त जारी होने की खबर भी इसी कड़ी से जुड़ी है। कर हस्तांतरण की इस किस्त के बारे में विस्तार से यहां पढ़ें।

यह वृद्धि कितनी टिकाऊ है?

अक्टूबर लगातार चौथा महीना रहा, जब सकल जीएसटी संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा। अप्रैल से अक्टूबर 2026-27 के दौरान कुल सकल संग्रह 14.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि से 13.2 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर की 22.9 प्रतिशत वृद्धि चार साल से अधिक समय में सबसे तेज वृद्धि बताई जा रही है। फिर भी एक सावधानी जरूरी है — त्योहारी मांग का एक हिस्सा अस्थायी होता है। असली परीक्षा नवंबर और दिसंबर के आंकड़ों में होगी, जब त्योहारों का असर कम हो जाएगा। यदि उस दौर में भी संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के आसपास बना रहता है, तभी इसे टिकाऊ मजबूती कहा जा सकेगा।

आम आदमी के लिए इसका क्या अर्थ है?

मजबूत कर संग्रह का सीधा अर्थ है कि सरकार के पास सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही, कर आधार के विस्तार और डिजिटल भुगतान के बढ़ने से अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ती है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि कर संग्रह में वृद्धि का मतलब यह नहीं है कि महंगाई या ब्याज दरों का दबाव खत्म हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ऊंची महंगाई और ब्याज दरों के बावजूद त्योहारी खपत मजबूत रही, जो उपभोक्ता भरोसे का संकेत है। आने वाले महीनों में सरकार की चुनौती यही होगी कि इस भरोसे को बनाए रखते हुए राजस्व वृद्धि को स्थिर किया जाए।

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स और बिजनेस टुडे की रिपोर्टों के अनुसार।

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