India's First Dengue Vaccination Pilot: TN Tests Qdenga in Tenkasi, Results to Guide National Rollout

तेनकासी, 20 अक्टूबर 2026 — डेंगू से भारत की लड़ाई में एक नया अध्याय जुड़ गया है। तमिलनाडु सरकार ने तेनकासी ज़िले के कदयनल्लूर कस्बे में डेंगू के टीके Qdenga का पायलट अध्ययन शुरू किया है। स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने 17 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की। रिपोर्टों के अनुसार, यह देश में डेंगू टीके का पहला पायलट अभियान है।

कदयनल्लूर को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां अतीत में डेंगू के मामलों और मौतों की संख्या ज़्यादा रही है। अध्ययन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (ICMR-NIE) के साथ मिलकर किया जा रहा है, और इसके नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण के फैसले की दिशा तय करेंगे।

तमिलनाडु के कदयनल्लूर में डेंगू के टीके Qdenga का पहला पायलट ट्रायल — स्वास्थ्य कार्यकर्ता टीकाकरण करते हुए

Qdenga: यह टीका क्या है?

Qdenga जापान की दवा कंपनी टकेडा (Takeda) का बनाया टीका है — डेंगू के चारों प्रकारों के खिलाफ एक ही टीका। भारत में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इसे जुलाई 2026 में 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंज़ूरी दी थी। टीके की दो खुराक तीन महीने के अंतर पर दी जाती हैं।

टीके की प्रभावशीलता को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने जो दावे किए, उन्हें उन्हीं के हवाले से रखना ज़रूरी है। मंत्री के अनुसार, दो खुराक डेंगू से 80% सुरक्षा देती हैं, 40 से ज़्यादा देशों ने इसे मंज़ूरी दी है, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे पूर्व-अर्हता (pre-qualification) प्रमाणपत्र दिया है, और ब्राज़ील ने इसे अपने सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है।

वहीं, NDTV की रिपोर्ट बताती है कि WHO की अपनी सिफारिश अधिक सीमित है — संगठन डेंगू टीकाकरण की सिफारिश केवल ज़्यादा संक्रमण वाले इलाकों में 6 से 16 साल की उम्र के बच्चों के लिए करता है, और वह भी मच्छर नियंत्रण और सही इलाज के साथ। यानी वैश्विक सिफारिश और मंत्री के दावों के बीच का फर्क ही वह बिंदु है, जिसकी जांच यह पायलट अध्ययन करेगा।

टीका कैसे काम करता है — और कौन ले सकता है?

Qdenga एक लाइव-एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट टीका है, यानी इसमें डेंगू के चारों सीरोटाइप के कमज़ोर किए गए रूप होते हैं। यह शरीर को बिना बीमार किए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का प्रशिक्षण देता है, ताकि असली संक्रमण होने पर शरीर पहले से तैयार हो। भारत में इसकी मंज़ूरी 4 से 60 साल की आयु वर्ग के लिए है, लेकिन पायलट में भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक है और लिखित सहमति के बाद ही टीका दिया जा रहा है।

पायलट स्टडी का डिजाइन: कदयनल्लूर ही क्यों?

पायलट के लिए ऐसा कस्बा चुना गया है जहां डेंगू का बोझ सबसे ज़्यादा रहा है — ताकि टीके का असर साफ दिखे। ICMR के वैज्ञानिक कदयनल्लूर में टीकाकरण के प्रभाव का अध्ययन करेंगे। मंत्री के अनुसार, इस अध्ययन के नतीजे पूरे देश के लिए मार्गदर्शक होंगे, और निरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही तमिलनाडु के अन्य ज़िलों में टीकाकरण बढ़ाने की घोषणा होगी।

अंतिम फैसला राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी परामर्श समूह (NTAGI) के पास जाएगा — यानी पायलट के आंकड़े ही तय करेंगे कि डेंगू का टीका भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा या नहीं।

एक ज़रूरी सावधानी

टीका डेंगू से लड़ाई का एक नया औज़ार ज़रूर है, लेकिन अकेला हथियार नहीं। बरसात के बाद मच्छरों के पनपने की स्थितियां हर साल डेंगू को चुनौती बनाती हैं, और मच्छर नियंत्रण व समय पर इलाज अब भी सबसे अहम हैं। भारत में स्वास्थ्य नीति के अन्य बड़े फैसलों पर भी नज़र डालें — जैसे 137 कैंसर दवाओं की कीमतों में कटौती और स्कूलों में माहवारी स्वच्छता पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी है, चिकित्सा सलाह नहीं।

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