E100 Ethanol Fuel Approved for Flex-Fuel Vehicles: Can Your Petrol Car Use It?

केंद्र सरकार ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मोटर यान नियमों में संशोधन अधिसूचित किया है, जिसके तहत अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में ई100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल का रास्ता खुल गया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की इस अधिसूचना के बाद उत्सर्जन मानकों में ई85 के साथ ई100 को भी शामिल कर लिया गया है। लेकिन यहां सबसे अहम बात यह है कि यह मंजूरी सिर्फ उन्हीं वाहनों के लिए है, जिन्हें निर्माता ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहन के रूप में डिजाइन और प्रमाणित किया है — आपकी मौजूदा पेट्रोल कार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

हरे ईंधन स्टेशन पर कार और गन्ने के गट्ठर का प्रतीकात्मक चित्रण

ई100 आखिर है क्या

ई100 का नाम भले ही '100 प्रतिशत इथेनॉल' जैसा लगे, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार इसमें आमतौर पर 93-95 प्रतिशत इथेनॉल, 5-7 प्रतिशत पेट्रोल और कुछ एडिटिव होते हैं। इथेनॉल गन्ना, मक्का और बायोमास जैसे कृषि उत्पादों से बनता है। इसी तरह ई85 में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। भारत में अभी ई20 ईंधन चल रहा है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे होते हैं, जो अलग-अलग अनुपात के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकते हैं — ई20 से लेकर ई100 तक।

क्या बदला है नए नियमों में

गजट अधिसूचना (जीएसआर 911(ई)) के तहत केंद्रीय मोटर यान नियम, 1989 के नियम 115 में कई जगह 'ई85' की जगह 'ई85 या ई100' लिखा गया है। नियम 115 वाहन उत्सर्जन मानकों से जुड़ा है। इसके साथ ही संबंधित उत्सर्जन मानकों में हल्के पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए सकल वाहन भार की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह संशोधन 27 अप्रैल 2026 को जारी मसौदा नियमों पर मिली आपत्तियों और सुझावों पर विचार के बाद किया गया है।

आपकी कार पर क्या असर होगा — और क्या नहीं

यह इस खबर का सबसे ज्यादा गलत समझा जाने वाला हिस्सा है, इसलिए इसे साफ शब्दों में समझ लें। मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि ई20 या सामान्य पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई गाड़ियां ई85 या ई100 का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। ई20 से ऊपर के मिश्रण सिर्फ उन्हीं वाहनों के लिए हैं, जो इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन और प्रमाणित हैं। मौजूदा वाहन मालिकों को न तो ई85 पर स्विच करना होगा और न ही अपनी गाड़ी में कोई बदलाव करना होगा — न अभी, न भविष्य में। मंत्रालय की सलाह है कि वाहन मालिक ईंधन चुनने से पहले अपनी गाड़ी पर लगे फ्यूल-कम्पैटिबिलिटी स्टिकर और निर्माता की मैनुअल देखें।

दूसरी अहम बात यह है कि इस अधिसूचना से ई100 पंपों पर मिलने नहीं लगेगा। रिपोर्टों के अनुसार, संशोधन में ई100 ईंधन की देशव्यापी वाणिज्यिक उपलब्धता की कोई समयसीमा नहीं दी गई है। यानी यह नियम वाहनों के डिजाइन और प्रमाणन का रास्ता खोलता है, ईंधन की खुदरा बिक्री का ऐलान नहीं है।

भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की स्थिति

भारत में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अभी शुरुआती दौर में है। जून 2026 में मारुति सुजुकी ने वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल लॉन्च की थी, जिसे भारत का पहला फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन बताया गया — यह ई20 से ई100 तक के मिश्रण पर चल सकती है। टोयोटा, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियां भी भारतीय बाजार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन विकसित कर रही हैं। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल के इस्तेमाल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और उत्सर्जन में कमी आएगी।

आगे क्या देखना है

अब नजर इस बात पर रहेगी कि वाहन निर्माता ई100-सक्षम मॉडलों की घोषणा कब करते हैं और क्या ईंधन कंपनियां चुनिंदा शहरों में ई100 की आपूर्ति शुरू करती हैं। उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल नियम सीधा है — नई गाड़ी खरीदते समय ही फ्लेक्स-फ्यूल क्षमता की जांच करें; पुरानी गाड़ी में ई100 डालने की कोशिश न करें, क्योंकि वह इसके लिए बनी ही नहीं है।

स्रोत: रिपोर्टों के अनुसार, द हिंदू और द ट्रिब्यून / एएनआई। इससे जुड़ी अन्य खबरें: ISRO to Have Four Launch Pads by 2029: Kulasekarapattinam SSLV Complex and Gaganyaan Plan और Delhi Winter Action Plan 2026: BS-VI Entry Ban, 50% WFH and No-PUC-No-Fuel From November 1।

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