महीनों से चली आ रही हड़ताल के बाद जम्मू-कश्मीर के मेडिकल और डेंटल इंटर्न के लिए बड़ी राहत की खबर आई है — लेकिन जश्न अभी रुका हुआ है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 20 अक्टूबर 2026 को MBBS और BDS इंटर्न के मासिक भत्ते को ₹12,300 से बढ़ाकर ₹25,000 करने की मंजूरी दे दी है। यह ₹12,700 की बढ़ोतरी, यानी करीब 103% का इजाफा है। लेकिन इंटर्नों ने साफ कहा है — जब तक लिखित सरकारी आदेश नहीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
फैसले में क्या-क्या तय हुआ
रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने भत्ते में संशोधन से जुड़ी फाइल को मंजूरी दे दी है और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को तुरंत आवश्यक आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। औपचारिक अधिसूचना मंगलवार को ही जारी होने की उम्मीद थी, लेकिन छुट्टी के कारण यह टल गई — अब अधिसूचना 21 अक्टूबर (बुधवार) को जारी होने की संभावना है।
आंकड़ों में देखें तो मासिक भत्ता ₹12,300 से बढ़कर ₹25,000 होगा — यानी हर महीने ₹12,700 अधिक। सालाना हिसाब से इंटर्न को पहले ₹1,47,600 मिलते थे, अब ₹3,00,000 मिलेंगे — ₹1,52,400 की वार्षिक बढ़ोतरी। रिपोर्टों के अनुसार यह भत्ता लगभग सात साल से नहीं बढ़ा था, जबकि महंगाई और अस्पताल की ड्यूटी का बोझ लगातार बढ़ता रहा।
हड़ताल जारी क्यों?
इंटर्नों ने 31 अगस्त को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी और उनकी मांग ₹30,000 मासिक भत्ते की थी — मंजूर ₹25,000 से अधिक। लेकिन असली वजह अविश्वास है: रिपोर्टों के अनुसार पहले भी आश्वासन मिले थे जो अमल में नहीं बदले। यही कारण है कि इंटर्न संगठन के प्रतिनिधि और AIMSA के संयुक्त सचिव डॉ. मोहम्मद आकिब जावेद ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए भी कहा कि आधिकारिक आदेश जारी और सार्वजनिक होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
AIMSA जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने भी यही रुख दोहराया है। रिपोर्टों के अनुसार इंटर्नों ने मंगलवार शाम को विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कैंडल मार्च भी निकाला। कांग्रेस ने भी हड़ताली इंटर्नों के रुख का समर्थन किया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू पहले से ही भत्ता संशोधन की मांग का समर्थन करती आ रही हैं।
अन्य राज्यों से तुलना: ₹12,300 कितना कम था?
इस फैसले का असली संदर्भ तुलनात्मक है। रिपोर्टों के अनुसार देश के कई राज्यों और केंद्रीय संस्थानों में मेडिकल इंटर्न का भत्ता जम्मू-कश्मीर के पुराने ₹12,300 से काफी अधिक बताया जाता है — यानी करीब सात साल से अपरिवर्तित यह राशि राष्ट्रीय परिदृश्य में एक अपवाद (outlier) बन चुकी थी। एक ही डिग्री, एक ही तरह की ड्यूटी, लेकिन राज्य के हिसाब से वेतन में इतना अंतर — यही वह असमानता है जिसके खिलाफ इंटर्न महीनों से आवाज उठा रहे थे।
₹25,000 की नई राशि मांग के ₹30,000 से कम जरूर है, लेकिन यह स्वीकार्यता का सवाल अब 21 अक्टूबर के लिखित आदेश पर टिका है। अगर आदेश समय पर जारी होता है और उसमें स्पष्ट तारीख व शर्तें हों, तो हड़ताल समाप्त होने की संभावना प्रबल है — वरना अविश्वास की यह खाई और गहरी हो सकती है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं।
चिकित्सा शिक्षा से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में NMC के मर्सी अटेम्प्ट फैसले पर हमारी रिपोर्ट भी पढ़ें — वह भी MBBS छात्रों के भविष्य से जुड़ा अहम फैसला था।
सूत्र: न्यू इंडियन एक्सप्रेस, फ्री प्रेस कश्मीर — रिपोर्टों के अनुसार।
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