जापान के आइची-नागोया में चल रहे 5वें एशियाई पैरा खेलों में भारत के दो पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। बेबी सहाना रवि और जहान दोराब मदान — दोनों तमिलनाडु के — ने अपने-अपने सेमीफाइनल में हार के बावजूद कांस्य पक्का किया। अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 20 अक्टूबर को दोनों खिलाड़ियों के लिए 30-30 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि की घोषणा की है।
रिपोर्टों के अनुसार, यह घोषणा मुख्यमंत्री कार्यालय के सोशल-मीडिया पोस्ट के जरिए की गई। तमिलनाडु सरकार की ओर से खेलों में पदक विजेताओं को प्रोत्साहित करने की यह परंपरा रही है, लेकिन इस बार यह राशि पैरा खिलाड़ियों के लिए खास मायने रखती है — क्योंकि यह देश के पैरा टेबल टेनिस के उभरते सितारों के लिए अब तक के सबसे बड़े सम्मान में से एक है।

बेबी सहाना रवि: स्टैंडिंग कैटेगरी में ऐतिहासिक कांस्य
बेबी सहाना रवि ने महिला एकल क्लास 9 (स्टैंडिंग कैटेगरी) में कांस्य पदक जीता। रिपोर्टों के अनुसार, सेमीफाइनल में उन्हें चीन की माओ जिंगडियान ने 0-3 से हराया, जिसमें गेम स्कोर 8-11, 2-11 और 4-11 रहा।
यह पदक इसलिए खास है क्योंकि स्टैंडिंग कैटेगरी में यह भारत के पहले पदकों में से एक माना जा रहा है। एशियाई पैरा खेलों जैसे बड़े मंच पर चीन जैसी मजबूत टेबल टेनिस शक्ति के खिलाफ खेलना ही अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। सहाना का सफर तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने का सपना देखते हैं।
जहान दोराब मदान: दुर्घटना से कांस्य तक का सफर
जहान दोराब मदान ने पुरुष एकल क्लास 1 में कांस्य पदक जीता। रिपोर्टों के अनुसार, सेमीफाइनल में वह दक्षिण कोरिया के किम ह्योनुक से हार गए। मदान की कहानी असाधारण है — वह पहले रेसिंग ड्राइवर थे, लेकिन एक सड़क हादसे में पैरालिसिस के बाद उन्होंने पैरा टेबल टेनिस को अपनाया।
क्लास 1 व्हीलचेयर कैटेगरी में खेलना अत्यंत कठिन माना जाता है, क्योंकि खिलाड़ी को पूरी तरह बैठकर खेलना होता है। ऐसे में एशियाई स्तर पर कांस्य जीतना मदान की मानसिक दृढ़ता और तकनीकी महारत का सबूत है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि जिंदगी में दुर्घटना अंत नहीं होती — कभी-कभी वह नए रास्ते की शुरुआत होती है।
तमिलनाडु सरकार का 60 लाख रुपये का सम्मान
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की 30-30 लाख रुपये की घोषणा से दोनों खिलाड़ियों को कुल 60 लाख रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा। रिपोर्टों के अनुसार, यह घोषणा 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कार्यालय के सोशल-मीडिया हैंडल के जरिए की गई।
यह राशि सिर्फ इनाम नहीं, बल्कि एक संदेश है — राज्य अपने पैरा एथलीटों को मुख्यधारा के खिलाड़ियों के बराबर मानता है। पैरा खेलों में अक्सर खिलाड़ियों को स्पॉन्सरशिप और वित्तीय सहायता की कमी झेलनी पड़ती है। ऐसे में सरकारी नकद पुरस्कार उनके प्रशिक्षण, उपकरण और भविष्य की प्रतियोगिताओं की तैयारी में सीधी मदद करते हैं।
Global Insight का विश्लेषण: पैरा खेलों का बदलता भारत
यह घोषणा एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। भारत में पैरा खेल अब सहानुभूति के विषय नहीं, बल्कि सम्मान और निवेश के विषय बन रहे हैं। लेकिन अभी भी रास्ता लंबा है — ग्रासरूट स्तर पर पैरा खेलों के लिए अकादमी, कोच और उपकरणों की भारी कमी है। सरकारों की ऐसी घोषणाएं तभी सार्थक होंगी जब पैरा एथलीटों के लिए नियमित सहायता तंत्र — जैसे मासिक भत्ता, प्रशिक्षण अनुदान और रोजगार की गारंटी — मजबूत हो।
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