Ukraine Drone Strike on Kstovo Oil Refinery Ends Pause in Russia Energy Attacks

रात में आग और धुएं से घिरी बड़ी तेल रिफाइनरी का मूल चित्रण, ऊपर सुनहरे अक्षरों में 'यूक्रेन ड्रोन हमला' लिखा है

रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों का दौर फिर तेज हो गया है। 1 नवंबर की रात यूक्रेन के ड्रोन हमले में रूस के निज़्नी नोवगोरोद क्षेत्र के कस्तोवो स्थित बड़े तेल शोधन संयंत्र में आग लग गई। रूसी अधिकारियों ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की पुष्टि की है, जबकि यूक्रेनी पक्ष से जुड़े सूत्रों का दावा है कि निशाना लुकोइल का निज़ेगोरोदनेफ्तेओर्गसिंटेज़ (नॉर्सी) रिफाइनरी था।

इस हमले का समय भी अहम है। रिपोर्टों के अनुसार, इससे कुछ दिन पहले रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमलों में एक ठहराव आया था, लेकिन कस्तोवो की घटना ने दिखाया कि वह ठहराव लंबा नहीं चला।

कस्तोवो में रात को क्या हुआ

निज़्नी नोवगोरोद क्षेत्र के गवर्नर ग्लेब निकितिन ने बताया कि रात के दौरान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला हुआ और कस्तोवो जिले में एक औद्योगिक प्रतिष्ठान को भारी नुकसान पहुंचा। शुरुआती जानकारी के अनुसार, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी और 100 से अधिक ड्रोन नष्ट किए जाने का दावा किया गया।

रूसी बयान में प्रतिष्ठान का नाम नहीं लिया गया। दूसरी ओर, यूक्रेनी निगरानी चैनलों और रक्षा कंपनी फायर पॉइंट से जुड़ी जानकारी में कहा गया कि हमला कस्तोवो रिफाइनरी पर हुआ। आग के सटीक स्थान और नुकसान की पूरी सीमा अभी स्पष्ट नहीं हुई है, इसलिए इस बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

नॉर्सी रिफाइनरी क्यों अहम है

कस्तोवो स्थित नॉर्सी रिफाइनरी रूस की चौथी सबसे बड़ी रिफाइनरी और दूसरी सबसे बड़ी गैसोलीन उत्पादक इकाई बताई जाती है। यह हर साल लगभग 15 से 17 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल प्रसंस्कृत करती है। यही वजह है कि इस पर हमला रूस की ईंधन आपूर्ति व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

यह संयंत्र पहले भी यूक्रेनी हमलों का निशाना बन चुका है। 26 अगस्त को हुए हमले के बाद वहां बड़ी आग लगी थी और संयंत्र को अपना संचालन रोकना पड़ा था।

ठहराव खत्म होने का संकेत

रूसी अधिकारियों के अनुसार, 30 अक्टूबर को ही कहा गया था कि यूक्रेन ने कुछ दिनों के ठहराव के बाद रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले फिर शुरू कर दिए हैं। वरिष्ठ रूसी अधिकारी अलेक्जेंडर नोवाक ने बताया कि तीन तेल रिफाइनरियों और एक गैस-रसायन परिसर पर हमले हुए। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने यूक्रेन से रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का अनुरोध किया था, लेकिन कस्तोवो और समारा क्षेत्र की घटनाओं ने दिखाया कि यह अभियान थमा नहीं है।

यूक्रेन का तर्क लंबे समय से यही रहा है कि वह रूसी ऊर्जा ठिकानों पर इसलिए हमला करता है, क्योंकि रूस यूक्रेन की ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाता है। लंबी दूरी के ड्रोन की मदद से यूक्रेन अब सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित ठिकानों तक पहुंच रहा है — कस्तोवो यूक्रेनी सीमा से लगभग 800 किलोमीटर दूर है।

भारत और वैश्विक तेल बाजार पर असर

रूस की रिफाइनरियों पर हमलों का असर सिर्फ युद्ध के मोर्चे तक सीमित नहीं रहता। जब बड़ी रिफाइनरियों का उत्पादन घटता है, तो वैश्विक बाजार में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती है और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे घरेलू ईंधन लागत से जुड़ता है। ब्रेंट क्रूड के 114 डॉलर पार करने जैसी हालिया घटनाओं ने पहले ही दिखाया है कि ऊर्जा बाजार भू-राजनीतिक झटकों पर कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देता है।

भारत-रूस संबंधों का आर्थिक पहलू भी इस खबर से जुड़ता है। दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, जिसमें ऊर्जा सहयोग एक बड़ा हिस्सा है। मोदी-पुतिन के 100 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य की पृष्ठभूमि में रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर हमले भारत के लिए भी निगरानी योग्य विषय बन जाते हैं।

निष्कर्ष

कस्तोवो रिफाइनरी पर 1 नवंबर का हमला इस बात का ताजा प्रमाण है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों की लड़ाई अब एक नियमित और निर्णायक मोर्चा बन चुकी है। ठहराव की चर्चा के बावजूद हमलों का फिर शुरू होना यह बताता है कि कूटनीतिक दबाव इस रणनीति को रोक नहीं पाया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इससे वैश्विक तेल बाजार में नई हलचल आती है।

स्रोत: द हिंदू, कीव इंडिपेंडेंट

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