Telangana Weighs Wheat Flour, Essentials in Ration Shops as El Niño Looms

तेलंगाना के राशन कार्डधारकों के लिए एक बड़ी खबर आ सकती है — लेकिन अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। 19 अक्टूबर को सचिवालय में नागरिक आपूर्ति एवं सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने एक समीक्षा बैठक में राशन की दुकानों पर गेहूं का आटा, अरहर दाल (कंदीपप्पू), पाम तेल, चीनी, इमली और मिर्च पाउडर रियायती दरों पर देने के प्रस्तावों पर चर्चा की। अंतिम फैसला केवल विस्तृत प्रस्ताव तैयार होने के बाद ही होगा।

रिपोर्टों के अनुसार, इस समीक्षा का मकसद अगले 14 महीनों के लिए राज्य की खाद्य सुरक्षा योजना तैयार करना है, ताकि एल नीनो के कारण वर्षा की कमी की आशंका के बावजूद राज्य के 3.42 करोड़ पीडीएस लाभार्थियों को अनाज की कमी न हो। साफ है — सरकार पहले से ही संभावित संकट की तैयारी में जुट गई है।

तेलंगाना की सरकारी राशन दुकान में गेहूं के आटे की बोरियां, अरहर दाल, पाम तेल और मसालों की टोकरियां सजाए गए दुकानदार का प्रतीकात्मक चित्र

राशन सूची में क्या-क्या जुड़ सकता है?

फिलहाल विचाराधीन प्रस्तावों के अनुसार, राशन की दुकानों पर चावल के साथ-साथ गेहूं का आटा, अरहर दाल, पाम तेल, चीनी, इमली और मिर्च पाउडर रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जा सकता है। यह तेलंगाना के सार्वजनिक वितरण तंत्र के लिए बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अभी राशन दुकानों पर मुख्य रूप से चावल ही दिया जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार, मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन वस्तुओं को जोड़ने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए — जिसमें खरीद, भंडारण, वितरण और लागत का पूरा हिसाब होगा। यह स्पष्ट किया गया है कि अंतिम निर्णय उसी व्यापक प्रस्ताव के बाद लिया जाएगा, इसलिए त्योहारों के आसपास आई कुछ सुर्खियों को अंतिम घोषणा समझना गलत होगा।

14 महीने की खाद्य सुरक्षा योजना: आंकड़े क्या कहते हैं?

बैठक में पेश आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर महीने लगभग 2.38 लाख मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है — सालाना 28.56 लाख मीट्रिक टन। 16 अक्टूबर तक राज्य के पास 9.64 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक था, जिसमें 3.50 लाख मीट्रिक टन केंद्रीय पूल और 6.14 लाख मीट्रिक टन राज्य पूल से था।

इसके अलावा, कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के जरिए 18.39 लाख मीट्रिक टन चावल और आने की उम्मीद है। इस तरह कुल 28.03 लाख मीट्रिक टन का भंडार होगा — यानी करीब 11.7 महीने की जरूरत, जो सितंबर 2027 तक चलेगी। यह गणना दिखाती है कि सरकार ने अगले साल तक की खाद्य सुरक्षा का खाका तैयार कर रखा है।

एल नीनो का डर और सरकार की तैयारी

इस पूरी योजना के पीछे एल नीनो की आशंका है — मौसम की इस स्थिति में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे धान की फसल प्रभावित हो सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का तर्क है कि अगर फसल प्रभावित होती है, तो भी राज्य के 3.42 करोड़ पीडीएस लाभार्थियों के चूल्हे ठंडे न पड़ें।

इसलिए सिर्फ चावल का भंडार ही नहीं, बल्कि राशन टोकरी को विविध बनाने की सोच भी चल रही है। गेहूं का आटा और दालें प्रोटीन और पोषण के लिहाज से चावल का अच्छा पूरक हैं — खासकर उन परिवारों के लिए जो बाजार की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं।

Global Insight का विश्लेषण: प्रस्ताव से योजना तक का रास्ता

इस खबर को लेकर सबसे जरूरी सावधानी यह है कि इसे प्रस्ताव ही समझा जाए, घोषणा नहीं। भारत में खाद्य-सब्सिडी से जुड़े फैसले जटिल होते हैं — खरीद, भंडारण, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय भार, हर पहलू पर व्यापक अध्ययन चाहिए। मंत्री ने खुद अंतिम निर्णय को विस्तृत प्रस्ताव से जोड़ा है।

हालांकि, इस समीक्षा से एक बात साफ है: तेलंगाना सरकार खाद्य सुरक्षा को लेकर सतर्क है और एल नीनो जैसे जोखिमों की पहले से तैयारी कर रही है। अगर यह प्रस्ताव योजना में बदलता है, तो यह राज्य के पीडीएस तंत्र के इतिहास में सबसे बड़ा विस्तार होगा। तब तक के लिए — नजर बनाए रखिए, लेकिन सुर्खियों को अंतिम सत्य मत मानिए।

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सूत्र: The Hans India: राशन सूची में गेहूं का आटा और दालें शामिल हो सकती हैं | New Indian Express: तेलंगाना के पास सितंबर 2027 तक का चावल भंडार

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