भारत का एशियन पैरा गेम्स 2026 का अभियान 23 अक्टूबर को ऐची-नागोया में समाप्त हुआ — और यह भारतीय पैरा खेलों के इतिहास का सबसे शानदार अभियान रहा। भारत ने कुल 114 पदक जीते: 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य। पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहते हुए भारत ने हांगझोउ 2023 के 108 पदकों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, भारतीय पैरा खेलों के नए युग का दस्तावेज है।
<पदक तालिका: 114 पदकों का रिकॉर्ड
भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य सहित कुल 114 पदक अपने नाम किए। यह हांगझोउ 2023 के अंतिम आंकड़े (108 पदक — 27 स्वर्ण, 32 रजत, 49 कांस्य) से छह पदक अधिक है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय दल में 168 खिलाड़ी शामिल थे, जिन्होंने विभिन्न खेलों में भारत का परचम लहराया। पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहकर भारत ने यह साबित कर दिया कि वह अब एशिया की पैरा खेलों की महाशक्ति बन चुका है।
अंतिम दिन के हीरो
अभियान के अंतिम दिन भी भारत के सितारों ने धमाल मचाया। स्टार जेवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल ने 72.64 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। क्लब थ्रो में प्रणव सूरमा ने 32.87 मीटर के साथ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। 400 मीटर टी64 स्पर्धा में संदीप ने 52.28 सेकंड के साथ विश्व रिकॉर्ड तोड़ डाला। निशानेबाज मोना अग्रवाल ने 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन एसएच1 में विश्व रिकॉर्ड के साथ अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीता — उनकी कहानी पर हमारा विस्तृत लेख पहले प्रकाशित हो चुका है।
हांगझोउ से नागोया तक: कितना आगे बढ़ा भारत
हांगझोउ 2023 में भारत ने 108 पदक जीते थे, जो उस समय रिकॉर्ड था। नागोया में न सिर्फ कुल पदक बढ़े, बल्कि स्वर्ण पदकों की संख्या 27 से बढ़कर 30 हो गई — यानी भारत अब सिर्फ ज्यादा पदक नहीं, ज्यादा स्वर्ण भी जीत रहा है। रजत पदकों में 32 से 35 की बढ़ोतरी बताती है कि कई मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी स्वर्ण के बेहद करीब थे। कांस्य पदकों की संख्या 49 पर स्थिर रही, जो दल की गहराई को दर्शाती है।
हमारा विश्लेषण
114 पदकों का यह रिकॉर्ड यूं ही नहीं आया। यह वर्षों से चल रही पैरा खेलों में निवेश, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और टारगेट ओलंपिक पोडियम जैसी योजनाओं का नतीजा है। 168 खिलाड़ियों का दल भेजना भी इस बात का संकेत है कि पैरा खेलों में प्रतिभा खोजने का तंत्र अब जमीनी स्तर तक पहुंच रहा है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार पदक सिर्फ गिने-चुने सितारों तक सीमित नहीं रहे — निशानेबाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन और पावरलिफ्टिंग समेत कई खेलों में भारत ने पदक जीते। यह व्यापकता दिखाती है कि पैरा खेलों का आधार अब पहले से कहीं मजबूत है।
तीन विश्व/गेम्स रिकॉर्ड अंतिम दिन ही टूटना दिखाता है कि भारतीय पैरा खिलाड़ी सिर्फ पदक नहीं, खेल के इतिहास को भी बदल रहे हैं। अगला लक्ष्य साफ है — इस रफ्तार को बनाए रखकर 2028 के पैरालंपिक में नया मुकाम हासिल करना।
संबंधित: खेलों की शुरुआत में 168 खिलाड़ियों के भारतीय दल पर हमारी रिपोर्ट पढ़ें, और बीसीसीआई में प्रज्ञान ओझा की मुख्य चयनकर्ता के रूप में नियुक्ति की खबर यहां देखें।
स्रोत: आउटलुक इंडिया, डीडी इंडिया
ऐसी ही खबरों के लिए Global Insight को फॉलो करें।
