सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को हुई अपनी बैठक में देश के चार हाईकोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने दिल्ली, गुजरात, तेलंगाना और उत्तराखंड हाईकोर्ट के लिए एक-एक न्यायाधीश का नाम केंद्र सरकार को भेजा है। रिपोर्टों के अनुसार, कॉलेजियम की इस बैठक में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना भी शामिल थे। यह सिफारिश है, नियुक्ति नहीं — अंतिम नियुक्ति राष्ट्रपति के वारंट से होगी, जिसके पहले केंद्र सरकार इन नामों पर प्रक्रिया पूरी करेगी।
किसे, किस हाईकोर्ट के लिए सिफारिश
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए न्यायमूर्ति पी सैम कोशी का नाम सुझाया गया है। वे अभी तेलंगाना हाईकोर्ट में न्यायाधीश हैं और उनका मूल हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ है। गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए न्यायमूर्ति मनाश रंजन पाठक का नाम भेजा गया है — वे अभी गुजरात हाईकोर्ट में ही न्यायाधीश हैं और उनका मूल हाईकोर्ट गुवाहाटी है, इसलिए यह अपने ही कोर्ट में नेतृत्व संभालने का मामला है। कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती को तेलंगाना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश हुई है, जबकि पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर सिंह को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव है।
इस तरह चार में से तीन सिफारिशें दूसरे हाईकोर्ट में तबादले के साथ पदोन्नति की हैं, और एक अपने ही कोर्ट में शीर्ष पद संभालने की। कॉलेजियम ने एक ही दिन तीन अलग-अलग प्रस्तावों के जरिए ये फैसले लिए — चार मुख्य न्यायाधीशों के अलावा बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए नौ नए न्यायाधीशों के नामों को भी मंजूरी दी गई।
बॉम्बे और मध्य प्रदेश के लिए नौ नए न्यायाधीश
बॉम्बे हाईकोर्ट के लिए दो नामों को मंजूरी मिली है — सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसटीएटी), मुंबई के न्यायिक सदस्य अजय शर्मा और अधिवक्ता वैभव अनंत सुगदारे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए सात अधिवक्ताओं को न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इन सिफारिशों के बाद भी नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया बाकी है, इसलिए इन्हें अभी नियुक्त न्यायाधीश कहना सही नहीं होगा।
ये पद खाली क्यों हुए
इन सिफारिशों की पृष्ठभूमि में अक्टूबर की शुरुआत का एक बड़ा बदलाव है। 5 अक्टूबर 2026 को तीन हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था — गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपारेश कुमार सिंह। उनके सुप्रीम कोर्ट जाने से दिल्ली, गुजरात और तेलंगाना में शीर्ष पद खाली हुए, जिन्हें भरने की दिशा में अब यह सिफारिश एक कदम है।
कॉलेजियम की प्रक्रिया कैसे काम करती है
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया में कॉलेजियम की सिफारिश पहला और अहम चरण है। कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश के साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। सिफारिश के बाद केंद्र सरकार नामों की जांच और प्रक्रिया पूरी करती है और फिर राष्ट्रपति औपचारिक नियुक्ति करते हैं। इसीलिए किसी भी नाम को तब तक 'मुख्य न्यायाधीश बन गए' कहना जल्दबाजी होगी, जब तक नियुक्ति का वारंट जारी न हो जाए।
इस खबर का मतलब क्या है
चार हाईकोर्ट में एक साथ नेतृत्व बदलाव का असर सिर्फ कुर्सियों तक सीमित नहीं रहता। मुख्य न्यायाधीश ही अपने हाईकोर्ट की रोस्टर व्यवस्था, मामलों की सुनवाई की प्राथमिकता और प्रशासनिक फैसलों की दिशा तय करते हैं। दिल्ली जैसे हाईकोर्ट में, जहां नीतिगत और संवैधानिक मामलों की भरमार रहती है, नए मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल आने वाले महीनों की सुनवाई की रफ्तार पर असर डाल सकता है। इसी तरह तेलंगाना और उत्तराखंड जैसे कोर्ट में भी यह बदलाव स्थानीय मुकदमों की गति से जुड़ा हुआ है।
अगला चरण अब केंद्र सरकार के पाले में है। अगर प्रक्रिया बिना अड़चन के पूरी होती है, तो आने वाले हफ्तों में इन चारों नामों पर नियुक्ति की घोषणा हो सकती है। तब तक इन्हें सिफारिश के रूप में ही देखना सही होगा — और यही इस खबर की सबसे अहम सावधानी भी है।
स्रोत: रिपोर्टों के अनुसार, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस / पीटीआई और बार एंड बेंच। इससे जुड़ी अन्य खबरें: ECI Tells Supreme Court: All SIR Decisions Were Unanimous, Form 6 Not Amended और Anbil Mahesh Arrested in Alleged Rs 100 Crore Tamil Nadu School Scam After High Court Rejects Bail।
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