Ahmedabad to Host 2029 World Weightlifting Championships, a First for India

गुजरात के अहमदाबाद को 2029 विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप की मेजबानी मिल गई है। अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) ने चीन के निंगबो में हुई अपनी कार्यकारी बोर्ड की बैठक में रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को यह फैसला लिया। यह पहली बार होगा, जब भारत में सीनियर विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप का आयोजन होगा। 2030 की मेजबानी रूस की राजधानी मॉस्को को मिली है। अहमदाबाद के लिए यह एक और बड़ी उपलब्धि है — यह शहर 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भी करेगा।

बड़े स्टेडियम में बारबेल उठाते भारोत्तोलक का प्रतीकात्मक चित्रण

आईडब्ल्यूएफ ने क्या-क्या तय किया

निंगबो बैठक में आईडब्ल्यूएफ ने 2028 से 2030 के बीच चार विश्व चैंपियनशिपों की मेजबानी एक साथ तय की। 2028 विश्व युवा चैंपियनशिप कोसोवो के प्रिश्टिना में होगी, जबकि 2028 विश्व जूनियर चैंपियनशिप वेनेजुएला के कराकस में आयोजित होगी। 2029 सीनियर विश्व चैंपियनशिप अहमदाबाद में और 2030 सीनियर विश्व चैंपियनशिप मॉस्को में होगी। आईडब्ल्यूएफ के महासचिव होजे किनोनेज ने कहा कि मिली सभी बोलियां बेहतरीन थीं और उन्हें भरोसा है कि संबंधित देशों में चैंपियनशिप बड़ी सफलता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि चार में से तीन देश — कोसोवो, वेनेजुएला और भारत — पहली बार आईडब्ल्यूएफ विश्व स्पर्धा आयोजित करेंगे, जो दिखाता है कि यह खेल दुनिया भर में बढ़ रहा है।

भारत का भारोत्तोलन इतिहास

विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप पहली बार 1891 में हुई थी; महिलाओं की स्पर्धा 1987 में शुरू हुई और पहली संयुक्त पुरुष-महिला चैंपियनशिप 1991 में आयोजित हुई। भारत ने अब तक इस चैंपियनशिप में 18 पदक जीते हैं — तीन स्वर्ण, 10 रजत और पांच कांस्य। कुंजरानी देवी 1989 में मैनचेस्टर में महिलाओं के 44 किलोग्राम वर्ग में रजत जीतकर इस स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं; उसी संस्करण में ललिता पॉली ने भी कांस्य जीता था। कर्णम मल्लेश्वरी ने 1994 और 1995 में महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में लगातार विश्व खिताब जीते, और मीराबाई चानू ने 2017 में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीता था।

अहमदाबाद क्यों तैयार शहर है

अहमदाबाद की दावेदारी को गुजरात के हालिया अनुभव से भी बल मिला है — इसी साल गांधीनगर में एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप आयोजित हुई थी। इसके अलावा अहमदाबाद 2030 राष्ट्रमंडल खेलों का मेजबान शहर है और अगर भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलती है, तो भी यही शहर केंद्र में होगा। यानी 2029 की विश्व चैंपियनशिप भारत के बड़े खेल आयोजनों की श्रृंखला में एक और कड़ी बन गई है। मौजूदा विश्व चैंपियनशिप 27 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक निंगबो में ही हो रही है, जो लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए पहली क्वालिफाइंग स्पर्धा भी है।

भारत के लिए इसका मतलब क्या है

घरेलू मैदान पर विश्व चैंपियनशिप का मतलब सिर्फ पदकों की उम्मीद नहीं है। मेजबानी से भारतीय भारोत्तोलकों को घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का मौका मिलेगा, खेल के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ेगा और युवा खिलाड़ियों को विश्व स्तर के खिलाड़ियों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। गुजरात में पहले से मौजूद खेल ढांचे और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के साथ तालमेल से 2029 की चैंपियनशिप की तैयारी आसान हो सकती है — बशर्ते आयोजन की तैयारियां समय पर शुरू हों।

अगले तीन साल में नजर इस बात पर रहेगी कि आयोजन समिति कब बनती है, स्थल और कार्यक्रम की घोषणा कब होती है और भारतीय टीम की क्वालिफिकेशन यात्रा कैसी रहती है। फिलहाल तय है कि 2029 में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ भारोत्तोलक अहमदाबाद में जुटेंगे — और भारत पहली बार इस मंच का मेजबान होगा।

स्रोत: रिपोर्टों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) और स्पोर्टस्टार / द हिंदू। इससे जुड़ी अन्य खबरें: Ishan Kishan Ruled Out of 3rd T20I vs New Zealand: Vaibhav Sooryavanshi Gets Another Chance और PV Sindhu Loses French Open Final to An Se Young After Winning First Game।

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