पंजाब, 20 अक्टूबर 2026 — केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को एक दिवसीय पंजाब दौरे पर रहे, जिसमें उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में नशे से जुड़ी हिंसा में जान गंवाने वालों के तीन परिवारों से मुलाकात की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं, और नशे का मुद्दा राज्य की राजनीति के केंद्र में है।
दौरे के कुछ घंटे पहले ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मानसा के नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच CBI को सौंपने की घोषणा कर दी थी — जो पीड़ित परिवार की मुख्य मांग थी।
तीन परिवार, तीन घटनाएं
बिक्रमजीत सिंह (गुरदासपुर): 15 अक्टूबर को मारी पनवां गांव में उनकी हत्या कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि नशा तस्करी का विरोध करने पर उनकी हत्या हुई, जबकि पुलिस का दावा है कि झगड़ा मोबाइल फोन को लेकर हुआ था। दोनों पक्षों के दावे सामने हैं — सच्चाई जांच का विषय है, इसलिए हम किसी एक दावे को तथ्य नहीं मान रहे।
गुलज़ार सिंह (संगरूर): तूर बंजारा गांव के दिहाड़ी मज़दूर गुलज़ार सिंह ने 7 सितंबर को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल पूछने पर उन्हें जातिगत उत्पीड़न झेलना पड़ा।
परविंदर सिंह झोटा (मानसा): 42 वर्षीय नशा-विरोधी कार्यकर्ता झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार ने — जिन पर झोटा ने नशीले पदार्थ बेचने का आरोप लगाया था — उन्हें गोली मारी। घटना के समय झोटा फेसबुक लाइव कर रहे थे। परिवार गहन जांच के आश्वासन तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर रहा है।
झोटा हत्याकांड: जांच अब CBI के पास
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शाह के मानसा पहुंचने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री मान ने X पर पोस्ट कर CBI जांच की घोषणा की। मान ने कहा कि सरकार झोटा के परिवार के साथ खड़ी है और नशा तस्करों के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
वहीं भाजपा ने घोषणा के समय पर सवाल उठाए। पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष फतेह जंग सिंह बाजवा के अनुसार, मुख्यमंत्री को लगा कि शाह के दौरे में CBI जांच का आदेश हो सकता है, इसलिए राज्य सरकार ने पहले ही कदम उठा लिया। यानी एक ही फैसले के दो अलग-अलग राजनीतिक पाठ सामने हैं — दोनों को जानकर पाठक अपनी राय खुद बनाएं।
शाह ने दौरे के दौरान झोटा के परिवार को भरोसा दिया कि CBI की टीम बुधवार दोपहर तक मानसा पहुंच जाएगी। लुधियाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्यमंत्री से शेष दो मामलों की जांच भी CBI को सौंपने की अपील की।
चुनाव से पहले नशा क्यों केंद्र में है?
पंजाब में नशा दशकों पुराना मुद्दा है और हर चुनाव में यह सबसे भावनात्मक विषयों में एक रहता है। झोटा की हत्या के बाद 15 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद भी रखा गया था। शाह ने अपने दौरे का समापन लुधियाना के दरेसी ग्राउंड में दशहरा कार्यक्रम से किया, जहां रावण के पुतले के साथ नशे (चित्ता/हेरॉइन) के प्रतीक पुतले का भी दहन किया गया।
पंजाब की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हलचल पर हमने पहले भी लिखा है — सचिन पायलट की पंजाब यात्रा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा देखें।
हमारा विश्लेषण
इस दौरे का सबसे बड़ा तथ्यात्मक नतीजा है — झोटा केस की CBI जांच। लेकिन दो अन्य परिवारों के मामलों का भविष्य अभी खुला है। नशे के खिलाफ लड़ाई में जांच एजेंसी बदलना पहला कदम है; असली परीक्षा यह होगी कि जांच निष्पक्ष, तेज़ और नतीजे तक पहुंचे — चाहे दोषी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। पंजाब के मतदाता अगले साल की शुरुआत में इसका हिसाब मांगेंगे।
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