Nasdaq Crash Hits Indian AI Stocks: E2E Networks, ESDS Fall as AI Bubble Fears Grow

शेयर बाजार में गिरावट दिखाता लाल ग्राफ और चिंतित कारोबारी

अमेरिकी शेयर बाजार में आई तेज गिरावट की लहर सोमवार को भारत तक पहुंच गई। नैस्डैक में अक्टूबर के आखिरी कारोबारी दिन आई बड़ी गिरावट के बाद भारत में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा। ई2ई नेटवर्क्स का शेयर लगातार दूसरे दिन 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया, जबकि ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सवाल अब यह है कि क्या यह सिर्फ एक करेक्शन है, या एआई शेयरों में बना बबल सच में फूट रहा है?

भारत में असर: ई2ई और ईएसडीएस क्यों गिरे

2 नवंबर को भारतीय बाजार में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के शेयर अमेरिकी बिकवाली की चपेट में आए। रिपोर्टों के अनुसार, ई2ई नेटवर्क्स और ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर सेवाएं देती हैं, इसलिए जब अमेरिका में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को लेकर चिंता बढ़ी, तो इनके शेयरों पर भी असर पड़ा।

यह गिरावट किसी एक कंपनी की खबर से नहीं, बल्कि वैश्विक धारणा में बदलाव से आई है। निवेशक अब यह पूछ रहे हैं कि एआई पर हो रहे भारी खर्च से मुनाफा कब और कितना मिलेगा। इससे पहले अक्टूबर में भारतीय बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखा गया था, जब सेंसेक्स 460 अंक गिरा था और निफ्टी 22,700 से नीचे चला गया था।

अमेरिका में क्या हुआ: 31 अक्टूबर की गिरावट

31 अक्टूबर को नैस्डैक कंपोजिट में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जो जून के बाद का सबसे तेज एक दिन का पतन माना जा रहा है। एसएंडपी 500 भी 1.8 प्रतिशत गिरा। रिपोर्टों के अनुसार, इस गिरावट की वजह अमेज़न और इंटेल के नतीजे रहे, जिनमें एआई पर बढ़ते खर्च का संकेत मिला। निवेशकों को चिंता है कि हाइपरस्केलर कंपनियों का डेटा सेंटर और चिप पर खर्च बढ़ता जा रहा है, जबकि निकट भविष्य में इससे होने वाली कमाई पर सवाल बने हुए हैं।

अक्टूबर महीने का हिसाब और भी चौंकाने वाला है। नैस्डैक अक्टूबर में लगभग 5 प्रतिशत गिरा, जो मार्च 2025 के बाद का सबसे खराब महीना रहा। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक महीने में नैस्डैक 100 से 2 लाख करोड़ डॉलर से अधिक की वैल्यू खत्म हो गई, जबकि एक अन्य अनुमान के अनुसार बड़ी टेक कंपनियों की वैल्यू में लगभग 90,000 करोड़ डॉलर की गिरावट आई।

चीन में बबल पहले ही फूट चुका है?

इस बहस का सबसे तेज मोड़ चीन से आया है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन का स्टार50 इंडेक्स — जो देश की प्रमुख एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों को दर्शाता है — जुलाई के शिखर से 40 प्रतिशत गिर चुका है, जिससे लगभग 48,000 करोड़ डॉलर की बाजार वैल्यू खत्म हो गई। वहां सरकार की ओर से निवेश अटकलों पर अंकुश के दिशा-निर्देशों और पश्चिमी निर्यात नियंत्रणों की आशंका ने भी बिकवाली को तेज किया। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स भी अक्टूबर में 5.3 प्रतिशत गिरकर 5,376.74 पर आ गया, और इसकी सबसे बड़ी वजह एआई व्यापार का ढहना बताया गया।

भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है

भारतीय निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि एआई थीम अब पहले जैसी एकतरफा तेजी वाली कहानी नहीं रही। पाइनट्री मैक्रो के संस्थापक रितेश जैन के हवाले से कहा गया है कि कुछ विश्वस्तरीय कंपनियां भी एआई बबल और उसके फूटने की आशंका के भंवर में फंसी हुई हैं। उनका संकेत है कि अब बाजार हर कंपनी के खर्च और मुनाफे के आंकड़ों को बारीकी से परखेगा, न कि सिर्फ एआई के नाम पर शेयर खरीदेगा। भारत में जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग ने भी टेक उत्साह दिखाया था, लेकिन अब वह उत्साह नतीजों से परखा जाएगा।

निष्कर्ष यही है कि एआई बबल फूटा है या नहीं, यह बहस अभी खुली है — लेकिन बाजार का मूड बदल चुका है। अमेरिका में गिरावट, चीन में बबल का फूटना और भारत में एआई शेयरों पर दबाव एक ही संकेत दे रहे हैं: निवेशक अब एआई की कहानी नहीं, उसके आंकड़े देख रहे हैं। आने वाले नतीजे और खर्च के आंकड़े ही तय करेंगे कि यह गिरावट एक करेक्शन है या एक बड़े बदलाव की शुरुआत।

स्रोत: मनीकंट्रोल/ट्रेडिंगव्यू — नैस्डैक में गिरावट और भारतीय एआई शेयर; एसआईएएस — अक्टूबर में एआई बबल और एसटीआई में गिरावट।

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