मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी तकरार सोमवार, 2 नवंबर को और तेज हो गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'विदेशी मदद' के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दे दी, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विशेष संसद सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखकर पलटवार किया।
राहुल गांधी ने एक्स पर क्या लिखा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वे 'विदेशी मदद' से प्रधानमंत्री बने और उसी की बदौलत पद पर बने हुए हैं। उन्होंने लिखा, "मिस्टर मोदी, इस देश से झूठ बोलना बंद कीजिए। आप विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने। आप विदेशी मदद से ही प्रधानमंत्री बने हुए हैं। आपकी वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह विदेशियों द्वारा नियंत्रित और समर्थित है। विदेशी सोशल मीडिया पूरी तरह आपका समर्थन करता है।"
इसके साथ ही उन्होंने खुली बहस की चुनौती देते हुए लिखा, "मैं आपको इस बारे में खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच, कोई भी समय। अगर हिम्मत है तो आइए। आप हिम्मत नहीं करेंगे, क्योंकि आप डरे हुए हैं कि मैं आपके बारे में क्या जानता हूं।" राहुल गांधी के ये आरोप उनके अपने दावे हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय एकता दिवस के भाषण से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर देश को अस्थिर करने के लिए विदेशी मदद लेने का आरोप लगाया था। गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष को 'अवरोध पक्ष' भी कहा था, यानी विकास में बाधा डालने वाला दल। राहुल गांधी की पोस्ट इसी का जवाब मानी जा रही है।
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को बहस की चुनौती दी हो। 2019 में भी उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर 20 मिनट की आमने-सामने की बहस की मांग की थी, जो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावी बहसों की तर्ज पर हो।
अमित शाह का पलटवार: विशेष सत्र का प्रस्ताव
गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि सरकार SIR पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है और राहुल गांधी को सदन में ही बहस करने की चुनौती दी। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए विदेशी समर्थित टूलकिट के इशारे पर काम कर रहे हैं। यह आरोप भी भाजपा का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली मुद्दा SIR है — मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण, जिसको लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली भी की थी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
आगे क्या?
अब नजर इस बात पर है कि क्या सरकार वाकई SIR पर विशेष सत्र बुलाती है, और क्या विपक्ष सदन में इस बहस में हिस्सा लेता है। संसद के भीतर बहस हुई तो SIR की प्रक्रिया, उसके दायरे और मतदाता सूची से नाम हटने के आंकड़ों पर तथ्यात्मक चर्चा हो सकती है। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया और बयानों के स्तर पर ही चल रहा है, और दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों पर कायम हैं।
स्रोत: The Hindu, New Indian Express।
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