भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा है कि भारत के पास 2029 तक चार कार्यशील लॉन्च पैड होंगे। उन्होंने 24 अक्टूबर को चेन्नई के एक विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में यह रोडमैप रखा। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि इसरो का निजीकरण नहीं होगा, बल्कि निजी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ साझेदारी बढ़ाई जाएगी।
चार लॉन्च पैड क्यों चाहिए
रिपोर्टों के अनुसार, दुनियाभर में छोटे उपग्रहों की मांग तेजी से बढ़ रही है। हर उपग्रह को अंतरिक्ष तक पहुंचाने के लिए एक लॉन्च पैड, तैयारी की इमारत और ट्रैकिंग व्यवस्था चाहिए। पैड कम होंगे तो लॉन्च की कतार लंबी होगी। चार पैड होने का मतलब है कि इसरो एक साथ ज्यादा मिशनों की तैयारी कर सकेगा और वाणिज्यिक मांग को भी पूरा कर सकेगा।
नारायणन ने कहा कि इस विस्तार को संभालने के लिए इसरो स्टार्टअप और निजी कंपनियों को तकनीकी जानकारी देगा और उन्हें तैयार करेगा। उनका कहना था कि इससे हजारों उच्च-कौशल वाली नौकरियां पैदा होंगी। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब सिर्फ सरकारी मिशनों तक सीमित नहीं रहा है। निजी कंपनियां भी उपग्रह बना रही हैं और लॉन्च सेवाएं मांग रही हैं।
कुलशेखरपट्टिनम में क्या बन रहा है
इस रोडमैप का केंद्र तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहा 2,000 एकड़ का स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) परिसर है। रिपोर्टों के अनुसार, यहां इंटीग्रेशन भवन, लॉन्च पैड, रेल-ट्रैक प्रणाली, टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड प्रणाली जैसी बुनियादी सुविधाएं होंगी। छोटे उपग्रहों के लिए समर्पित परिसर होने से इसरो बड़े रॉकेटों के पैडों पर दबाव कम कर सकेगा।
एक सावधानी भी दर्ज करनी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, नारायणन ने अन्य तीन पैडों के स्थान या समयसीमा के बारे में विस्तार से नहीं बताया। इसलिए '2029 तक चार पैड' को इसरो अध्यक्ष की घोषित योजना के रूप में पढ़ना चाहिए, न कि तैयार बुनियादी ढांचे के रूप में। योजना और निर्माण के बीच का फर्क ही इस खबर की सही समझ है।
गगनयान की क्या स्थिति है
नारायणन ने गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की भी जानकारी दी। रिपोर्टों के अनुसार, इसरो अगले दो महीनों के भीतर पहला बिना-चालक दल वाला परीक्षण करेगा। इसके बाद चालक दल वाली उड़ान से पहले दो और बिना-चालक परीक्षण होंगे। इन परीक्षणों में पर्यावरण नियंत्रण, सुरक्षा प्रणाली, चालक दल की बचाव व्यवस्था और विभिन्न दबाव, तापमान व आर्द्रता में मॉड्यूल के अंदर की स्थिति की जांच होगी।
उन्होंने बताया कि इस मिशन के लिए अब तक लगभग 8,000 जमीनी प्रयोग किए जा चुके हैं और चार अंतरिक्ष-यात्री नामित व्यक्ति विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह संख्या बताती है कि मानव मिशन में जल्दबाजी नहीं की जा रही है। हर परीक्षण का मकसद किसी एक प्रणाली को नहीं, बल्कि पूरे यान को वास्तविक उड़ान जैसी स्थितियों में परखना है।
आगे क्या देखना होगा
आने वाले महीनों में दो बातों पर नजर रहेगी। पहली, गगनयान का पहला बिना-चालक परीक्षण समय पर होता है या नहीं। दूसरी, कुलशेखरपट्टिनम परिसर का निर्माण किस गति से आगे बढ़ता है और निजी साझेदारी के तहत कौन-कौन सी कंपनियां इससे जुड़ती हैं। 2029 की समयसीमा महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसे परखने का तरीका यही होगा कि जमीन पर कितना काम दिखता है।
स्रोत: द हिंदू, बिजनेस स्टैंडर्ड। और पढ़ें: उत्तराखंड का लॉक्ड फॉल्ट और 8.1 तीव्रता के भूकंप का अध्ययन, भारत बनाम अमेरिका एआई रेस।
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