मणिपुर में लकड़ी चुनने गए ग्रामीणों पर संदिग्ध उग्रवादी हमला: तीन की मौत, सीएम बंगले के बाहर शव रखकर प्रदर्शन

19 अक्टूबर (सोमवार) की सुबह मणिपुर के इम्फाल ईस्ट जिले में लकड़ी चुनने गए ग्रामीणों के एक समूह पर घात लगाकर किए गए हमले ने राज्य को एक बार फिर दहला दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, नोंगशुम गांव के पास खोंगबल सुनुरोक की पहाड़ी इलाके में — जो इम्फाल ईस्ट और कांगपोकपी जिलों की सीमा पर स्थित है — संदिग्ध उग्रवादियों ने ग्रामीणों पर गोलीबारी की। इस घटना ने राज्य में आम नागरिकों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इम्फाल में सरकारी बंगले के बाहर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों का प्रतीकात्मक चित्रण

कैसे हुआ हमला

रिपोर्टों के अनुसार, नोंगशुम और उयुमपोक गांवों के लगभग 16 लोग सुबह के समय पहाड़ी इलाके में लकड़ी चुनने गए थे। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग लकड़ी को वाहन पर लाद रहे थे, तभी उन पर गोलीबारी शुरू हो गई। एक घायल ने बताया कि गोलीबारी अचानक शुरू हुई और उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला। रिपोर्टों के अनुसार मौके पर ही दो लोगों की मौत हो गई, कुछ घायल हुए और तीन लोग लापता हैं। सुरक्षा बलों ने इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। द हिंदू की इस रिपोर्ट में घटना का पूरा ब्योरा दिया गया है।

मृतकों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में अंतर

घटना में मारे गए लोगों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अंतर है, इसलिए इस आंकड़े को सावधानी से समझना ज़रूरी है। पीटीआई की शुरुआती रिपोर्ट में दो लोगों के मारे जाने की खबर थी। बाद में द हिंदू और समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्टों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती एक घायल ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या तीन हो गई। रिपोर्टों के अनुसार मृतकों के नाम अरुबम रोनिल, लैरेनलकपम इनाओबी और क्षेत्रीमयुम सुशील बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार दो से तीन लोग घायल हुए हैं और तीन लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।

सीएम बंगले के बाहर शव रखकर प्रदर्शन

घटना के बाद इम्फाल घाटी के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। रिपोर्टों के अनुसार, गुस्साए लोगों ने दो मृतकों के शव मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के इम्फाल के बाबुपाड़ा स्थित आधिकारिक बंगले के मुख्य द्वार पर रख दिए। रिपोर्टों के अनुसार भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। बाद में पुलिस ने शवों को अपने कब्ज़े में लेकर जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) के शवगृह भिजवा दिया।

मुख्यमंत्री ने इम्फाल के एक अस्पताल में घायलों से मुलाकात की और उनके परिजनों को आश्वासन दिया कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। उन्होंने गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदास और शीर्ष अधिकारियों के साथ सुरक्षा बैठक बुलाई और कमज़ोर इलाकों में सुरक्षा मज़बूत करने के निर्देश दिए। इंडिया टुडे नॉर्थ ईस्ट की इस रिपोर्ट में प्रदर्शन के दृश्य दर्ज हैं।

कामजोंग में भी हिंसा, 48 घंटे का बंद

इसी दौरान कामजोंग जिले में भी हिंसा की खबरें आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार (17 अक्टूबर) को चस्साद गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने कुकी समुदाय के कम से कम 15 घरों में आग लगा दी, जिससे लोग जंगलों और सेना शिविर में शरण लेने को मजबूर हुए। इसी हमले में एक कुकी नागरिक की मौत हुई और चार अन्य घायल हुए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, कांगपोकपी में बांस की टहनी चुन रहे 45 वर्षीय पाओलेन खोंगसाई की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

इन घटनाओं के विरोध में नेटिव पीपुल्स कमेटी, मणिपुर (एनपीसीएम) ने 19 अक्टूबर की आधी रात से 48 घंटे के बंद का आह्वान किया है। संगठन के संयोजक डॉ. एल. फाओमेई ने 48 घंटों के भीतर हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है और चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर आंदोलन तेज़ किया जाएगा। बंद से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ — बाज़ार, शैक्षणिक संस्थान और तेल डिपो बंद रहे, सार्वजनिक परिवहन ठप रहा।

विश्लेषण: सरकार के सामने बड़ी चुनौती

मई 2023 से जारी तनाव के बीच यह घटना बताती है कि ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा की चुनौती अब भी गंभीर है। एक ओर सरकार का दावा है कि शांति बहाली के कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लकड़ी चुनने गए आम ग्रामीणों पर हमला यह दिखाता है कि हिंसा अब भी आम नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन में घुसी हुई है। मुख्यमंत्री द्वारा घायलों के इलाज का खर्च उठाने और सुरक्षा बैठक बुलाने का ऐलान राहत का संकेत है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि हमलावर कितनी जल्दी पकड़े जाते हैं और लापता लोगों का क्या होता है। सीएम बंगले के द्वार पर शव रखने जैसी घटना जनता के गुस्से और सरकार से अपेक्षाओं दोनों का पैमाना है।

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