No Double Standards on Terror: Rajnath Singh's SCO Message With Pakistan Present

20 अक्टूबर, 2026 (मंगलवार) को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं सरकार प्रमुखों की परिषद की बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर दुशान्बे गए थे। उन्होंने मंच से आतंकवाद पर भारत की सबसे कड़ी चेतावनी दोहराई — और खास बात यह रही कि उनके सामने ही पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार बैठे थे।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कक्ष में राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर संबोधन, दुशान्बे SCO बैठक

दोहरे मापदंड पर सीधा वार

रक्षा मंत्री का "दोहरे मापदंड" (double standards) वाला संदेश कोई सामान्य कूटनीतिक भाषा नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आतंकवाद को "विकास के सबसे गंभीर खतरों में से एक" बताया और कहा कि यह निवेश और व्यापार को नुकसान पहुंचाता है तथा समाजों को कट्टरपंथ की ओर धकेलता है। उनका संदेश स्पष्ट था — आतंकवादियों को पैसा देने, उनका समर्थन करने या उन्हें शरण देने वालों के लिए कोई छूट नहीं होनी चाहिए।

उसी मंच पर पाकिस्तान

रिपोर्टों के अनुसार, संबोधन के दौरान पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार राजनाथ सिंह के सामने बैठे थे। भारत ने SCO के मंच से पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया — यह स्पष्ट करना जरूरी है — लेकिन "आतंकवाद का समर्थन करने वालों" और "सुरक्षित ठिकाना देने वालों" जैसे शब्दों का निशाना किस ओर था, यह किसी से छिपा नहीं रहा।

व्यापार और कूटनीति के अन्य संदेश

रिपोर्टों के अनुसार, राजनाथ सिंह ने 2026–2030 की बहुपक्षीय व्यापार कार्य योजना (multilateral trade action plan) का समर्थन भी किया। दुशान्बे दौरे के दौरान उन्होंने ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेज़ा आरेफ से भी मुलाकात की।

यह संदेश रक्षा मंत्री की 15 अक्टूबर की चेतावनी की कड़ी में भी देखा जा रहा है — जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से भविष्य में कोई भी आतंकी कार्रवाई "और कड़ी प्रतिक्रिया" को जन्म देगी।

हमारा विश्लेषण

दुशान्बे का यह संदेश भारत की आतंकवाद-विरोधी कूटनीति का नया टेम्पलेट दिखाता है — नाम लिए बिना निशाना, और मंच ऐसा जहां जवाब देने से बचा न जा सके। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर "दोहरे मापदंड" का जिक्र पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए एक साथ संदेश है। व्यापार कार्य योजना का समर्थन भी रणनीतिक है — यह दिखाता है कि भारत सुरक्षा चिंताओं के बावजूद क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग से पीछे नहीं हटता। आने वाले महीनों में यही संतुलन — सुरक्षा पर कड़ाई, व्यापार पर संवाद — भारत की SCO कूटनीति की पहचान बनेगी।

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सूत्र: हिंदुस्तान टाइम्स, इकनॉमिक टाइम्स

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