बगदाद में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारत पर जारी प्रस्तावों को लेकर नई दिल्ली ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 19 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय ने ओआईसी के प्रस्तावों में भारत विरोधी संदर्भों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये "दुर्भावनापूर्ण, पक्षपाती और झूठे" हैं और इन्हें "पाकिस्तान ने रचा" है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह बयान सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी साझा किया, जिसकी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी चर्चा है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में साफ कहा कि ओआईसी को भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का "कोई अधिकार नहीं है"। बयान में दोहराया गया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के "अभिन्न और अविभाज्य अंग" हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपने "संकीर्ण एजेंडे" के लिए ओआईसी मंच का दुरुपयोग कर रहा है।
इस्लामोफोबिया के आरोप भी खारिज
बयान में प्रस्तावों के "मनगढ़ंत और शत्रुतापूर्ण संदर्भों" को भी खारिज किया गया, जिनमें इस्लामोफोबिया से जुड़े इशारे शामिल थे। भारत ने इन आरोपों को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि ऐसे दावे देश की वास्तविकता को नहीं दर्शाते। विदेश मंत्रालय का रुख रहा है कि इस तरह के आरोप भारत की बहुलतावादी परंपरा के खिलाफ हैं।
पृष्ठभूमि: 57 सदस्यीय संगठन और सितंबर का संयुक्त बयान
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ओआईसी 57 सदस्य देशों वाला संगठन है। यह ताजा प्रस्ताव सितंबर 2026 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जारी संपर्क समूह के संयुक्त बयान के बाद आया है। बगदाद में 17-18 अक्टूबर को हुई विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में पारित प्रस्तावों में कश्मीर पर भारत विरोधी संदर्भ शामिल थे, जिन पर नई दिल्ली ने अब कड़ा रुख अपनाया है। गौरतलब है कि विदेश नीति के मोर्चे पर भारत की सक्रियता जारी है — पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 अक्टूबर से भारत दौरे पर आ रहे हैं, जहां प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत होगी।
विश्लेषण: पुरानी नीति, कड़ा संदेश
भारत का यह बयान कोई नई बात नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही स्पष्ट नीति का दोहराव है — कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं। ओआईसी के प्रस्ताव कानूनी रूप से भारत पर बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन नई दिल्ली हर बार इनका जवाब देकर यह संदेश देती है कि वह इस मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरतेगी। इस तरह के बयानों का एक उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने भारत का रुख स्पष्ट रखना भी होता है, ताकि प्रस्तावों को किसी भी तरह की मान्यता मिलने की गुंजाइश न रहे। त्वरित और तीखी प्रतिक्रिया से यह भी सुनिश्चित होता है कि कोई अंतरराष्ट्रीय मंच कश्मीर पर भारत के रुख को लेकर भ्रम न पाले। पाकिस्तान द्वारा ओआईसी मंच के इस्तेमाल पर भारत की आपत्ति भी पुरानी है, और इस बयान से दोनों देशों के रिश्तों में निकट भविष्य में किसी नरमी के संकेत नहीं मिलते।
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